ये है दुनिया की सबसे महंगी सब्जी, 1000 यूरो प्रति किलो है दाम; कैसे करें इसकी खेती?
हॉप शूट्स की खेती: अगर सब्जियों की बात करें तो आम तौर पर दिमाग में आलू, प्याज, टमाटर का नाम ही दिमाग में आता है. बाजारों में इनकी मांग हमेशा बनी रहती है, क्योंकि इन सब्जियों के बिना अगर खाना बनाने के बारे में कोई सोच भी नहा सकता. यही वजह है कि भले ही इनका दाम बड़ जाए इनको हर आदमी को मजबूरी में खरीदना ही पड़ता है. लेकिन क्या आपने कभी एक ऐसी सब्जी के बारे में सूना है, जिसकी कीमत सुन कर हर कोई हैरान हो जाता है. जी हां, यह एक ऐसी सब्जी है जिसकी कीमत लाखों रुपये तक है. हम बात कर रहे हैं हॉप शूट्स (Hop Shoots Vegetable) कि, जिसकी कीमत 1000 यूरो प्रति किलो है यानी भारत में 80 हजार रुपये प्रती किलो.
दाम सुनने के बाद हर किसान के दिमाग में यही सवाल आता है कि आखिर इतनी महंगे बिकने वाले सब्जी कि खेती कैसे करें, क्या भारत के किसान भी इस सब्जी को उगा सकते हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
किन देशों में होती है हॉप शूट्स की खेती?
हॉप शूट्स कि खेती आज के समय में यूरोप, अमेरिका, कनाडा, चीन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में की जाती है. इस सब्जी के फूल को हॉप कोन्स कहते हैं, इस सब्जी के महंगे होने के पीछे एक और वजह है कि इस फूल का इस्तेमाल बीयर बनाने में भी किया जाता है. यही वजह है कि इसकी मांग बीयर बनाने वाली कंपनियों में सबसे ज्यादा रहती है. इसके अलावा इसकी नरम टहनियों को सलाद, अचार और सब्जी बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है.
बात करें भारत की, तो सालों पहले भारत में भी इसकी खेती हिमाचल प्रदेश की ठंडी जलवायु में शुरू की गई थी, लेकिन बाजार की इसकी कम मांग और खर्च ज्यादा होने के कारण किसानों ने इसकी खेती करना धीरे-धीरे कम कर दिया. फिर भी भारत में कई किसान ऐसे भी है जो इसकी खेती करते हैं, जिनको एक एकड़ जमीन से 362 से लेकर 680 किलोग्राम तक फसल मिल जाती है, जो कि किसानों के लिए एक बड़ा मुनाफा बन सकता है.
हॉप शूट्स की खेती का सही तरीका और समय
अब बात करते हैं इसकी खेती के तरीके की, तो इस पौधे को अच्छी बढ़त के लिए 6 इंच गहराई तक पानी की जरूरत होती है. और इसकी सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं किसानों को सलाह दी जाती है कि इसकी खेत तैयार करते समय 25 से 30 टन गोबर की खाद डालनी चाहिए, साथ ही सुपर फास्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटाश और नाइट्रोजन जैसी खाद का इस्तेमाल भी करना चाहिए.
अगर अब बात करें इसकी खेती करने के सही समय की तो इस खेती को करने के लिए ठंडे मौसम को अच्छा माना जाता है, साथ ही मार्च से जून का समय इसके लिए सबसे बेहतर माना जाता है. क्योंकि धूप और नमी दोनों इसकी तेज ग्रोथ के लिए जरूरी होते हैं.
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लेखक के बारे में
सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
