सुबह 89.44 था, शाम तक 68 पैसे की भारी गिरावट। बाजार में खामोशी थी, सिर्फ डॉलर खरीदने की होड़ सुनाई दे रही थी।
अमेरिका ने दरें नहीं घटाईं, तेल 85 डॉलर पार, विदेशी निवेशक लगातार बेच रहे विदेशी फंडों ने पिछले 18 दिनों में 38,000 करोड़ निकाले। रुपया अकेला रह गया – कोई सहारा नहीं।
पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, विदेशी फोन-दवाइयां और महंगी, विदेश पढ़ाई का खर्च 15-20% बढ़ेगा
रिजर्व बैंक ने बाजार में 2 अरब डॉलर डाले, फिर भी गिरावट नहीं रुकी NRI बॉन्ड और विदेशी कर्ज की सीमा बढ़ाई गई, लेकिन बाजार का मन “Sell India” मोड में है। विशेषज्ञ बोले – 91-92 आसानी से आ सकता है।
निर्यात करने वाली कंपनियां खुश – ज्यादा रुपया कमाएंगी लेकिन आम मध्यम वर्ग की सैलरी की क्रय शक्ति सिकुड़ रही है। एक तरफ मुनाफा, दूसरी तरफ महंगाई का बोझ।
2026 में 92-95 तक जाना तय-सा लग रहा है अगर यही रफ्तार रही सवाल सिर्फ रुपये का नहीं – यह हमारी अर्थव्यवस्था की दिशा का सवाल है। अब जरूरत है सुधारों की, निवेश की और भरोसे की – वरना 100 का आंकड़ा भी दूर नहीं।
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