AI कंपनियां रिकॉर्ड कर रहीं ऐसी हरकत, क्या रोबाट छीन लेंगे रोजगार?
नई दिल्ली। हमेशा से यह डर इंसानों को सताता रहा है कि क्या कभी मशीनें उनकी जगह ले लेंगी। यह डर तब भी था, जब कंप्यूटर मेन स्ट्रीम का हिस्सा बनने लगे थे और यह डर अब और ज्यादा बढ़ गया है, जब AI और रोबोट्स लगातार बेहतर हो रहे हैं। दरअसल, चमक-धमक वाली रोबोटिक क्रांति के पीछे एक ऐसा कड़वा सच छिपा है जो भारत की छोटी फैक्ट्रियों और तंग गलियों से जुड़ा है। हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स और वीडियो ने दुनिया का ध्यान फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की ओर खींचा है, जो अपने सिर पर कैमरा पहनकर Ai और रोबोट्स को इंसान बनाना सिखा रहे हैं।
यह एक ऐसी गिग इकोनॉमी है, जहां इसांनी चाल-ढाल को डेटा में बदला जा रहा है, ताकि भविष्य में रोबोट्स सिलाई, पैकिंग और सामान उठाने जैसे काम कर सकें (REF.)। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो जाता है कि क्या भविष्य में AI और रोबोट्स मजदूरों की नौकरी भी निगलने वाले हैं? साथ ही क्या आज कैमरे पहनकर काम करने वाले मजदूर अपने ही पैर पर कुलहाड़ी मारने का काम कर रहे हैं?
मजदूरों से मिल रहा मोशन डेटा
रिपोर्ट्स के मुताबिक आज रोबोट्स और AI। के लिए सबसे बड़ी चुनौती असल दुनिया में मूव करना या कहें कि चलना-फिरना और हाथ-पैरों की सही मूवमेंट को पकड़ना है। इसके लिए इंसानी मोशन डेटा की जरूरत पड़ती है। यह डेटा अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में इकट्ठा करना महंगा पड़ता है। यही वजह है कि भारत की कई फैक्ट्रियां अब डेटा का फार्म बन चुकी हैं। इसके लिए मजदूरों के सिर पर कैमरे लगाकर उनके हाथ-पैरों की हरकतें रिकॉर्ड हो रही हैं।
यह कैमरे इस चीज को बारीकी से कैप्चर करते हैं कि कोई मजदूर किस तरह से हाथ-पैरों को चलाता है। इस डेटा का इस्तेमाल मशीनों को यह सिखाने के लिए किया जाता है कि इंसान किसी काम को कितनी आसानाी से कर सकता है।
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