खाद है , सिस्टम और कालाबाजारी से किसान लाचार
कृषिमंत्री का दावा कहीं भी उर्वरकों की कमी नहीं, मांग के साथ बढ़ी किल्लत
लखनऊ। वर्तमान में धान की रोपाई एवं सिचाई जोरों पर हो रही है। साथ ही यूरिया खाद की मांग भी बढ़ गयी है। सहकारी समितियों एवं अन्य विक्रय केन्द्रों पर लगभग हर तरह की खाद उपलब्ध भी है। लेकिन सरकारी तंत्र द्वारा अपनाये गये सिस्टम के साथ कालाबाजारी से किसान परेशान है। कुछ स्थानों पर खाद की मांग अधिक होने के कारण किल्लत भी बढ़ रही है। जबकि कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का दावा है कि प्रदेश के किसी भी ब्लाक में खाद की कोई कमी नहीं हैं।
प्रदेश के कुछ जिलों में धान के सीजन में मांग बढ़ने और कालाबाजारी के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। गोदामों में पर्याप्त खाद भी उपलब्ध है। कुछ जिलों में किसानों को लंबी कतारों, तय कीमत से अधिक दाम पर किसान बेची जा रही है। इस समय सबसे अधिक मांग यूरिया की है। इसकी सरकारी कीमत 242 से 276 रुपये तक प्रति बोरी है, जिसका वजन 45 से 50 किलो ग्राम है। ग्रामीण क्षेत्रों मे ंयह यूरिया 300 से 400 रुपए के बीच बेची जा रही है। इसी तरह डीएमपी खाद की कीमत 1300 रुपए है जो कि 1400 से 1600 रुपए प्रति बोरी में बिक रही है। सहकारी समितियों पर खाद के लिए किसान सुबहसे ही लाइन लगाते हैं। कहीं सर्वर की समस्या तो कहीं फार्मर रजिस्ट्री की परेशानी आ रही है। इसके अलावा सरकार ने गत दिनों कृषि भूमि की दर से खाद का कोटा तय किया है। इससे भी मांग के अनुरुप किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। जबकि सभी सहकारी समितियों और केंद्रों पर नियमित रूप से खाद का वितरण करने के निर्देश दिये गये है। वहीं नैनो यूरिया भी समितियों के पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है जिसे किसान छिड़काव के झंझट के कारण नहीं ले रहा है।
वहीं कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का कहना है कि एक अप्रैल से 28 जुलाई तक 57.70 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया, जिसमें से 28.88 लाख मीट्रिक टन किसानों को वितरित की गयी। लगभग इतनी ही मात्रा में अभी भी उर्वरक उपलब्ध है। यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी, एमओपी का पर्याप्त भंडार है। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले जहां करीब 1,500 सहकारी समितियां उर्वरक वितरण करती थीं, वहीं अब 7000 समितियों के माध्यम से किसानों तक खाद पहुंचाई जा रही है। जुलाई में ही सहकारी समितियों ने 3.22 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया और 1.07 लाख मीट्रिक टन डीएपी का वितरण किया है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के किसी भी ब्लॉक में उर्वरकों की कमी नहीं है। इस तरह खाद को लेकर सरकारी दावों एवं जमीनी हकीकत में काफी फर्क है, जिसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
