आलू भंडारण पर 100 रु कुंतल की छूट
उद्यान मंत्री ने लांच किया पोर्टल , 15 लाख किसानों को मिलेगा लाभ
लखनऊ। आलू की अधिक पैदावार होने से बाजार में दाम स्थिर है। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए 1000 करोड़ रुपये के भामाशाह भाव स्थिरता कोष की स्थापना की गई है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये की टोकन धनराशि का प्रावधान किया गया है। किसानों को उत्पादन लागत के 25 प्रतिशत एवं बिक्री दर के अंतर में से जो राशि कम होगी, वह अनुदान के रूप में देय होगी। प्रति किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर तथा प्रति हेक्टेयर पर 240 क्विंटल पर अनुदान मिलेगा। इससे लगभग 15 लाख किसान लाभान्वित होंगे।
उघान भवन में सोमवार को उद्यान, एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आॅनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि योजना के लिए किसानों को आॅनलाइन आवेदन करना होगा, आॅफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। पात्र किसानों को अनुदान की धनराशि सीधे बैंक खाते में अंतरित की जाएगी। क्रियान्वयन अवधि 01 जनवरी से 15 अप्रैल तथा 01 जुलाई से 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है। लाभ के लिए क्रेता-विक्रेता सौदा प्रपत्र अनिवार्य होगा और किसान मंडी, उपमंडी, शीतगृह परिसर पर बिक्री कर लाभ ले सकेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2363 निजी शीतगृहों में 173.03 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित है। भंडारण प्रभार में छूट के लिए 1000 करोड़ रुपये की योजना लागू की गई है, जिसमें 100 करोड़ टोकन धनराशि प्रावधानित है। इसके तहत 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान दिया जाएगा, प्रति किसान अधिकतम 20,000 रुपये तक।
इस योजना से 15 लाख से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। साथ ही किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली प्रजातियों के आलू बीज उपलब्ध कराने के लिए 5 करोड़ रुपये की बीज विक्रय दर में छूट योजना लागू की गई है। आलू बीज के क्रय पर अधिकतम 1000 रुपये प्रति क्विंटल की छूट दी जाएगी, जिससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन लागत में कमी आएगी। इस अवसार पर अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा, निदेशक उद्यान बीपी राम, अपर निदेशक उघान डॉ सृष्ठि धवन सहित कई अधिकारी एवं आलू किसान उपस्थित रहे।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
