आधे साल में ही आधा लक्ष्य

अप्रैल–अक्टूबर में केंद्र का राजकोषीय घाटा ₹8.25 ट्रिलियन तक पहुँच गया। सात महीने में ही यह पूरे साल के लक्ष्य का 52.6% पार कर चुका है।

सरकार का वार्षिक मापदंड

केंद्र ने FY26 के लिए घाटा GDP के 4.4% पर सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। यह राशि कुल ₹15.69 ट्रिलियन के बजटेड अंतर के बराबर है।

आय और खर्च की नब्ज़

कैपिटल एक्सपेंडिचर तेज़ रहा, जिससे शुरुआती महीनों में खर्च बढ़ा। लेकिन टैक्स राजस्व की रफ्तार कमजोर पड़ी, खासकर रिबेट और GST दबाव के कारण।

RBI ने दी राहत की साँस

राजस्व प्राप्तियाँ धीमी रहीं, लेकिन RBI का रिकॉर्ड डिविडेंड बड़ी सहूलियत बना। इससे सरकार को बजट में शुरुआती झटकों को संभालने में मदद मिली।

सब्सिडी दबाव में बजट

उर्वरक सब्सिडी बढ़ी और कुल सब्सिडी खर्च लक्ष्य के 64% तक पहुँच गया। खर्च का बोझ बढ़ने से राजकोषीय अंतर और चौड़ा महसूस होने लगा।

क्या लक्ष्य हासिल हो पाएगा?

विशेषज्ञों का कहना है—अगले महीनों में टैक्स संग्रह में तेज़ी बेहद जरूरी होगी। फिर भी, RBI डिविडेंड और वर्ष-अंत बचत के चलते बड़े विचलन की आशंका कम मानी जा रही है।

आगे की राह

सरकार अभी भी 4.4% घाटा लक्ष्य को लेकर आश्वस्त दिख रही है। आने वाले महीनों में राजस्व की गति और खर्च नियंत्रण ही तस्वीर साफ करेंगे।