दुग्ध शक्ति से समृद्ध हो रहीं मातृ शक्ति
लखनऊ। प्रदेश में महिला नेतृत्व वाली मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां ग्रामीण दुग्ध अर्थव्यवस्था में बदलाव की मजबूत धुरी बन गयी है। वर्तमान में इन कंपनियों से लगभग 3.25 लाख महिला दुग्ध उत्पादक संगठित रूप से जुड़ी हैं और इनके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 12.5 लाख लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है। यह पहल महिलाओं को केवल दुग्ध उत्पादक के रूप में नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक गतिविधियों की सक्रिय भागीदार और उद्यमी के रूप में स्थापित कर रही है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिला नेतृत्व वाला यह दुग्ध मूल्य श्रृंखला मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के अवसर बढ़ाने के साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब उत्पादन से लेकर संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन तक की संगठित आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, नियमित बैंक भुगतान, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और संगठित दुग्ध बाजार ने आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाया है। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व वाला यह मॉडल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
