शक्ति की आराधना के साथ गौ सेवा का प्रमुख स्थान है शक्तिपीठ देवीपाटन
महायोगी गुरु गोरक्षनाथ के काल से यहां चली आ रही गौ सेवा की परंपरा,
बलरामपुर । सनातन परंपरा में गौ को धर्म, संस्कृति, समृद्धि और करुणा का प्रतीक माना गया है। वेदों, पुराणों और धर्मग्रंथों में गौसेवा को मानव कल्याण तथा लोकमंगल का आधार बताया गया है। इसी आध्यात्मिक परंपरा को जीवंत रूप में देखा जा सकता है उत्तर प्रदेश के जनपद बलरामपुर में स्थित शक्तिपीठ देवीपाटन में, जहां शक्ति साधना के साथ गौसेवा को भी विशेष महत्व है। माना जाता है कि महायोगी गुरु गोरक्षनाथ के समय से यहां गौसेवा की परंपरा निरंतर चली आ रही है, जो आज भी श्रद्धा और समर्पण के साथ निभाई जा रही है।
51 शक्तिपीठों में प्रमुख स्थान रखने वाला देवीपाटन धाम शक्ति उपासना का केंद्र है। यहां पूरे वर्ष मां पाटेश्वरी के दर्शन के लिए देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। दर्शन-पूजन के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर स्थित गौशाला में जाकर गौसेवा करते हैं। कोई गायों को चारा खिलाता है तो कोई गुड़ और मिष्ठान अर्पित करता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि गौसेवा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
देवीपाटन मंदिर की गौशाला आज श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। यहां विभिन्न नस्लों की 250 से अधिक गायें, बछड़े और बछियाएं संरक्षित हैं। इनमें कामधेनु गाय विशेष रूप से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर प्रशासन द्वारा गौवंशों की देखभाल के लिए समुचित व्यवस्था की गई है। नियमित रूप से उनके भोजन, स्वास्थ्य और स्वच्छता का ध्यान रखा जाता है ताकि उन्हें सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके।
देवीपाटन पीठाधीश्वर महंत मिथिलेश नाथ योगी महाराज स्वयं प्रतिदिन सुबह और शाम गौशाला पहुंचते हैं। गौशाला में प्रवेश करते ही गायें और बछड़े उनके चारों ओर एकत्र हो जाते हैं। महंत अपने हाथों से उन्हें मिष्ठान्न खिलाते हैं और स्नेहपूर्वक उनके नाम लेकर पुकारते हैं। जैसे ही उनकी आवाज सुनाई देती है, गौवंश रंभाने लगते हैं और उनकी ओर बढ़ आते हैं। मनुष्य और गौवंश के बीच प्रेम, सेवा और संवेदना का यह दृश्य श्रद्धालुओं को गहरे तक प्रभावित करता है।
पीठाधीश्वर महंत मिथिलेश नाथ योगी बताते हैं कि नाथ परंपरा में गौसेवा को लोककल्याण और धर्म साधना का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। महायोगी गुरु गोरक्षनाथ ने जहां योग, अध्यात्म और मानव सेवा का संदेश दिया, वहीं गौरक्षा और गौसेवा को भी समाज के लिए आवश्यक बताया। देवीपाटन पीठ पर उसी परंपरा का निर्वहन आज भी किया जा रहा है।
मान्यता है कि शक्तिपीठ देवीपाटन की स्थापना महायोगी गुरु गोरक्षनाथ ने की थी। यहां उनकी प्रज्वलित धूनी आज भी निरंतर जल रही है। उसी आध्यात्मिक विरासत के साथ गौसेवा की यह परंपरा भी युगों से चली आ रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी जब देवीपाटन आते हैं तो गौशाला में पहुंचकर गौसेवा करते हैं ।
धार्मिक आस्था, सेवा, करुणा और जीव मात्र के प्रति सम्मान का संदेश देने वाली देवीपाटन गौशाला आज केवल गौवंशों के संरक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि समाज को संवेदनशील और संस्कारित बनाने की एक प्रेरणादायी पाठशाला बन चुकी है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु शक्ति की आराधना के साथ गौसेवा के महत्व को भी आत्मसात कर लौटता है।
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लेखक के बारे में
सुधा जायसवाल ने मास कम्युनिकेशन एवं पत्रकारिता (MJMC) में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है और पत्रकारिता क्षेत्र में 12 वर्षों से सक्रिय हैं। वह अमर उजाला, स्वतंत्र भारत, जनसंदेश टाइम्स और तरुण मित्र जैसे संस्थानों में कार्य कर चुकी हैं। राजनीतिक, शिक्षा और नगर निगम सहित विभिन्न बीट्स पर रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाली सुधा वर्तमान में तरुण मित्र के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं।
