सीएम ने सुनाए स्कूल के किस्से, भाषा शुद्ध करनी हो तो आकाशवाणी सुनें
समाज को जोड़ने व आस्था को सम्मान देने का माध्यम बना आकाशवाणी: योगी
आकाशवाणी लखनऊ के 89वें स्थापना दिवस पर विभूतियों को किया सम्मानित
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ आकाशवाणी की 88 वर्ष की यात्रा को शानदार बताया है। उन्होंने कहा कि हमारे बचपन में स्मार्टफोन-टेलीविजन नहीं थे। लैंडलाइन फोन भी एकाध ही थे, उस समय सबसे पहली आवाज आकाशवाणी की सुनी थी। सुबह आकाशवाणी का कार्यक्रम ‘भरत चले चित्रकूट धुन’ से प्रारंभ होता था। हम लोगों ने बचपन में सुना और देखा कि आकाशवाणी समाज को जोड़ने और भारत की आस्था को सम्मान देने का माध्यम बना।
समाचार पत्रों की हेडलाइंस भी अलग-अलग समय में चलने वाले बुलेटिनों के माध्यम से पता चलती थी। उसमें भाषा की शुद्धता, समाचार की गुणवत्ता और सच्चाई भी झलकती थी। कहीं भी पीत पत्रकारिता नजर नहीं आती थी। जो जैसा है, वैसा प्रस्तुत करने का साहस था। सीएम योगी ने गुरुवार को आकाशवाणी लखनऊ के 89वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस कार्यक्रम में सीएम योगी ने पद्म पुरस्कार से सम्मानित विभूतियों और आकाशवाणी के वरिष्ठ लोक सेवा प्रसारकों को भी सम्मानित किया। इस दौरान आकाशवाणी लखनऊ की यात्रा पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। कहा कि उस समय आकाशवाणी के मुख्य केंद्र लखनऊ के साथ ही नजीमाबाद और गोरखपुर केंद्र से समाचार सुनने को मिलते थे।
आकाशवाणी ने हिंदी की उप भाषाओं तथा भोजपुरी, अवधी, गढ़वाली, कुमाऊंनी समेत अलग-अलग बोलियों के जरिये स्थानीय लोगों को जोड़ने का एक माध्यम बनाया। आकाशवाणी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ज्ञानवर्धन, आस्था का सम्मान व स्थानीय लोकभाषाओं-लोककलाओं के लिए सशक्त मंच भी था। कहा कि गांव हो या शहर, जहां पहले कोई नहीं पहुंच पाता था, वहां आकाशवाणी पहुंच जाता था। किसान रेडियो पर किसान दर्शन कार्यक्रम सुनते थे। सीएम ने कहा कि हम लोग आकाशवाणी पर प्रधानमंत्री जी के मन की बात सुनते हैं। यह कार्यक्रम 3 अक्टूबर 2014 से प्रारंभ हुआ। अब तक इसके 132 एपिसोड हो चुके हैं। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में क्या विशिष्ट हो रहा है। कहा कि देश-दुनिया को जानने का माध्यम आकाशवाणी ही था। जहां सड़क-पगडंडी भी नहीं थी, वहां आकाशवाणी पहुंच चुका था। इसके कार्यक्रम लोगों को प्रेरित करते थे।
आकाशवाणी ने लोकवाद्यों को भी प्रोत्साहित किया। जिन्होंने सड़क नहीं देखी, वे लोग भी अपने लोकवाद्य के साथ आकाशवाणी जाकर उसका वादन करते थे, तब देश को इन वाद्यों के बारे में जानकारी मिल पाती थी। आकाशवाणी किसानों, खिलाड़ियों के लिए प्लेटफॉर्म बना। आज हमारे पास जानकारी लेने के अनेक साधन हैं, लेकिन उस समय ऐसा कुछ भी नहीं था। हमने आकाशवाणी को आवाज से आगे बढ़कर जनविश्वास के प्रतीक के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ते देखा है। कहा कि भाषा को शुद्ध करना हो तो आकाशवाणी सुनें, क्योंकि उद्घोषक के चयनित शब्दों से सीखने-जानने की अभिलाषा होती थी।
कार्यक्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल, प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी, आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव कुमार जैन, कार्यक्रम प्रमुख सुमोना पांडेय आदि की मौजूदगी रही। संचालन आत्म प्रकाश मिश्र ने किया।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
