कृष्ण अपने सखाओं के साथ मिलकर मटकी से माखन निकालते और सबको बांटकर खाते थे। इसी वजह से उन्हें प्यार से ‘माखन चोर’ कहा गया।
कंस ने बाल कृष्ण को मारने के लिए राक्षसी पूतना को गोकुल भेजा। वह सुंदर स्त्री का रूप धारण कर कृष्ण को विष पिलाने पहुंची। कृष्ण ने उसके प्राण हर लिए।
इंद्र की पूजा को रोककर कृष्ण ने गोकुलवासियों से गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा। इससे क्रोधित होकर मूसलाधार बारिश कर दी। तब बाल कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा कर गांववासियों को बचाया।
यमुना नदी में कालिया नामक विषैला नाग ने विष से नदी का पानी दूषित कर दिया था। बाल कृष्ण ने यमुना में छलांग लगाकर कालिया नाग के फनों पर नृत्य कर उसका घमंड तोड़ा।
एक दिन बाल कृष्ण के मिट्टी खाने की शिकायत यशोदा मैया से की गई। जब उन्होंने कृष्ण का मुंह खुलवाया तो उसमें उन्हें पूरा ब्रह्मांड दिखाई दिया।
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