अस्पताल में चल रहा था रिश्वत का खेल! मंत्री के निरीक्षण में खुलासा, 4 कर्मचारी बर्खास्त
किलपॉक सरकारी अस्पताल में चिकित्सा मंत्री का बड़ा एक्शन
- रिश्वत लेने के आरोप में चार चिकित्सा सहायक बर्खास्त
चेन्नई। तमिलनाडु के चिकित्सा एवं जनकल्याण मंत्री अरुणराज ने शुक्रवार को चेन्नई स्थित किलपॉक सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मरीजों और उनके परिजनों से मिली शिकायतों के आधार पर प्रसूति वार्ड में कथित रूप से रिश्वत मांगने के आरोप में चार चिकित्सा सहायकों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। मंत्री ने अस्पताल प्रशासन को स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता अपनाने के निर्देश दिए।
सरकारी अस्पताल में सुविधाओं की कमी, अव्यवस्था और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मंत्री अरुणराज बिना पूर्व सूचना के अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल की पुरानी और नई दोनों इमारतों का निरीक्षण किया तथा विभिन्न वार्डों, उपचार कक्षों और अन्य सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने भर्ती मरीजों, उनके परिजनों और उपचार के लिए आए लोगों से सीधे बातचीत कर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान कई परिजनों ने मंत्री के समक्ष गंभीर शिकायतें रखीं। उनका आरोप था कि प्रसूति वार्ड में कार्यरत कुछ कर्मचारी नवजात शिशु के जन्म की सूचना देने तथा परिजनों को बच्चे से मिलने या उसे देखने की अनुमति देने के बदले पैसे की मांग करते हैं। शिकायतकर्ताओं ने इसे अस्पताल में लंबे समय से चल रही अवैध वसूली की प्रवृत्ति बताया।
मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल में पेयजल की अपर्याप्त व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके साथ आने वाले लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रिश्वतखोरी के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने अस्पताल के डीन और रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें एक दिन पहले भी इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर प्रसूति वार्ड में तैनात चार चिकित्सा सहायकों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
इस कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए मंत्री अरुणराज ने स्पष्ट कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले गरीब, जरूरतमंद और आम नागरिकों से किसी भी कर्मचारी द्वारा किसी भी प्रकार की अवैध वसूली या रिश्वत मांगना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने अस्पताल में पेयजल संकट का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आज शाम तक पूरे अस्पताल का विस्तृत निरीक्षण कर पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए तथा जहां कमी हो, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य मुख्यालय से किसी भी समय किसी भी सरकारी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया जा सकता है। इसलिए सभी चिकित्सकों, कर्मचारियों और अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी, पारदर्शिता और अनुशासन के साथ निर्वहन करना चाहिए, ताकि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। मंत्री की अचानक हुई जांच और चार कर्मचारियों की तत्काल बर्खास्तगी के बाद किलपॉक सरकारी अस्पताल में कर्मचारियों के बीच हलचल तेज हो गई है।
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
