अधिवक्ताओं को कैशलेश इलाज की सुविधा देने को बनाएंगे व्यवस्था : सीएम योगी

बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट गोरखपुर की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी परिचय समारोह

Published By Sanjay srivastava
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बोले योगी - सिर्फ मुकदमा नहीं लड़ते अधिवक्ता, वे समाज के विधिक सलाहकार और संविधान के सारथी भी

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिवक्ताओं को बड़ा आश्वासन देते हुए कहा कि वह, अधिवक्ताओं को कैशलेश इलाज की सुविधा देने के लिए तैयार हैं। इसके लिए एक व्यवस्था बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं को देश और समाज का सजग प्रहरी बताते हुए आह्वान किया कि वे देश और समाज के खिलाफ होने वाली साजिशों का प्रतिकार करने के लिए चौकन्ना रहें। 

सीएम योगी मंगलवार को बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट गोरखपुर की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के परिचय समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को बधाई दी और आजादी के आंदोलन से लेकर वर्तमान कालखंड में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। सीएम योगी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के तीनों स्तम्भ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका ने एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए और लक्ष्मण रेखा के भीतर संविधान के प्रति निष्ठा से कार्य करते हुए सामान्य नागरिक को लाभान्वित किया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और अन्य स्तम्भों के बीच संवाद को बढ़ाने में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अधिवक्ता, न्यायपालिका तक नागरिकों की बात पहुंचाने और समाधान निकालने के साथ नागरिक और न्यायपालिका के बीच विश्वास का संबंध बनाने में अपनी भूमिका का निर्वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता सिर्फ मुकदमा नहीं लड़ते बल्कि नागरिकों के विश्वास के प्रतीक होते हैं। वह समाज के विधिक सलाहकार और संविधान के सारथी की भूमिका में होते हैं।  

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गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध ढंग से सर्वसुलभ न्याय से स्थापित होता है विधि का शासन

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधि का शासन तभी स्थापित होता है जब न्याय गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध ढंग से सर्वसुलभ होता है। गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और सर्वसुलभ न्याय के सबसे बड़े वाहक अधिवक्ता ही होते हैं। उन्होंने कहा कि समयबद्ध तरीके से न्याय सर्वसुलभ कराने के लिए देश में जो तीन नए कानून आए, उन्हें सफलतापूर्वक लागू कराने में सबसे बड़ा योगदान अधिवक्ताओं ने दिया है। 

भारत के प्रति बढ़े आकर्षण को स्वीकार करने को तैयार नहीं कई ताकतें

सीएम योगी ने कहा कि बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरी दुनिया में भारत के प्रति जो आकर्षण बढ़ा है उसे कई ताकतें स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत बॉटम फाइव से टॉप फाइव देशों में आ चुका है अब अब टॉप थ्री में आने को तत्पर है। भारत की इस प्रगति यात्रा को रोकने के लिए अनेक षड्यंत्र किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर और फेंक एकाउंट्स के जरिये जातीय समूहों को आपस में लड़ाने, क्षेत्र, मत, भाषा के आधार पर समाज को विभाजित करने का प्रयास किया जाएगा। साजिशन न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका पर अंगुली उठाने की कोशिश की जाएगी। ऐसे में अधिवक्ताओं की बड़ी भूमिका होने वाली है, उन्हें देश और समाज के प्रति होने वाली साजिशों के विरुद्ध खुद को तैयार रखना होगा। 

अब अपनी नीति खुद बनाता है भारत और खुद ही नियंता भी

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के 70 वर्ष तक हम उन्हें देख रहे थे जिन्होंने हमें गुलाम बनाया था। अब भारत खुद अपनी नीति बनाता है और इन नीतियों का नियंता भी खुद है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने गत 12 वर्षों मेंबदलते भारत की तस्वीर को देखा है। इस दौरान देश में आए 360 डिग्री के अंतर के अंतर को देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि 12 वर्ष पूर्व भारत को दुनिया में कमजोर देश, मूल्यों से विमुख देश के रूप में देखा जाता था। गरीबी, बदहाली, अराजकता, भ्रष्टाचार नियति बन चुकी थी। जबकि आज इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के साथ मूल्यों और आदर्शों पर प्रतिबद्ध भारत विरासत का संरक्षण करते हुए एक भारत श्रेष्ठ भारत की यात्रा पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज भारत समृद्ध आर्थिक व्यवस्था वाला देश बन चुका है। 12 वर्ष से भारत के प्रगति की जो गति है, वह अद्भुत है। अब यहां चेहरा, जाति, मत और महजब देखकर नहीं बल्कि संविधान के मूल भाव समता और न्याय के हिसाब से कार्य होते हैं। बिना भेदभाव सबको योजनाओं का लाभ दिया जाता है। 

