तहसील के अधिकारी एक्सप्रेसवे में व्यस्त, आम फरियादी हुआ पस्त!
सरोजनी नगर तहसील के सभी कंप्यूटर ऑपरेटर को एक्सप्रेसवे रजिस्ट्री के कार्यों में लगाया गया
लेखपाल राजस्व निरीक्षक भी प्रत्येक गांव में किसानों से मांग रहे सहमति
- कार्यालय छोड़ नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी भी एक्सप्रेसवे ड्यूटी में लगे
सरोजनी नगर, लखनऊ। राजधानी मुख्यालय से सटे सरोजनी नगर तहसील में इन दिनों महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं के दबाव के चलते राजस्व कार्यों से जुड़े मामले गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। स्थिति यह है कि नामांतरण (म्यूटेशन), दाखिल-खारिज, वरासत, राजस्व वादों और अन्य नियमित कार्यों पर व्यापक असर पड़ रहा है, जिससे वादी-फरियादियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तहसील सूत्रों के अनुसार उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल और कंप्यूटर आॅपरेटरों का बड़ा हिस्सा आगरा-लखनऊ पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना से संबंधित रजिस्ट्री और अभिलेखीय कार्यों में व्यस्त है। तहसील सभागार को ही अस्थायी कार्यस्थल बनाकर दिनभर रजिस्ट्री और अधिग्रहण संबंधी प्रक्रिया संचालित की जा रही है।
जबकि किसानों की सहमति के लिए पंचायतों में लेखपाल लगाए गए हैं। वहीं, क्षेत्रीय लेखपालों को विभिन्न गांवों और पंचायतों में किसानों की सहमति प्राप्त करने तथा भूमि अधिग्रहण से जुड़े कार्यों में लगा दिया गया है। इसके कारण तहसील और गांवों में नियमित राजस्व कार्यों के लिए लेखपालों की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
ये खबर भी पढ़े : केंद्र-प्रदेश सरकार की उपलब्धियों से रूबरू हुए लोग, आवास की चाबियां से लेकर उद्यमियों को मिले चेक।दाखिल-खारिज और राजस्व वादों का निस्तारण प्रभावित होता दिख रहा जबकि लंबित राजस्व वादों की सुनवाई एवं निस्तारण की प्रक्रिया काफी धीमी पड़ गई है। तहसील पहुंचने वाले वादी-फरियादियों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि कई मामलों में निर्धारित तिथियों पर भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
बिजनौर में लंबित हैं सबसे अधिक वाद...!
विभागीय जानकारी के अनुसार, अविवादित और विवादित दाखिल-खारिज वादों की सर्वाधिक संख्या नायब तहसीलदार न्यायिक कोर्ट बिजनौर और बिजनौर पी-2 न्यायालय में विचाराधीन है। नायब तहसीलदार शालिनी तिवारी को एक्सप्रेसवे परियोजना से संबंधित रजिस्ट्री कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। तहसील परिसर में उनकी मौजूदगी रहने के बावजूद वादों के निस्तारण की गति प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
अधिकारियों की ओर से प्राय: एक्सप्रेसवे कार्यों में व्यस्तता का हवाला दिया जाता है। इसी प्रकार नायब तहसीलदार अनूप श्रीवास्तव को भी क्षेत्रीय स्तर पर किसानों की सहमति प्राप्त कर रजिस्ट्री प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं तहसीलदार सुखवीर सिंह पर भी परियोजना से जुड़े कार्यों का अतिरिक्त भार होने के कारण नियमित राजस्व कार्य प्रभावित होने की बात जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कही जा रही है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
