दरभंगा: सावन माह में किसान धान की रोपनी के लिए परेशान है। आकाश में काले बादल किसानों को ललचा रहे हैं। सावन माह में धरती जेठ की तरह तप रही है। वर्षा के अभाव में खेतों में धूल उड़ रही है। जिले में जुलाई महीने में कम से कम 40 प्रतिशत धान की रोपनी हो जाती थी। वहीं अभी तक 0.65 प्रतिशत ही धान की रोपनी जिले में हुई है।

वर्षा नहीं होने से किसानों की उम्मीदें टूटने लगी है। सालों बाद इस तरह के हालात पैदा हुए हैं। जुलाई महीने में किसान पानी के अभाव में खेतों की जुटाई नहीं कर पा रहे है। पंपसेट से धान की रोपाई संभव नहीं है। रोपनी के लिए खेतों में पानी जमा करने के दूसरे दिन पानी गायब हो जाता है।

वहीं मानपुर स्थित कृषि केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डा. जाकिर हुसैन का कहना है कि जिले में 20 जुलाई तक वर्षा होने की कोई उम्मीद नहीं है। इसके बाद ही बारिश सम्भव है।  आसमान में बादल छाए रहेंगे, लेकिन वर्षा नहीं होगी। वर्षा नहीं होने से किसानों को धान का बिचड़ा बचाना भी चुनौती साबित हो रही है। वर्षा नहीं होने से किसानों आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए है।

लक्ष्य से काफी कम हुई है धान की रोपनी

कृषि विभाग ने जिले में धान की रोपनी को लेकर 181832 हेक्टेयर भूमि पर लक्ष्य रखा है। जिसमें अभी मात्र 1185 हेक्टेयर भूमि पर ही रोपनी हुई है। जिले में मात्र 0.65 प्रतिशत ही धान की रोपनी हुई है। जबकि धान की बिचड़ा की बोआई जिले में शत-प्रतिशत हुआ है। वर्षा नहीं होने से बिचड़ा सूखने लगा है।

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280 मिमी की जगह हुई 72 मिमी वर्षा 

जिले में जून और जुलाई महीने में 280 मिलीमीटर वर्षा की जरूरत है। लेकिन अभी तक मात्र 72 मिलीमीटर ही वर्षा हुई है। धान की रोपनी से काफी कम है। जुलाई माह में बाराचट्टी, बेलागंज,टिकारी, खिजरसराय एवं अतरी प्रखंड में वर्षा नाम मात्र की हुई है। जिससे किसानों काफी परेशान है।