बाबा सिद्धिक की हत्या

बाबा सिद्धिक, जो पूर्व महाराष्ट्र मंत्री थे और सामाजिक कार्यों में सक्रिय थे, को मुंबई के बांद्रा में गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना रात 9:30 बजे के आसपास हुई और इसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग की संलिप्तता की पुष्टि हुई है। उनकी हत्या ने न केवल राजनीतिक जगत, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को भी चौंका दिया है।

तीन हमलावरों की भूमिका

तीन हमलावरों की भूमिका पुलिस ने खुलासा किया है कि हत्या में तीन शूटर शामिल थे। दो को, गुरमेल बलजित सिंह और धरमराज कश्यप, गिरफ्तार कर लिया गया है। तीसरे शूटर, शिव कुमार गौतम, की तलाश अभी भी जारी है। इस मामले में उनकी पहचान से जुड़े कई सुराग भी सामने आए हैं।

गिरफ्तार शूटर

गुरमेल बलजित सिंह (23) हरियाणा का निवासी है, जबकि धरमराज कश्यप (19) उत्तर प्रदेश से है। इन दोनों ने पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। जबकि शिव कुमार गौतम, जो अभी भी फरार है, की पहचान उत्तर प्रदेश के बहारच से की गई है। दोनों शूटर पहले से आपराधिक पृष्ठभूमि के बिना थे।

हत्या की योजना

पुलिस के अनुसार, शूटरों ने कई महीनों तक बाबा सिद्धिक की गतिविधियों की निगरानी की थी। उन्हें इस हत्या के लिए ₹50,000 की अग्रिम राशि दी गई थी। इस हत्या की योजना की तैयारी में उनके द्वारा लंबे समय तक विभिन्न स्थानों की रेकी की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक सुनियोजित अपराध था।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

बाबा सिद्धिक की हत्या ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने इस घटना की निंदा की है और सरकार की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस हत्या को महाराष्ट्र में बढ़ती राजनीतिक हिंसा का संकेत बताया है।

बढ़ती हिंसा का मुद्दा

इस हत्या ने महाराष्ट्र में बढ़ती राजनीतिक हिंसा को उजागर किया है। लोगों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को दर्शाती हैं। राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे गंभीरता से लेते हुए कानून और व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग की है।

न्याय की मांग

समाज के विभिन्न वर्गों और राजनीतिक नेताओं ने इस हत्या की पारदर्शी जांच की मांग की है। सभी ने एक स्वर में कहा है कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए, ताकि इस तरह की हिंसा पर अंकुश लगाया जा सके।