कृषि विश्वविद्यालय की तकनीक से जुड़कर आत्मनिर्भर हो सकती है महिलाएं

नीता श्रीवास्तव कहती है कि महिलाओं को केवल आय के स्रोत का अधिकार मिलना आधी आजादी है। यह तब तक पूरी नहीं हो सकती, जब तक कि वह इस आय का प्रबंधन खुद नहीं करती। कामकाजी महिला की जिंदगी का एक विचारणीय पहलू यह भी है कि जहां पति अपनी कमाई पर पूरा आधिपत्य रखते हुए भी पति की कमाई को अपना ही समझती है। घर के बाहर औरत की चाहे जो हैसियत हो, घर के भीतर की दुनिया उसके वजूद को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। महिलाओं की स्थिति पहले की अपेक्षा आज काफी बदली है, लेकिन आज भी संपत्ति पर महिलाओं का मालिकाना हक बेहद कम है और वे जो खुद कमाती है उसे भी खर्च करने का अधिकार उनके पास नहीं है। यह भी सच है कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर अधिकतर नारियों के आय का भी प्रबंधन पुरुष ही करते हैं। मुझे यह बताते हुए खुशी है कि डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने कई नवोन्मेषी उपाय किए हैं। इसमें केले के रेसे, अरहर के डंठल से सजावट की वस्तुओं को बनाने की तकनीक विकसित की है। इससे कम लागत में ही कमाई शुरू की जा सकती है। मशरूम तथा उसके उत्पाद की तकनीक को अपनाकर बिहार की हजारों महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। इसलिए प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत की तर्ज पर हम महिला दिवस पर आत्मनिर्भर महिला का संकल्प लें। आत्मनिर्भर महिला ही सम्मान से महिला दिवस मना सकती है।