स्कूलों में 40 प्रतिशत नहीं आ रहे बच्चे, शिक्षक परेशान
परिषदीय विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने, ड्रापआउट घटने का दावा
लखनऊ। गरीब बच्चों के लिए प्रदेश में करीब डेढ़ लाख प्राथमिक विघालय थे जिनकी संख्या घटकर एक लाख 32 हजार रह गयी है। इन स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ने एवं ड्रापआउट कम होने का सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है। जबकि हकीकत है कि इस समय कृषि कार्य तेज होने के कारण बच्चों की उपस्थिति 40 प्रतिशत भी पहुंच पा रही है। इसे लेकर शिक्षक परेशान है वह अभिवावकों से खुशामद करते है कि बच्चों को स्कूल भेजिए।
प्राथमिक विघालयों में शिक्षा की गुणवत्ता एवं आधुनिकीकरण के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। लेकिन इसका वास्तविक लाभ बच्चों को शायद नहीं मिल पा रहा है। स्कूलों की दशा को लेकर कागजी घोड़ा दौड़ाया जा रहा है। बहराइच के कैसरगंज ब्ला के डीहा स्कूल में 120 बच्चे पंजीकृत है लेकिन मौजूदगी सिर्फ 35 दिखी। पास के हाता प्राथमिक स्कूल में भी 30 प्रतिशत बच्चे नहीं आये थे। बच्चों की संख्या का कोटा पूरा करने के लिए मिड डे मिल का खाना तो पूरा मंगाया जा रहा है। जिसे खेतों में ले जाकरण धान लगा रहे बच्चों एवं अन्य लोगों तथा जानवरों को खिलाया जा रहा है। इसी तरह ड्राप आउट को लेकर भी आंकड़ेबाजी की जा रही है। जबकि नये दाखिले की तुलना में स्कूलों छोड़ने वालों की संख्या अधिक है।
इसे लेकर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह का कहना है कि प्रदेश में 1 लाख 32 हजार से अधिक परिषदीय विद्यालय संचालित हैं और इनमें से किसी भी सरकारी विद्यालय को बंद नहीं किया गया है। कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का निकटवर्ती विद्यालयों के साथ पेयरिंग किया गया है। उन्होंने कहा कि योगी राज में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव हुए हैं। शिक्षा बजट 28 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1.13 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इन विद्यालयों में नामांकन 1.34 करोड़ से बढ़कर 1.90 करोड़ तक पहुंचा है और ड्रॉपआउट दर 19 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत रह गई है। आॅपरेशन कायाकल्प के तहत 19 आधारभूत मानकों पर प्रगति 36 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंची है। मानकों पर प्रगति लगभग 36 प्रतिशत थी, जिसे अब बढ़ाकर 97 प्रतिशत तक पहुंचाया जा चुका है। समायोजन से रिक्त हुए भवनों का उपयोग अब बाल वाटिकाओं और प्री प्राइमरी कक्षाओं के संचालन में किया जा रहा है।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
