केंद्र का विदेश से आयात होने वाली दवाओं के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विदेश से आयात होने वाली दवाओं के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का मसौदा अधिसूचित करते हुए इस पर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव व आपत्तियां मांगी हैं।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, अब अधिकांश दवाओं के देश में प्रवेश के समय कम से कम 12 महीने की शेल्फ लाइफ बची होना पर्याप्त होगा। अभी तक यह अनिवार्य है कि दवा की कुल शेल्फ लाइफ का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शेष हो। हालांकि, बायोलॉजिकल दवाओं और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के लिए मौजूदा 60 प्रतिशत शेल्फ लाइफ का नियम पहले की तरह लागू रहेगा और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।
ये खबर भी पढ़े : इंटर्नशिप में छात्र-छात्राओं को मिले आत्मविश्वास, समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और नई सीखस्वास्थ्य मंत्रालय की आज जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस बदलाव से दवाओं की सप्लाई चेन अधिक प्रभावी होगी। दवाओं की बर्बादी कम होगी और कंपनियां अपने स्टॉक का बेहतर प्रबंधन कर सकेंगी। इससे लागत में कमी आने के साथ ही आवश्यक दवाओं की उपलब्धता में भी सुधार होने की उम्मीद है।
ये खबर भी पढ़े : उपराष्ट्रपति और गृहमंत्री ने देशवासियों से 'नशा मुक्त भारत' बनाने के संकल्प को दोहराने का किया आग्रहमंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधन केवल आयात के समय दवाओं की शेष शेल्फ लाइफ से जुड़ा है। दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े सभी मौजूदा मानक और नियम पहले की तरह लागू रहेंगे।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