25 करोड़ की आबादी गरीबी की रेखा से उबरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा 12 वर्षों में देश की नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं का परिणाम है कि 25 करोड़ की आबादी गरीबी की रेखा से उबरकर सामान्य जीवनयापन कर रही है। उन्होंने कहा कि जिसके बारे में कोई सोचता तक नहीं था, आज वह उपलब्धियां देश के सामने हैं। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है, 50 करोड़ लोगों को आयुष्मान कार्ड से स्वास्थ्य रक्षा का लाभ मिल रहा है, 4 करोड़ लोगों के सरकार की योजना से घर बने, 12 करोड़ घरों में शौचालय बने, 45 करोड़ लोगों के जनधन खाते खुले और 12 करोड़ लोगों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन मिले। उन्होंने कोविड काल में मात्र नौ माह में वैक्सीन बना लेने के भारत के सामर्थ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने न सिर्फ अपने नागरिकों के लिए बल्कि दुनिया के 100 अन्य देशों के लिए भी वैक्सीन उपलब्ध कराई। इस संदर्भ में उन्होंने इंसेफेलाइटिस का उल्लेख करते हुए कहा कि जापान ने इंसेफेलाइटिस की वैक्सीन 1905 में ही बना ली थी लेकिन इसे भारत आने में 100 साल लग गए। 2005 में यह वैक्सीन तब उपलब्ध हुई जब उन्होंने अधिवक्ताओं और अन्य नागरिको के लिए आंदोलन किया था। उन्होंने कहा कि इंसेफेलाइटिस नियंत्रण समेत अन्य तस्वीर सिर्फ राजनीतिक निर्णय से नहीं बदली है बल्कि सबके साथ से बदली है। 

यूपी में पूरी प्रतिबद्धता से लागू किया कानून का राज

मुख्यमंत्री ने कहा 2017 के पहले कोई यूपी के बारे में अच्छा नहीं बोलता था। यहां के लोगों को बाहर शक की निगाह से देखा जाता था। 2017 में डबल इंजन की सरकार बनने के उन्होंने यूपी में पूरी प्रतिबद्धता से कानून का राज लागू किया। परिणाम है कि यूपी के लोगों से दस कदम की दूरी बनाने वाले अब आगे बढ़कर गले लग जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी अब कट्टा और बम बनाने के लिए नहीं बल्कि ब्रह्मोस मिसाइल बनाने के लिए जाना जाता है। यह डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर से देश की रक्षा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देने वाला राज्य बन रहा है। उन्होंने कहा कि जिस यूपी की पहचान पलायन और बेरोजगारी बन गई थी, आज वह सबसे कम बेरोजगारी दर वाला राज्य बन गया है। जिस उत्तर प्रदेश में पहले उपद्रव और दंगे होते थे, कर्फ्यू लगता था वहां अब उत्सव और महोत्सव है, चारों ओर खुशहाली है। शासन ने प्रयास किया और समाज एक स्वर, एक साथ व एक दिशा में आगे बढ़ा तो परिणाम दिख रहा है। 

अधिवक्ता कल्याण निधि को बढ़ाकर किया पांच लाख रुपये

मुख्यमंत्री ने अधिवक्ता हित में अपनी सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि पहले डेढ़ लाख रुपये थी, उसे उन्होंने बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया। इसके लिए पांच सौ करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड बनाया गया है। इससे चार हजार अधिवक्ताओं को अबतक 200 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई है। उन्होंने बताया कि आर्थिक सहायता देने के लिए अधिवक्ताओं की उम्र सीमा को बढ़ाकर 70 वर्ष किया गया। न्याय मित्र सहित न्यायालयों में सरकार की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं की फीस बढ़ाने, नए न्यायालय भवन, अधिवक्ताओं के लिए चैंबर बनाने का कार्य भी सरकार ने किया। सरकार ने अधिवक्ता सामाजिक सुरक्षा निधि से 87 करोड़ 86 लाख रुपये का भुगतान करने के साथ, पुस्तकों और पत्रिकाओं के क्रय के लिए भी 1 करोड़ 60 लाख रुपये की धनराशि जारी की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के पहले 10 ऐसे जिले थे जहां कोर्ट ही नहीं थे। वहां इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए 3000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए और कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स के मॉडल से अभिभूत देश के मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि यह मॉडल पूरे देश में लागू होना चाहिए। उन्होंने बताया कि 600 करोड़ रुपये की लागत से इलाहाबाद हाईकोर्ट में 10000 की क्षमता के और 2000 से अधिक अधिवक्ताओं के चैंबर वाले भवन का निर्माण पूर्ण हो चुका है। 

