पुतिन भारत आए… लेकिन राहुल गांधी से मिलने की इजाज़त नहीं दी गई! क्या विदेशी मेहमानों को चुपके से मना कर दिया जाता है?
पहले ऐसा होता था हर विदेशी नेता विपक्ष से भी ज़रूर मिलता था अटल जी के समय भी… मनमोहन जी के समय भी
2014 के बाद नियम बदल गया अब विपक्ष से मिलना = सख़्त मना “अनऑफिशियल एडवाइजरी भेजी जाती है”
आज राहुल गांधी ने संसद के बाहर खुलासा किया “विदेशी नेताओं को कहा जाता है – राहुल गांधी से मत मिलो” मोदी जी को डर है!
सरकार का जवाब “मिलना चाहो तो अपॉइंटमेंट ले लो, हम नहीं रोकते” तो फिर राहुल ने अपॉइंटमेंट क्यों नहीं लिया? या सरकार ने चुपके से रोका?
जो सरकार इतनी मज़बूत हो कि विपक्ष की बात भी सुन सके, वो सरकार सचमुच मज़बूत होती है। डरती हुई सरकारें ही दूसरी आवाज़ दबाती हैं।