संपादकीय: संसद तक गूंज! जनता में आक्रोश; 14 साल बाद फिर भारी भीड़

बल प्रयोग से नहीं बुझता जन-आक्रोश 

Published By Harshit
On
Harshit Picture
By Harshit

  • 14 साल बाद फिर उठी बड़े बदलाव और न्याय की मांग

चौदह साल का लंबा अंतराल और एक बार फिर देश की सर्वोच्च पंचायत यानी संसद के दरवाजे जन-आक्रोश की गूंज से हिल उठे हैं। साल 2012 की वे सर्द रातें शायद ही कोई भूला हो, जब 'निर्भया' के साथ हुई अमानवीय दरिंदगी ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया था और युवाओं का एक विशाल हुजूम रायसीना हिल्स और संसद के आसपास उमड़ पड़ा था। आज, 14 साल बाद, जब प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने एक बार फिर सभी अवरोधों को पार करते हुए उसी अति-सुरक्षित इलाके में दस्तक दी है, तो यह केवल इतिहास की पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा और गंभीर सवाल है। जब भी कोई भीड़ संसद के दरवाजों तक पहुंचती है, तो वह महज कुछ शिकायतें या पर्चे लेकर नहीं आती, वह अपने साथ लाती है हताशा, गहरा क्षोभ और व्यवस्था द्वारा अनसुना किए जाने का अहसास। 

लोकतंत्र का बुनियादी उसूल है कि जनता अपने प्रतिनिधि चुनकर इसलिए भेजती है ताकि उनकी आवाज सदन के भीतर गूंजे और उनकी समस्याओं का समाधान नीतियों के जरिए हो। लेकिन, जब सड़क की पीड़ा को सदन के वातानुकूलित कमरों में जगह नहीं मिलती, तो सड़क ही सदन की ओर कूच करने को विवश हो जाती है। 2012 का वह आंदोलन किसी राजनीतिक दल द्वारा प्रायोजित नहीं था, वह अन्याय के खिलाफ एक स्वतः स्फूर्त जन-उबाल था, जिसने सत्ता के गलियारों को उनकी गहरी नींद से झकझोर कर जगा दिया था। 

हर बच्चा भविष्य का पृष्ठ : लेकिन हम पन्ने भर रहे हैं या लिख रहे हैं? ये खबर भी पढ़े : हर बच्चा भविष्य का पृष्ठ : लेकिन हम पन्ने भर रहे हैं या लिख रहे हैं?

आज का यह प्रदर्शन भी इसी बात का स्पष्ट प्रतीक है कि सत्ता और अवाम के बीच कहीं न कहीं एक गहरी संवादहीनता की स्थिति पैदा हो चुकी है। सरकार और प्रशासन को इस घटना को महज 'कानून-व्यवस्था' की एक आम समस्या मानकर खारिज करने की भूल नहीं करनी चाहिए। 

बैरिकेड्स का टूटना या प्रदर्शनकारियों का इतने संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश कर जाना निश्चित तौर पर सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है, लेकिन इसके पीछे छिपे उस मूल कारण को समझना ज्यादा जरूरी है जिसने लोगों को इस कदर उद्वेलित किया। जब देश के आम नागरिक को लगने लगता है कि उसकी गुहार सरकारी फाइलों में दम तोड़ रही है और कार्यपालिका सहित न्यायपालिका पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है, तब वह इंसाफ के लिए अपनी सर्वोच्च संस्था का दरवाजा खटखटाता है। 

लोकतंत्र केवल हर पांच साल में होने वाले चुनावों का उत्सव नहीं है। यह निरंतर संवाद, असहमति के सम्मान और जवाबदेही की एक जीवंत प्रक्रिया है। संसद तक पहुंची यह भीड़ कोई विदेशी दुश्मन नहीं है, बल्कि इसी देश के नागरिक हैं। पुलिस के डंडों, पानी की तेज बौछारों या आंसू गैस के गोलों से भीड़ को कुछ समय के लिए तीतर-बीतर जरूर किया जा सकता है, लेकिन उनके मन में सुलग रहे सवालों की आग को इस तरह नहीं बुझाया जा सकता। 

जरूरत इस बात की है कि सरकार इस दस्तक को एक चेतावनी और अवसर, दोनों रूपों में ले। 2012 के उस ऐतिहासिक आंदोलन ने देश के नीति-निर्माताओं को महिला सुरक्षा को लेकर कड़े कानून बनाने पर मजबूर कर दिया था। आज भी, 14 साल बाद उठी यह लहर किसी बड़े बदलाव या न्याय की मांग कर रही है। सत्ता प्रतिष्ठान को अपना अहंकार छोड़कर जनता से सीधा संवाद स्थापित करना चाहिए। 

