स्मार्टफोन सस्ते करने के लिए उठी मांग, जानें आपको फायदा होगा या नुकसान?
नई दिल्ली। आप जानते हैं कि स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का कारण Zero-Cost EMI हो सकता है? दरअसल भारत में ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन नें सैमसंग, एप्पल, शाओमी, विवो, ओप्पो और रियलमी जैसे बड़े ब्रांड्स से बिना ब्याज वाली Zero-Cost EMI स्कीम बंद करने को कहा है। इनका कहना है कि कंपनियां बिना ब्याज वाली स्कीम की जगह सामान्य ब्याज पर फोन बेचें।
इनका कहना है कि कंपनियों को नो-कॉस्ट ईएमआई जैसी स्कीम चलाने में एक छिपा हुआ खर्च शामिल होता है। इस खर्च को स्मार्टफोन बेचने वाली कंपनियां उठाती हैं, जो कि आखिर में स्मार्टफोन की कीमत में ही शामिल होता है। इसकी वजह से भी स्मार्टफोन के दाम आसमान छू रहे हैं।
No Cost EMI से कैसे बढ़ते हैं दाम?
रिपोर्ट्स के अनुसार इस एसोसिएशन का दावा है कि नो कॉस्ट ईएमआई असल में फ्री नहीं होती। बैंक या फाइनेंस कंपनियां यह सुविधा देने के लिए स्मार्टफोन ब्रैंड से 17% से 19% तक की फीस वसूलती हैं।
कंपनियां इस खर्च को फोन के मूल दाम में ही जोड़ देती हैं।
इसकी वजह से फोन की शुरुआती कीमत खुद ही काफी ज्यादा हो जाती है। इसकी वजह से नकद एक बार में फोन खरीदने वालों को भी फोन महंगा पड़ता है।
ब्रैंड्स को क्या दिया गया सुझाव?
रिपोर्ट्स के अनुसार AIMRA के अध्यक्ष कैलाश लख्यानी के मुताबिक मोबाइल इंडस्ट्री को ब्याज के बिना ईएमआई की जगह कार या होम लोन की तरह साधारण ब्याज वाला मॉडल अपनाना चाहिए।
इससे कंपनियों को बैंक और फाइनेंस कंपनियों को फीस नहीं देनी पड़ेगी और फोन की बेसलाइन कीमत कम रखी जा सकेगी। इससे ईएमआई की जगह एक बार में पेमेंट कर फोन खरीदने वालों के डिवाइस काफी सस्ता हो जाएगा। इसके अलावा इससे कंपनियों का मार्जिन भी सुधरेगा।
क्या इससे लोगों को फायदा होगा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर नॉर्मल ब्याज के साथ वाले मॉडल को स्मार्टफोन मार्किट में अपनाया जाता है, तो फाइनेंस कंपनियों द्वारा लोन रिजेक्ट होने की दर में गिरावट आएगी।अंदाजन ये दर 50% से बढ़कर 75% हो सकती है।
इसके अलावा लोगों को बैंक की तरफ से 48 महीने की लंबी ईएमआई अवधि चुनने का मौका दे सकेंगे।
इससे ग्राहक अपने बजट के मुताबिक कम या ज्यादा ईएमआई वाला प्लान चुन सकेंगे।
इसके साथ ही बैंक और फाइनेंस कंपनियों को जाने वाली फीस बचने की वजह से फोन पहले से सस्ता भी मिल सकेगा।
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