1902 में आधुनिक एयर कंडीशनर का आविष्कार तब हुआ, जब ब्रुकलिन की एक प्रिंटिंग कंपनी में हवा की नमी के कारण कागज बार-बार फैल और सिकुड़ रहा था, जिससे रंगों का अलाइनमेंट बिगड़ रहा था।
इस समस्या का समाधान विलिस हेवीलैंड कैरियर ने खोजा, जिन्होंने हवा में मौजूद नमी को नियंत्रित करने का तरीका विकसित किया।
उन्होंने पाया कि ठंडी कॉइल्स के ऊपर से गुजरने वाली हवा अपनी नमी खो देती है और साथ ही ठंडी भी हो जाती है, यही सिद्धांत आज के एयर कंडीशनर का आधार बना।
इस आविष्कार ने उद्योगों में क्रांति ला दी, हालांकि शुरुआत में इसका उपयोग केवल फैक्ट्रियों में क्वालिटी बनाए रखने के लिए किया जाता था और आम लोगों तक पहुंचने में समय लगा।
1920 के दशक में न्यूयॉर्क के सिनेमाघरों में एयर कंडीशनिंग लगाई गई, जहां लोग गर्मियों में ठंडी हवा का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचने लगे।
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