पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है, जहां भाजपा ने बहुमत हासिल कर सत्ता में बदलाव का रास्ता साफ कर दिया है। इससे राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
चुनाव नतीजों के बाद मौजूदा मुख्यमंत्री राज्यपाल को इस्तीफा देते हैं। नई सरकार बनने तक वे सीमित जिम्मेदारियों के साथ काम जारी रखते हैं।
विधायक दल की बैठक में नेता चुना जाता है, जो मुख्यमंत्री बनता है। इस पद के लिए कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में रहते हैं और अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करता है।
चुना गया नेता राज्यपाल से मिलकर विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपता है और सरकार बनाने का दावा पेश करता है। इसके बाद राज्यपाल औपचारिक अनुमति देते हैं।
शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री और मंत्री पद संभालते हैं। इसके बाद विभागों का बंटवारा होता है और नई सरकार आधिकारिक रूप से काम शुरू करती है।
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