नए कानूनों के अनुरूप खुद को तैयार किया यूपी ने

मुख्यमंत्री ने कहा कि 7 वर्ष से अधिक सजा के लिए फोरेंसिक साक्ष्य की जरूरत होती है। पहले यूपी में फारेंसिक लैब की स्थिति बदहाल थी। फारेंसिक रिपोर्ट के लिए कई साल इंतजार करना पड़ता था। आज प्रदेश में 12 फारेंसिंक लैब बनाए गए हैं। स्टेट फारेंसिक इंस्टिट्यूट का भी गठन किया गया है। हर जिले में 2 फारेंसिक वैन उपलब्ध कराई गयी है। इसमें प्रशिक्षित मानव संसाधन भी उपलब्ध कराये गये हैं। उन्होंने कहा कि हमने नये कानूनों के अनुसार स्वयं को तैयार किया है।

अधिवक्ताओं को समृद्ध विरासत का स्मरण कराया सीएम ने

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर सिविल कोर्ट की स्थापना का एक लंबा इतिहास है। 1895 में इस कोर्ट की स्थापना हुई थी। यह पीढ़ी दर पीढ़ी न्याय तथा समाज के मूल्यों को आगे बढ़ाता रहा है। देश की आजादी के आंदोलन में इस कचहरी की बड़ी भूमिका थी। बार एसोसिएशन के सदस्यों ने स्वतंत्रता संग्राम में बड़ी भूमिका निभाई। बार एसोसिएशन ने स्वतंत्रता के बाद भी राजनीतिक, सामाजिक तथा अन्य क्षेत्रों में समाज को नई दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बाबू चारुचंद्र दास, जस्टिस इस्माइल, पंडित हरीशचन्द्रपति त्रिपाठी आदि का नाम गोरखपुर बार एसोसिएशन के इतिहास में आदर के साथ लिया जाता है। प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य कर इस बार को सम्मानित किया। एडवोकेट केपी सिंह राजनीति के क्षेत्र में दो बार विधान परिषद के सदस्य चुने गये। उन्होंने कहा कि गोरखपुर बार एसोसिएशन ने न्यायमूर्ति, स्वतंत्रता सेनानी तथा राजनीतिज्ञ देकर वर्तमान पीढ़ी को एक समृद्ध विरासत दी है। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जितने भी बड़े नेता थे वे अधिवक्ता थे। महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, सरदार बल्लभ भाई पटेल, बाबा साहब भीमराव आम्बेडकर आदि सभी महान नेता अधिवक्ता भी थे। उन्होनें कहा कि डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की ईमानदारी, निष्ठा किसी से छिपी नहीं है। राष्ट्रपति रहते हुए भी उन्होंने अपने आध्यात्मिक मूल्यों से राष्ट्र को समृद्ध किया। वे सोमनाथ मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हुए तथा प्रतिष्ठा के कार्य को स्वयं अपने हाथों से किया। उनके योगदान को देखते हुए प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का निर्माण किया है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गोरखपुर के अधिवक्ता एक समृद्ध परम्परा के वाहक है। इसमें हम सबको यह ध्यान रखना होगा कि हमारे ऊपर विभिन्न चुनौतियां आएंगी, इसके लिए हमें अपने आपको तैयार करना होगा।

परिचय समारोह को जनपद न्यायाधीश राजकुमार सिंह और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उमापति उपाध्याय ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन बार एसोसिएशन के मंत्री मंत्री अनुज अस्थाना ने किया। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता हरि प्रकाश मिश्र, बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव, उपाध्यक्षगण शिव कुमार निषाद, अभिषेक सिंह, सुमित मिश्रा, अंशुमान पाठक, कोषाध्यक्ष प्रवीण कुमार शुक्ला, संयुक्त मंत्री प्रशासन रमेश कुमार यादव, संयुक्त मंत्री पुस्तकालय अमरनाथ कुशवाहा, संयुक्त मंत्री प्रकाशन आशुतोष दूबे, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य धनंजय त्रिपाठी, रंजन श्रीवास्तव, आशुतोष कुमार श्रीवास्तव, केसरी चंद, रमेश सिंह, राकेश शुक्ला, कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य रोशनी आर्या, आलोक कुमार गोयल, हर्ष कुमार शुक्ला, अमित कुमार पांडेय, आनंद तिवारी, सज्जन पांडेय सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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लेखक के बारे में

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पत्रकारिता में 33 वर्षों का अनुभव रखने वाले संजय श्रीवास्तव वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ के गोरखपुर ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। क्षेत्रीय और प्रशासनिक मुद्दों पर ज़मीनी रिपोर्टिंग के साथ वह निरंतर समाचार कवरेज करते हैं।

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