'समय बदला, सच्चाई नहीं' — डीपीएसजी के खिलाफ अभिभावकों का बिगुल, ‘दिल्ली कूच’ की चेतावनी
आईपीए का आरोप: स्कूल प्रबंधन का ‘माइंड गेम’ फेल, एकजुट पेरेंट्स ने खोली रणनीति की पोल
लायक हुसैन
गाजियाबाद। गाजियाबाद के मेरठ रोड स्थित डीपीएसजी स्कूल में समय परिवर्तन को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन (आईपीए) ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अभिभावकों को न्याय नहीं मिला तो वे 'दिल्ली कूच' करने से पीछे नहीं हटेंगे। स्कूल प्रबंधन द्वारा 8 अप्रैल को जारी किए गए नए नोटिस को लेकर अभिभावकों में भारी आक्रोश है। आईपीए का आरोप है कि यह नोटिस समस्या का समाधान नहीं, बल्कि अभिभावकों को भ्रमित करने की एक सुनियोजित चाल है।
'नई समय सारिणी सिर्फ दिखावा, समस्या जस की तस'
ये खबर भी पढ़े : गाजे-बाजे पर नाचते थिरकते हजारों कार्यकर्ताओं ने प्रमोद तिवारी का किया गर्मजोशी से स्वागतआईपीए के मुताबिक, स्कूल ने अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग समय सारिणी जारी कर यह दिखाने की कोशिश की है कि समस्या हल हो गई है। लेकिन हकीकत यह है कि कक्षा 3 से 12 तक के छात्रों को कोई राहत नहीं मिली है।
अभिभावकों का कहना है कि पढ़ाई के घंटों में कोई वास्तविक कमी नहीं की गई, बच्चों पर मानसिक और शारीरिक दबाव पहले जैसा ही बना हुआ है केवल कक्षा 1 और 2 में मामूली बदलाव कर 'सब ठीक है' का भ्रम पैदा किया जा रहा हैl
'पेरेंट्स की एकता तोड़ने का खेल'
आईपीए ने स्कूल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रबंधन 'माइंड गेम' खेल रहा है। अलग-अलग संदेशों और समय सारिणी के जरिए अभिभावकों को बांटने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, कक्षा 10 और 12 के छात्रों के लिए 75% उपस्थिति अनिवार्य करने का दबाव बनाकर पेरेंट्स को झुकाने की रणनीति अपनाई जा रही हैl
आईपीए का सीधा हमला: 'भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना रवैया'
आईपीए के मीडिया प्रभारी विवेक त्यागी ने तीखा बयान देते हुए कहा: 'आंशिक बदलाव दिखाकर अभिभावकों को गुमराह करना एक सोची-समझी रणनीति है। यह ‘माइंड गेम’ अब ज्यादा समय तक नहीं चलेगा, क्योंकि पेरेंट्स सच्चाई समझ चुके हैं।'वहीं, उपाध्यक्ष विनय कक्कड़ ने इसे सिर्फ समय का मुद्दा नहीं, बल्कि अधिकारों की लड़ाई बताया।
उन्होंने कहा कि बिना सहमति निर्णय लेना और फिर उसे सही ठहराने के लिए भ्रम फैलाना पूरी तरह अनुचित है।
'फैसला वापस नहीं तो आंदोलन और तेज'
आईपीए के पदाधिकारियों महिपाल रावत और सुमित त्यागी ने साफ किया कि जब तक स्कूल अपना फैसला पूरी तरह वापस नहीं लेता, आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रशासन से तीन बड़ी मांगें
आईपीए ने जिला प्रशासन के सामने तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं:
स्कूल के सभी निर्णयों की निष्पक्ष जांच
बिना अभिभावकों की सहमति लागू समय परिवर्तन को तत्काल रद्द किया जाए
पारदर्शी संवाद के जरिए जल्द समाधान निकाला जाए
अभिभावकों से अपील: 'भ्रम में न आएं, एकजुट रहें'
आईपीए अध्यक्ष सीमा त्यागी ने अभिभावकों से अपील की है कि वे स्कूल के 'हित' और 'स्वार्थ' में फर्क समझें और किसी भी भ्रम में न आएं।
उन्होंने कहा: 'यह सिर्फ विरोध नहीं, बच्चों के भविष्य की सुरक्षा का सत्याग्रह है। इसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।'
साफ संदेश:
डीपीएसजी विवाद अब सिर्फ स्कूल टाइमिंग का मुद्दा नहीं रहा—यह अभिभावकों के अधिकार, बच्चों के स्वास्थ्य और पारदर्शिता की लड़ाई बन चुका है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन गाजियाबाद से निकलकर राजधानी दिल्ली तक पहुंच सकता है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
