लखीमपुर: 'सुलह' के बाद भी डॉक्टर मुनीफ पर नए दबाव का खेल, क्या वसूली का जरिया बना कानून?
अदालत से क्लीन चिट मिलने के बाद भी डॉक्टर को मानसिक रूप से दबाने की कोशिश; सक्रिय ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट पर SP कर सकते हैं बड़ा एक्शन!
तलहा हसन
लखीमपुर-खीरी। महिला थाने में दर्ज मुकदमा संख्या *127/2025* अब साधारण विवाद नहीं, बल्कि एक प्रतिष्ठित डॉक्टर को जाल में फंसाकर मोटी रकम ऐंठने और उसके बाद भी ब्लैकमेल करने की गहरी साजिश का रूप लेता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, न्यायालय द्वारा केस बंद किए जाने के बाद भी डॉक्टर मुनीफ खान पर लगातार नया दबाव बनाया जा रहा है, जो सीधे तौर पर एक सोची-समझी ब्लैकमेलिंग की तरफ इशारा करता है।
जब खुद पीड़िता ने कहा- "बहकावे में दर्ज कराया था केस"
ये खबर भी पढ़े : जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सपा का कलेक्ट्रेट पर विशाल धरना-प्रदर्शन, आठ सूत्रीय मांगपत्र सौंपादस्तावेजों के अनुसार, पीड़िता सबीना ने स्वयं पुलिस अधीक्षक और न्यायालय के समक्ष शपथ पत्र देकर स्वीकार किया था कि उसने *"कुछ लोगों के बहकावे में आकर गलत मुकदमा दर्ज करा दिया था।"* युवती ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान में साफ कहा कि: "डॉ० मुनीफ ने मुझे शादी का झांसा नहीं दिया था और न ही मेरे साथ कोई शारीरिक संबंध बनाए थे। डॉ० मुनीफ ने न तो मेरा गर्भपात कराया और न ही मारपीट की।"
इसी आधार पर महिला अदालत लखीमपुर खीरी ने 28 जनवरी 2026 को ही पुलिस की अंतिम रिपोर्ट (FR) स्वीकार कर केस बंद कर दिया था।
क्लीन चिट के बाद दबाव क्यों? उठ रहे गंभीर सवाल: कौन है मास्टरमाइंड?: जब युवती ने खुद माना कि डॉक्टर निर्दोष हैं और केस बंद हो चुका है, तो फिर डॉक्टर को मानसिक रूप से और ज्यादा दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है?
वसूली का सिंडिकेट सक्रिय?: चर्चा है कि जिले में एक ऐसा सिंडिकेट सक्रिय है जो सम्भ्रांत लोगों को संगीन धाराओं में फंसाता है, फिर सुलह के नाम पर मोटी रकम ऐंठकर भी ब्लैकमेलिंग बंद नहीं करता।
सूत्रों की मानें तो इस नए दबाव से तंग आकर अब डॉक्टर पक्ष इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस प्रशासन की शरण में जाने की तैयारी कर रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि डॉक्टर को प्रताड़ित करने या पैसे ऐंठने के पुख्ता सबूत पुलिस अधीक्षक (SP) के सामने आते हैं, तो पर्दे के पीछे से खेल रहे सफेदपोशों पर ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी का भारी मुकदमा दर्ज होना तय है।
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