महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, 1.6 लाख गोविंदाओं के लिए बीमा सुरक्षा!
जानें- किसे मिलेगा 10 लाख रुपये का मुआवजा?
By Rajesh Jaiswal
मुंबई। महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने दही-हंडी उत्सव के लिए गोविंदाओं को बड़ी सौगात देते हुए बीमा सुरक्षा देने का ऐलान किया है। महायुति सरकार ने इस साल दही-हंडी उत्सव में शामिल होने वाले करीब 1.60 लाख गोविंदाओं को बीमा सुरक्षा देने का फैसला करते हुए कहा कि गतिविधियों में शामिल होने के दौरान किसी भी अप्रिय हादसे में अगर किसी की मौत या पूरी तरह से स्थायी विकलांगता की स्थिति बनती है तो पीड़ित को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। पिछले वर्ष राज्य सरकार ने 1.5 लाख गोविंदाओं के लिए बीमा कवर का ऐलान किया था, जिसे इस बार बढ़ाकर 1.60 लाख कर दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार के खेल विभाग ने गुरुवार को यह घोषणा की और कहा कि इस बेहतर योजना का मकसद हादसे की स्थिति में गोविंदाओं और उनके परिवारों के लिए वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करना है।
दही-हंडी उत्सव में हिस्सा लेने वाले गोविंदाओं की सुरक्षा के लिए, सरकार 'द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी' के जरिए हर प्रतिभागी के लिए 75 रुपये की दर से बीमा का खर्च उठाएगी। इस काम के लिए खेल विकास कोष से 1.12 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। यह स्कीम महाराष्ट्र राज्य दही-हंडी गोविंदा एसोसिएशन और खेल एवं युवा सेवा विभाग के साथ मिलकर लागू की जाएगी। इस बीमा कवर का मकसद उन गोविंदाओं की मदद करना है जो अक्सर इंसानी पिरामिड बनाते समय गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या फिर मारे जाते हैं। अब इस बीमा योजना के तहत, दही-हंडी गतिविधियों के दौरान हादसे में मौत हो जाने या पूरी तरह से स्थायी विकलांगता होने की स्थिति में पीड़ित या उसके परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। हादसे में एक हाथ, एक पैर या एक आंख गंवाने वाले प्रतिभागियों को 5 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा, जबकि चोट लगने पर अस्पताल में भर्ती होने का खर्च 1 लाख रुपये तक कवर किया जाएगा।
राज्य सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों के अनुसार, दही-हंडी में इंसानी पिरामिड बनाने को पहले ही एक एडवेंचर स्पोर्ट का दर्जा दिया है। इसने उत्सव के दौरान जोखिम को कम करने के लिए जरूरी सुरक्षा दिशा-निर्देश भी तय कर दिए हैं। इसके अलावा, उत्सव के दौरान घायल होने वाले गोविंदा सरकारी और अर्ध-सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की व्यवस्था की गई है।
खेल विभाग ने कहा कि बीमा योजना को एक सरकारी बीमा कंपनी के जरिए लागू किया जाएगा, और इसमें प्रति प्रतिभागी 75 रुपये या उससे कम प्रीमियम के आधार पर चुना जाएगा, इस योजना का खर्च राज्य खेल विकास कोष उठाएगा।
किसे मिलेगा 10 लाख रुपये का मुआवजा?
यहां सरकार ने साफ किया है कि इस महत्वाकांक्षी योजना का फायदा सिर्फ उन्हीं गोविंदाओं को मिलेगा, जो 'महाराष्ट्र राज्य गोविंदा एसोसिएशन' द्वारा सत्यापित और पंजीकृत होंगे। इसके अलावा अदालत द्वारा निर्धारित न्यूनतम आयु सीमा का पालन करना भी अनिवार्य होगा। यह बीमा कवर केवल दही-हांडी उत्सव के दौरान मानव पिरामिड बनाते समय हुई दुर्घटनाओं पर ही लागू होगा। किसी अन्य कारण से लगी चोट या व्यक्तिगत दुर्घटना को इसके दायरे में शामिल नहीं किया गया है। मानव पिरामिड जिसमें कई लोग एक-दूसरे के ऊपर खड़े होकर, बैठकर या घुटने टेककर पिरामिड (त्रिकोणीय) जैसा आकार बनाते हैं।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
राजेश जायसवाल को पत्रकारिता क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव है। अपने लंबे करियर में उन्होंने समाचार लेखन और रिपोर्टिंग के विभिन्न दायित्व निभाए हैं। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में कार्यरत हैं।
