यह वहां टिककर रह नहीं सकेंगे, लौटकर यहीं आ जाएंगे…

नई दिल्ली: फिल्म की पटकथा और संवाद लिखे थे सलीम-जावेद ने, जो खुद किसी सुपरस्टार से कम नहीं थे। इस जोड़ी की लिखी फिल्मों ने कई कलाकारों को स्टार बनाया तो फिल्म लेखकों के रुतबे को बुलंदियों पर पहुंचाया।

एक जमाना था, जब सलीम-जावेद के नाम से फिल्में बिका करती थीं। जिन सितारों के पीछे दुनिया भागा करती थी, वो सलीम-जावेद के पीछे दौड़ा करते थे। फिल्मों के पोस्टरों पर हीरो के साथ बड़े अल्फाज में उनका नाम लिखा जाता था। आज यहां हम बात करेंगे, इस जोड़ी के दिग्गज लेखक सलीम खान की, जिनका शुरुआती करियर संघर्षों से भरा रहा था। 24 नवंबर को उम्र का 87वां पड़ाव पार कर चुके सलीम खान के जन्मदिन पर उनके करियर के कुछ किस्से।

इंदौर में जन्मे और पले-बढ़े सलीम को फिल्मों में मौका इत्तेफाक से मिला था, मगर कामयाबी उन्हें अपनी जिद से मिली। सलीम खान अपनी जवानी के दिनों में काफी हैंडसम थे और उस खांचे में बिल्कुल फिट बैठते थे, जो उन दिनों किसी फिल्मी हीरो के लिए बनाया हुआ था।

शादी में मिला हीरो बनने का ऑफर
इंदौर की एक शादी में फिल्ममेकर के अमरनाथ भी पहुंचे। उनकी फिल्म गांव को गोरी बहुत बड़ी हिट हो चुकी थी। शादी में सलीम साहब भी शामिल हुए। अमरनाथ की नजर जब उन पर पड़ी तो उन्होंने हीरो बनने का ऑफर दे दिया। अचानक मिले इस ऑफर से सलीम कुछ हिचकिचाए, मगर निर्माता ने उन्हें समझाया कि दिलीप कुमार ने भी कभी स्टेज पर काम नहीं किया, मगर इतने बड़े एक्टर हैं। उन्होंने कुछ पैसे भी दिए। सलीम बॉम्बे (मुंबई) जाने के लिए तैयार हो गये, मगर असली ट्विस्ट अभी आना बाकी था, जिसने उनके संघर्ष को एक जिद में बदल दिया।

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एक इंटरव्यू में सलीम खान ने बताया था, जब वो मुंबई के लिए रवाना हो रहे थे तो उनके बड़े भाई ने ताना मारा, ‘यह वहां टिककर रह नहीं सकेंगे। लौटकर यहीं आ जाएंगे। नहीं तो हर पंद्रह दिनों में खत लिखकर पैसे मंगवाएंगे।’ इस पर सलीम साहब ने अपने बड़े भाई से कहा कि ना तो बिना कुछ बने वापस आऊंगा और ना ही पैसे मगाऊंगा।

मुंबई में सलीम खान मरीना गेस्ट हाउस में रुके, जहां 10 बाइ 10 के एक कमरे में उन्होंने एक बेड किराये पर लिया, क्योंकि पूरे कमरे का रेंट बहुत ज्यादा था। रोजमर्रा के संघर्ष को देखते हुए कई बार सलीम खान के मन में आया कि लौट जाएं, मगर फिर बड़े भाई का ताना और अपना जवाब उन्हें याद आ जाता। इस वाकये ने सलीम खान को मुंबई में रोके रखा। खैर, अमरनाथ की फिल्म में उन्होंने सपोर्टिंग रोल निभाया, मगर फिल्म फ्लॉप रही थी और सलीम खान का डेब्यू पूरी तरह नजरअंदाज हो गया।

25 फिल्मों में किया था अभिनय
लेखक के तौर पर कामयाबी देखने से पहले सलीम ने लगभग 25 फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार निभाये थे। कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें क्रेडिट रोल्स में मेंशन नहीं किया गया था। अपने जोड़ीदार जावेद अख्तर से उनकी मुलाकात सरहदी लुटेरे फिल्म के दौरान हुई थी। सलीम की बतौर एक्टर ये आखिरी फिल्म है। जावेद इस फिल्म से क्लैपर ब्वॉय के तौर पर जुड़े थे और बाद में उन्होंने संवाद भी लिखे। दोनों की जोड़ी को ब्रेक देने का क्रेडिट राजेश खन्ना को जाता है, जिनकी फिल्म हाथी मेरे साथी की स्क्रिप्ट पर सलीम-जावेद ने काम किया था। फिल्म की सफलता के बाद उनका करियर चल पड़ा और फिर अंदाज ने उन्हें राइटर स्टार बना दिया था।

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सलमान की फीस भरने के लिए नहीं थे पैसे
खाते-पीते परिवार का होने के बावजूद संघर्ष के दौर में एक वक्त ऐसा भी आया, जब सलीम खान के पास सलमान की फीस भरने के लिए भी पैसे नहीं थे। अपने बड़े भाई की बात ने सलीम के संघर्ष को जिद में बदल दिया था। कपिल शर्मा शो में इस किस्से का जिक्र सलमान खान ने किया था। सलमान उस वक्त चौथी क्लास में पढ़ते थे। एक दिन सलीम काम से लौट रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि सलमान अपनी क्लास के बाहर खड़े हैं। उन्होंने इसकी वजह पूछा तो सलमान ने बताया, प्रिंसिपल ने फ्लैग पोस्ट के नीचे खड़ा होने के लिए कहा है।

बेटे की बात सुनकर सलीम प्रिंसिपल के पास पहुंचे और पूछा कि आखिर बात क्या है? उन्होंने बताया कि सलमान ने अपनी फीस जमा नहीं की है, इसलिए सजा के तौर पर क्लास के बाहर खड़ा कर दिया है। इस सलीम ने कहा कि फीस बच्चे को नहीं उन्हें भरनी होती है, इसलिए सजा भी उन्हें ही मिलनी चाहिए।