गोण्डा। केंद्रीय राज्य मंत्री के नाम और कथित फर्जी सरकारी पद का इस्तेमाल कर प्रशासन से वीआईपी प्रोटोकॉल हासिल करने के सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। कोतवाली मनकापुर पुलिस ने सर्वेश पाठक के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और सरकारी तंत्र को गुमराह करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामला सामने आने के बाद सरकारी महकमे में भी हड़कंप मच गया है।
शिकायत केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह के अपर निजी सचिव यू.पी. सिंह की ओर से दी गई। आरोप है कि सर्वेश पाठक खुद को 'राष्ट्रीय महासचिव, भारतीय श्रमिक कामगार कर्मचारी महासंघ' तथा 'वाइस चेयरमैन, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन संवर्धन प्रकृति कल्याण परिषद भारत' बताकर कूटरचित लेटर पैड के जरिए जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजता था और वीआईपी प्रोटोकॉल प्राप्त करता था।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सरकारी कार्यक्रमों, विशेषकर वृक्षारोपण अभियानों में शामिल होकर सरकारी बोर्डों पर खुद को "केंद्रीय दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री" तक लिखवाता था। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में भी वह स्वयं को भारत सरकार के कथित 'नेचर वेलफेयर डिपार्टमेंट' का वाइस चेयरमैन बताकर प्रचारित करता रहा, जबकि प्रारंभिक जांच में ऐसे किसी विभाग के अस्तित्व की पुष्टि नहीं हुई।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने केंद्रीय राज्य मंत्री की पहचान और प्रतिष्ठा का दुरुपयोग कर अपनी निजी एवं राजनीतिक छवि चमकाने का प्रयास किया, जिससे मंत्री की सार्वजनिक छवि भी प्रभावित हुई। कोतवाली मनकापुर के प्रभारी निरीक्षक गौरव सिंह तोमर ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की गहन जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सरकारी प्रोटोकॉल व्यवस्था और फर्जी पहचान के जरिए प्रशासन को गुमराह करने की गंभीर साजिश के रूप में देखा जा रहा है।