लाल किले का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने 1638 में शुरू कराया था। यह करीब 200 वर्षों तक मुगल सम्राटों का प्रमुख निवास रहा। 1947 में भारत की आजादी के बाद यहीं से प्रधानमंत्री द्वारा तिरंगा फहराने की परंपरा शुरू हुई। लाल बलुआ पत्थर से बने इस किले को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है। इसकी विशाल दीवारें लगभग 2.5 किलोमीटर लंबी हैं।
आमेर किले का निर्माण राजा मान सिंह प्रथम ने 16वीं शताब्दी में शुरू कराया था। यह कछवाहा राजपूत शासकों की राजधानी रहा। किले में शीश महल अपनी शानदार कांच की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। यहां राजपूत और मुगल स्थापत्य कला का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है।
आगरा किले का वर्तमान स्वरूप अकबर ने 1565 में बनवाया था। यह मुगल शासकों का प्रमुख सैन्य और प्रशासनिक केंद्र था। शाहजहां ने अपने अंतिम दिन इसी किले में बिताए और यहीं से ताजमहल को देखा। किले में कई महल, मस्जिदें और ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं।
मेहरानगढ़ किले का निर्माण राव जोधा ने 1459 में कराया था। यह मारवाड़ राजवंश की शक्ति और गौरव का प्रतीक है। यह भारत के सबसे विशाल और मजबूत पहाड़ी किलों में से एक है। किले की दीवारें लगभग 120 फीट तक ऊंची हैं।
गोलकोंडा किले का विकास कुतुब शाही शासकों ने 16वीं शताब्दी में किया था। यह कभी विश्व के प्रसिद्ध हीरा व्यापार केंद्रों में शामिल था। किले की ध्वनि प्रणाली बेहद प्रसिद्ध है—प्रवेश द्वार पर ताली बजाने की आवाज ऊपर तक सुनाई देती है। प्रसिद्ध कोहिनूर हीरे का संबंध भी गोलकोंडा क्षेत्र से जोड़ा जाता है।
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