अरावली पर्वत श्रृंखला खतरे में

अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो अरबों साल पुरानी है और राजस्थान से गुजरात तक फैली हुई है। यह हरी दीवार थार मरुस्थल को पूर्व की ओर बढ़ने से रोकती है, भूजल रिचार्ज करती है और दिल्ली-NCR की हवा को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नई परिभाषा से उठा विवाद

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की नई परिभाषा स्वीकार की – केवल 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियां ही अरावली मानी जाएंगी। पर्यावरणविदों के अनुसार, इससे 90% क्षेत्र संरक्षण से बाहर हो जाएगा, जो वैज्ञानिक रूप से गलत और खतरनाक है।

अवैध खनन का कहर

अरावली पहले से ही अवैध खनन की वजह से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही है, पहाड़ियां खोखली हो चुकी हैं। इससे जंगल गायब हो रहे हैं, भूजल स्तर गिर रहा है और पूरी पारिस्थितिकी संकट में है।

जैव विविधता, पर्यावरण पर खतरा

अरावली में दुर्लभ वनस्पतियां, तेंदुए जैसे वन्यजीव और अनगिनत पक्षी पाए जाते हैं। नई परिभाषा लागू होने से जैव विविधता नष्ट हो सकती है और थार का रेगिस्तान तेजी से फैलकर दिल्ली-NCR को प्रभावित करेगा।

जन आक्रोश और विरोध प्रदर्शन

देशभर में #SaveAravalli अभियान जोरों पर है, लोग सोशल मीडिया और सड़कों पर उतर आए हैं। राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, मांग रहे हैं अरावली का पूर्ण संरक्षण।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

जन आक्रोश देखते हुए 27 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। CJI सूर्यकांत की तीन जजों की बेंच 29 दिसंबर को सुनवाई करेगी – उम्मीद है अरावली को बचाने का मजबूत फैसला आएगा। अरावली बचाओ, भविष्य बचाओ! #SaveAravalli

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