संसद की चौखट पर पहुंची भीड़ को व्यवस्था के लिए चुनौती नहीं, बल्कि लोकतंत्र को जिंदा रखने वाली धड़कन समझना चाहिए। अगर जन-आक्रोश की इस भाषा को समय रहते नहीं पढ़ा और समझा गया, तो यह हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के माथे पर एक गहरी विफलता का दाग होगा।

लेखक के बारे में

Harshit Picture

हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

नवीनतम

बाल संसद ने संभाली संकुल बैठक की कमान, छठवीं की अंकिता की ‘मन की बात’ ने जीता दिल

उन्नाव। औरास के यूपीएस रामपुर गढ़ौवा में संकुल बैठक को विभागीय एजेंडे के साथ बाल नेतृत्व और शैक्षिक नवाचारों से...
बाल संसद ने संभाली संकुल बैठक की कमान, छठवीं की अंकिता की ‘मन की बात’ ने जीता दिल

मारुति सुजुकी ने फिर बढ़ाए कारों के दाम, 1 अगस्त से 30 हजार रुपये तक होगी महंगी

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) ने 1, अगस्त से अपने विभिन्न...
कारोबार 
मारुति सुजुकी ने फिर बढ़ाए कारों के दाम, 1 अगस्त से 30 हजार रुपये तक होगी महंगी

स्मार्ट सिटी के जेई पर रिश्वत व डिजिटल अरेस्ट का केस, जांच में मिल चुकी थी क्लीनचिट

झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी नगर निगम स्मार्ट सिटी परियोजना में तैनात जूनियर इंजीनियर (जेई) सुनील कुमार के खिलाफ रिश्वत...
उत्तर प्रदेश 
स्मार्ट सिटी के जेई पर रिश्वत व डिजिटल अरेस्ट का केस, जांच में मिल चुकी थी क्लीनचिट

शासन का बड़ा एक्शन: पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डॉ. अनिल कुमार निलंबित

उन्नाव। उत्तर प्रदेश शासन ने पशुपालन विभाग के अपर निदेशक ग्रेड-2, प्रयागराज मंडल डॉ. अनिल कुमार को गंभीर आरोपों के...
शासन का बड़ा एक्शन: पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डॉ. अनिल कुमार निलंबित

दिल्ली छात्र आंदोलन के समर्थन में अजमेर कांग्रेस का प्रदर्शन, पीएम मोदी का पुतला फूंका

अजमेर। नई दिल्ली में छात्रों पर कथित बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी एवं...
राजस्थान 
दिल्ली छात्र आंदोलन के समर्थन में अजमेर कांग्रेस का प्रदर्शन, पीएम मोदी का पुतला फूंका

उत्तर प्रदेश

स्मार्ट सिटी के जेई पर रिश्वत व डिजिटल अरेस्ट का केस, जांच में मिल चुकी थी क्लीनचिट

झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी नगर निगम स्मार्ट सिटी परियोजना में तैनात जूनियर इंजीनियर (जेई) सुनील कुमार के खिलाफ रिश्वत...
उत्तर प्रदेश 
स्मार्ट सिटी के जेई पर रिश्वत व डिजिटल अरेस्ट का केस, जांच में मिल चुकी थी क्लीनचिट

फर्रुखाबाद: विवाहिता की संदिग्ध मौत, मायके पक्ष ने ससुरालियों पर हत्या का लगाया आरोप

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र स्थित गांव जानकीपुर में मंगलवार को 26 वर्षीय विवाहिता की...
उत्तर प्रदेश 
फर्रुखाबाद: विवाहिता की संदिग्ध मौत, मायके पक्ष ने ससुरालियों पर हत्या का लगाया आरोप

राहुल-प्रियंका की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस का ऐलान, कल बुधवार को मंझनपुर में प्रदर्शन; बड़ी संख्या में कार्यकर्ता लखनऊ होंगे रवाना

कौशाम्बी। दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में कौशाम्बी कांग्रेस ने...
उत्तर प्रदेश 
राहुल-प्रियंका की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस का ऐलान, कल बुधवार को मंझनपुर में प्रदर्शन; बड़ी संख्या में कार्यकर्ता लखनऊ होंगे रवाना

एक ही दिन उजड़ गया पूरा परिवार: मां की मौत के सदमे में पिता ने भी तोड़ा दम, दो मासूम बेटे हुए अनाथ

औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में दिबियापुर थाना क्षेत्र के माधवपुर गांव में मंगलवार को एक ऐसी दर्दनाक घटना...
राज्य  उत्तर प्रदेश 
एक ही दिन उजड़ गया पूरा परिवार: मां की मौत के सदमे में पिता ने भी तोड़ा दम, दो मासूम बेटे हुए अनाथ