SIR का बोझ: BLO पर बढ़ता दबाव
तेज़ समयसीमा और भारी काम के बीच लगातार बढ़ती मौतें।
तेज़ समयसीमा और भारी काम के बीच लगातार बढ़ती मौतें।
SIR में काम का बोझ इतना बढ़ गया कि 46 वर्षीय सर्वेश सिंह (मुरादाबाद) यह समझ ही नहीं पा रहे थे कि कितने फॉर्म पूरे करें। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में लिखा—“नींद नहीं मिल रही, काम पूरा नहीं हो पा रहा।”
अधिकारियों का दबाव और निलंबन का डर आज भी BLOs की चिंता बढ़ा रहा है। सुधीर कुरिल (27) को मीटिंग में धमकाया गया था—वे डर और तनाव में टूट गए और अपनी शादी से एक दिन पहले आत्महत्या कर ली।
50 वर्षीय विजय कुमार वर्मा (लखनऊ)—SIR के दौरान BLO और शिक्षामित्र, दोनों काम संभाल रहे थे। लगातार दबाव और थकान से उनकी तबीयत बिगड़ गई और अस्पताल में ब्रेन हैमरेज से उनका निधन हो गया। शिक्षक संघ का कहना है कि SIR का दबाव ही मुख्य कारण था।
कई BLO थकान से गिर रहे हैं—दिल, दिमाग और शरीर SIR की रफ्तार नहीं झेल पा रहा। विजय वर्मा (40) ब्रेन हैमरेज से जाते हैं; रंजू दुबे (44) और शोभा रानी (56) ड्यूटी पर ही हार्ट अटैक से गिर पड़ते हैं।
इन सभी घटनाओं से साफ है कि SIR की तेज़ गति, अवास्तविक लक्ष्य और भारी दबाव ने कई BLOs की सेहत और मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाला है। प्रशासनिक सुधार किए बिना ऐसी मौतों को रोक पाना मुश्किल होगा।
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