नेपाल के प्रसिद्ध मुक्तिनाथ क्षेत्र जाने वाला रास्ता भूस्खलन के कारण अवरुद्ध
काठमांडू । नेपाल के प्रसिद्ध मुक्तिनाथ क्षेत्र जाने वाली सड़क पर मंगलवार सुबह भूस्खलन होने से रास्ता अवरुद्ध हो गया है। इस कारण मुक्तिनाथ जा रहे श्रद्धालु बीच रास्ते में फंस गए हैं। मुक्तिनाथ के रास्ते में म्याग्दी जिले के अन्नपूर्णा स्थित महभीर में भूस्खलन होने के बाद आज सुबह से मुस्तांग को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने वाला बेनी–जोमसोम–कोरला सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गया है। यह रास्ता ही प्रसिद्ध मुक्तिनाथ क्षेत्र तक जाता है।
पत्थर और कीचड़ सहित आए भूस्खलन के कारण 76 किलोमीटर लंबे बेनी–जोमसोम सड़क खंड पर सीधा यातायात प्रभावित हो गया। सड़क अवरुद्ध होने से बेनी से मुस्तांग और जोमसोम से बेनी की ओर जा रहे वाहन बीच रास्ते में फंस गए हैं। इनमें अधिकांश वे पर्यटक और श्रद्धालु हैं जो मुक्तिनाथ में दर्शन करने जा रहे थे।
मुस्तांग जिला प्रहरी कार्यालय के प्रवक्ता सागर तिमिल्सिना ने बताया कि सड़क को दोबारा संचालन में लाने के लिए सड़क विभाग के उपकरणों को परिचालन में लाकर प्रयास जारी है।
काठमांडू। नेपाल के प्रसिद्ध मुक्तिनाथ क्षेत्र जाने वाली सड़क पर मंगलवार सुबह भूस्खलन होने से रास्ता अवरुद्ध हो गया है। इस कारण मुक्तिनाथ जा रहे श्रद्धालु बीच रास्ते में फंस गए हैं। मुक्तिनाथ के रास्ते में म्याग्दी जिले के अन्नपूर्णा स्थित महभीर में भूस्खलन होने के बाद आज सुबह से मुस्तांग को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने वाला बेनी–जोमसोम–कोरला सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गया है। यह रास्ता ही प्रसिद्ध मुक्तिनाथ क्षेत्र तक जाता है।
पत्थर और कीचड़ सहित आए भूस्खलन के कारण 76 किलोमीटर लंबे बेनी–जोमसोम सड़क खंड पर सीधा यातायात प्रभावित हो गया। सड़क अवरुद्ध होने से बेनी से मुस्तांग और जोमसोम से बेनी की ओर जा रहे वाहन बीच रास्ते में फंस गए हैं। इनमें अधिकांश वे पर्यटक और श्रद्धालु हैं जो मुक्तिनाथ में दर्शन करने जा रहे थे।
मुस्तांग जिला प्रहरी कार्यालय के प्रवक्ता सागर तिमिल्सिना ने बताया कि सड़क को दोबारा संचालन में लाने के लिए सड़क विभाग के उपकरणों को परिचालन में लाकर प्रयास जारी है।
लेखक के बारे में
‘तरुणमित्र’ श्रम ही आधार, सिर्फ खबरों से सरोकार। के तर्ज पर प्रकाशित होने वाला ऐसा समचाार पत्र है जो वर्ष 1978 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जैसे सुविधाविहीन शहर से स्व0 समूह सम्पादक कैलाशनाथ के श्रम के बदौलत प्रकाशित होकर आज पांच प्रदेश (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तराखण्ड) तक अपनी पहुंच बना चुका है।
