अगर ये न होते, तो क्या असम भारत का हिस्सा होता? 🤔

6 जून 1890 को जन्मे गोपीनाथ बोरदोलोई को आज असम का "लोकप्रिय" नेता कहा जाता है। लेकिन उनकी सबसे बड़ी लड़ाई अभी बाकी थी...

06 JUNE 2026

गांधी के रास्ते पर चले, गए जेल

1922 में उन्होंने वकालत छोड़ राजनीति का रास्ता चुना। असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया और अंग्रेजों ने उन्हें जेल भेज दिया। लेकिन संघर्ष उनकी पहचान बन चुका था।

06 JUNE 2026

मुख्यमंत्री बनते ही लिया बड़ा फैसला

1938 में असम के प्रधानमंत्री (मुख्यमंत्री) बने। उन्होंने किसानों को राहत दी, भूमि कर खत्म किया और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए कई साहसी कदम उठाए।

06 JUNE 2026

1947: जब असम पर मंडरा रहा था सबसे बड़ा खतरा

विभाजन के समय मुस्लिम लीग असम को पूर्वी पाकिस्तान में शामिल करना चाहती थी। बोरदोलोई ने इसका डटकर विरोध किया। कहा जाता है कि उनकी दृढ़ता ने असम का भविष्य बदल दिया।

06 JUNE 2026

इसलिए उन्हें कहते हैं

आजादी के बाद उन्होंने लाखों शरणार्थियों के पुनर्वास का काम संभाला। 1950 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत अमर रही।

06 JUNE 2026

🏅 1999 में मरणोपरांत Bharat Ratna

"उन्होंने सिर्फ राजनीति नहीं की, असम का इतिहास बदल दिया"

06 JUNE 2026