कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़, तीन निजी अस्पतालों पर छापा, 50 से अधिक अस्पताल रडार पर
कानपुर। शहर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले में तीन निजी अस्पतालों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से एक बिना रजिस्ट्रेशन के ही संचालित हो रहा था। यह जानकारी तब सामने आई जब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची।
सोमवार को पुलिस की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम, जिसमें एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी और कल्याणपुर सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश सिंह शामिल थे, ने संदिग्ध अस्पतालों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अधिकारियों के मुताबिक, इन अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सर्जरी के लिए जरूरी सुविधाएं तक नहीं थीं, बावजूद इसके यहां अवैध ऑपरेशन किए जा रहे थे।
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लखनऊ, मुंबई और दिल्ली से विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाया जाता था। इस टीम में नेफ्रोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट सर्जन, यूरोलॉजिस्ट और अन्य विशेषज्ञ शामिल होते थे। स्वास्थ्य विभाग अब ऐसे डॉक्टरों की भी पहचान कर रहा है, जो इस रैकेट से जुड़े हो सकते हैं।
गरीबों को बनाते थे शिकार, लाखों में होता था सौदा
जांच में सामने आया कि दलाल आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पैसे का लालच देकर उनकी किडनी खरीदते थे और जरूरतमंद मरीजों को कई गुना कीमत पर बेच देते थे। एक मामले में उत्तराखंड के युवक से करीब 10 लाख रुपये में किडनी खरीदकर उसे 90 लाख रुपये से अधिक में बेचने का खुलासा हुआ है। पीड़ित को केवल 9.5 लाख रुपये ही दिए गए थे, बाकी रकम के लिए टालमटोल की जा रही थी, जिसके बाद उसने पुलिस से शिकायत की।
बंद अस्पताल में मिला डोनर, कई हिरासत में
पुलिस को आवास विकास स्थित एक बंद पड़े अस्पताल में किडनी डोनर भर्ती मिला, जिसे तत्काल सरकारी अस्पताल में शिफ्ट कराया गया। इसके अलावा पुलिस ने दलाल, अस्पताल संचालक, डॉक्टर दंपती समेत करीब 10 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
छापों से मची खलबली, अस्पतालों ने बुझाई लाइटें
किडनी रैकेट के खुलासे के बाद पुलिस ने कल्याणपुर क्षेत्र के कई अस्पतालों में छापेमारी की। इससे वैध और अवैध अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया। कई अस्पतालों ने अपनी लाइटें बंद कर दीं और मरीजों की गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की।
50 से ज्यादा अस्पताल जांच के दायरे में
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस मामले में 50 से अधिक अस्पतालों को रडार पर लिया गया है और उनकी गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस रैकेट में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।गौरतलब है कि करीब 22 साल पहले भी कानपुर में इसी तरह का किडनी खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया था, जिसकी जांच सीबीसीआईडी ने की थी। एक बार फिर ऐसे रैकेट के उजागर होने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
