वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और 30 मार्च 2026 को यह 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। मिडिल ईस्ट में तनाव और सप्लाई बाधित होने की वजह से कीमतों में यह तेजी देखने को मिली है।
भारत अपनी लगभग 90% तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश पर पड़ता है। मार्च में भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 117 डॉलर प्रति बैरल रही, जो चिंता का विषय है।
सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने के बजाय एक्साइज ड्यूटी कम कर दी है। इससे आम लोगों को राहत मिली है और महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिल रही है, हालांकि सरकार को इसके बदले राजस्व में नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकारी तेल कंपनियां अभी भी नुकसान में चल रही हैं क्योंकि वे बाजार कीमत से कम दाम पर ईंधन बेच रही हैं। पेट्रोल पर करीब 24 रुपये और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है, जिससे कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।
एक्साइज ड्यूटी घटाने से सरकार को लाखों करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है, जिससे फिस्कल डेफिसिट बढ़ने का खतरा है। अभी तो आम जनता को राहत है, लेकिन लंबे समय में सरकार को खर्च कम करने या अन्य स्रोतों से पैसा जुटाने की जरूरत पड़ सकती है।
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