पश्चिम यूपी में निषाद पार्टी का शक्ति प्रदर्शन 5 को,नोएडा बैठक के बाद रणनीति तेज
2027 चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की बड़ी राजनीतिक तैयारी
शुभम कश्यप
- नोएडा सम्मेलन से पश्चिम में विस्तार की रणनीति तेज
- सहयोगी दलों संग हिस्सेदारी का संकेत, जातीय गणित पर फोकस
नोएडा। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो चुकी है और इसी कड़ी में निषाद पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बड़ा दांव चल रही है। 05 अप्रैल को नोएडा स्टेडियम में प्रस्तावित कश्यप, गुर्जर, निषाद, पिछड़ा और अति पिछड़ा एकता महासम्मेलन को पार्टी अपने विस्तार अभियान का अहम पड़ाव मान रही है। यह आयोजन सिर्फ भीड़ जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की स्पष्ट रणनीति दिखाई दे रही है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने इस सम्मेलन को ‘सम्मान और अधिकार’ की लड़ाई बताते हुए इसे व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप देने की कोशिश की है। उनका जोर इस बात पर है कि पिछड़े और वंचित वर्गों को न केवल राजनीतिक हिस्सेदारी मिले, बल्कि शिक्षा और सुरक्षा जैसे बुनियादी अधिकारों की संवैधानिक गारंटी भी सुनिश्चित हो।
सम्मेलन का समय और स्थान भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक पूर्वांचल में प्रभाव रखने वाली निषाद पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। इससे पहले गोरखपुर और प्रयागराज में बड़े आयोजन कर चुकी पार्टी अब नोएडा के जरिए शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है। मेरठ से नोएडा में रैली शिफ्ट करने के फैसले को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह सम्मेलन 2027 चुनाव से पहले जातीय गणित को साधने की कोशिश है। पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में इन वर्गों को एक मंच पर लाने की पहल सीधे तौर पर सीटों के समीकरण को प्रभावित कर सकती है। पार्टी द्वारा 27 प्रतिशत राजनीतिक आरक्षण की मांग और जनगणना में वंचित समुदायों की गिनती पर जोर देना भी इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। इस दौरान विपक्षी दलों पर भी तीखे हमले किए गए हैं।
समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पर आरोप लगाते हुए पार्टी नेतृत्व ने दावा किया कि पिछड़े वर्गों के अधिकारों की अनदेखी की गई है। इसके विपरीत, निषाद पार्टी खुद को इन वर्गों की आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।साथ ही, पार्टी ने खुद को भारतीय जनता पार्टी का सहयोगी बताते हुए यह संकेत भी दिया है कि आगामी चुनाव में गठबंधन की राजनीति अहम भूमिका निभाएगी। ऐसे में यह सम्मेलन सिर्फ सामाजिक एकजुटता का मंच नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक साझेदारी और सीट बंटवारे के संकेत देने का माध्यम भी बन सकता है।
कुल मिलाकर, नोएडा का यह आयोजन निषाद पार्टी के लिए शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ राजनीतिक संदेश देने का बड़ा अवसर है। यदि पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ बनाने में सफल होती है, तो 2027 के चुनाव में उसका प्रभाव और मोलभाव दोनों बढ़ सकते हैं।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
