मकर संक्रांति भारत का एक प्राचीन और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व हर वर्ष 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी कारण इस पर्व को “मकर संक्रांति” कहा जाता है। यह त्योहार ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है और सर्दी के अंत व बसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है।
मकर संक्रांति का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे शुभ माना जाता है। इस अवसर पर गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
मकर संक्रांति को पतंगों का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन बच्चे, युवा और बड़े सभी मिलकर पतंग उड़ाते हैं। आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। पतंग उड़ाना खुशी, उत्साह और स्वतंत्रता का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार लोगों को एक-दूसरे के करीब लाता है।
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बनी मिठाइयाँ जैसे तिल के लड्डू, चिक्की आदि खाई जाती हैं। तिल और गुड़ शरीर को गर्मी देते हैं और सर्दियों में स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। साथ ही यह मिठास आपसी प्रेम, भाईचारे और मधुर संबंधों का प्रतीक मानी जाती है।
मकर संक्रांति हमें नई शुरुआत, सकारात्मक सोच और आपसी प्रेम का संदेश देती है। यह पर्व सिखाता है कि हमें बुराइयों को छोड़कर अच्छाई की ओर बढ़ना चाहिए। यह त्योहार खुशहाली, शांति और समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाता है।
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