14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर गंभीर आपराधिक मामले, रिपोर्ट में खुलासा....
नई दिल्ली: मौजूदा और पूर्व सांसदों/विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों में सुनवाई तेज़ करने की एक दशक पुरानी कार्यवाही के दौरान, एमिकस क्यूरी और सीनियर एडवोकेट विजय हंसारिया ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले हैं। इस लिस्ट में तेलंगाना के ए. रेवंत रेड्डी सबसे ऊपर हैं, जिन पर 89 मामले दर्ज हैं।
पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी पर 29 मामले, कर्नाटक के सीएम डी. शिवकुमार पर 19, आंध्र प्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू पर 19, केरल के सीएम वी.डी. सतीसन पर 18, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन पर 5, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस पर 4.
हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह पर 4, तमिलनाडु के सीएम सी. जोसेफ विजय पर 2, बिहार के सीएम सम्राट चौधरी पर 2 और चार अन्य नेताओं - पी.एस. तमांग (सिक्किम), भगवंत मान (पंजाब), मोहन चरण माझी (ओडिशा) और भजन लाल शर्मा (राजस्थान) - पर एक-एक मामला दर्ज है।
गंभीर आपराधिक मामलों वाले विधायकों का सबसे ज़्यादा प्रतिशत बंगाल से है - 292 में से 170 (58%)। इसके बाद केरल (57%), आंध्र प्रदेश (56%), तेलंगाना (49%), झारखंड और ओडिशा (दोनों 45%), बिहार (42%), महाराष्ट्र (40%) और यूपी का नंबर आता है। यह जानकारी हंसारिया द्वारा दाखिल 96 पेज की रिपोर्ट में सामने आई।
लोकसभा में, 170 सांसदों (कुल 543 की संख्या का 31%) के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। तेलंगाना में 17 में से 11 सांसदों पर गंभीर आपराधिक मामले हैं; केरल में 21 में से 11 सांसदों पर; बिहार में 40 में से 19 सांसदों पर; और यूपी में 80 में से 34 सांसदों पर ऐसे मामले हैं।
महाराष्ट्र में 48 में से 17 सांसदों, बंगाल में 42 में से 16 सांसदों और आंध्र प्रदेश में 25 में से 9 सांसदों पर गंभीर आपराधिक मामले हैं।
हंसारिया ने बताया कि जुलाई 2026 तक, मौजूदा और पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,192 आपराधिक मामलों में सुनवाई लंबित है। उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा, यानी 1,171 मामले लंबित हैं।
वकील स्नेहा कलिता की ओर से दायर 'एमिकस' रिपोर्ट के अनुसार, राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 (33%) के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 40 (18%) मामले गंभीर आपराधिक श्रेणी के हैं (जिनमें पांच साल या उससे ज़्यादा की सज़ा हो सकती है)।
'एमिकस' ने अदालत से अनुरोध किया कि मौजूदा और पूर्व विधायकों के ख़िलाफ़ मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें तय की जाएं और संबंधित हाई कोर्ट को इन मुकदमों की प्रगति पर सक्रिय रूप से नज़र रखने का निर्देश दिया जाए।
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