जी राम जी बिल

अर्थशास्त्री जीन ड्रेज़ का कहना है कि 'वीबी- जी राम जी' बिल MGNREGA की मूल रोज़गार गारंटी को कमजोर करता है। उनके अनुसार, यह बदलाव अधिकार आधारित सोच को पीछे ले जाता है।

MGNREGA की विरासत

ड्रेज़ के मुताबिक, MGNREGA ने भारत को रोज़गार को कानूनी अधिकार के रूप में अपनाने वाली दुनिया की अग्रणी मिसालों में खड़ा किया।

शुरुआती असर

जीन ड्रेज़ कहते हैं कि शुरुआती वर्षों में इस योजना से ग्रामीण मज़दूरी बढ़ी, महिलाओं और वंचित वर्गों को आर्थिक सुरक्षा मिली।

बाद की समस्याएँ

उनके अनुसार, समय के साथ केंद्रीकरण, अपर्याप्त फंडिंग और भुगतान में देरी ने योजना की प्रभावशीलता को कमजोर किया

नया ढांचा

ड्रेज़ का तर्क है कि नया कानून MGNREGA को एक केंद्र-निर्देशित योजना में बदल देता है, जिसमें राज्यों पर ज़िम्मेदारी ज़्यादा और अधिकार कम हैं।

स्विच-ऑफ’ शक्ति

जीन ड्रेज़ के मुताबिक, बिल केंद्र को यह अधिकार देता है कि वह तय करे योजना कब और कहां लागू होगी। उनका कहना है कि इससे रोज़गार गारंटी अनिश्चित हो जाती है।

फंडिंग चिंता

ड्रेज़ बताते हैं कि 60:40 फंडिंग मॉडल खासकर गरीब राज्यों के लिए बड़ा बोझ बन सकता है। इससे परियोजनाओं और रोज़गार दोनों पर असर पड़ने की आशंका है।

ड्रेज़ का निष्कर्ष

जीन ड्रेज़ का निष्कर्ष है कि यह बिल MGNREGA को सुधारने के बजाय राज्यों को हतोत्साहित और मज़दूरों को कमजोर करता है।

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