(Tihar Jai)
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गैंगस्टर्स को मदद पहुंचाने के आरोप में जांच के घेरे में तिहाड़ जेल(Tihar Jai) का स्टाफ

नई दिल्ली: देश की सबसे चर्चित तिहाड़ जेल (Tihar Jai) में अपराधी ठगी और हत्या की साजिश रचते हैं और उनके बाहर बैठे उनके गुर्गे इन वारदातों को अंजाम देते हैं. सिद्धू मूसेवाला की हत्या और उसमें लॉरेंस बिश्नोई का हाथ होने से एक बार फिर यह सवाल उठने लगे कि तिहाड़ जेल में बंद अपराधी आखिर इन वारदातों को कैसे अंजाम दे रहे हैं. इससे पहले सुकेश चंद्रशेखर का नाम भी चर्चा में आया था जिसने तिहाड़ जेल में बैठे-बैठे रैनबैक्सी के पूर्व मालिक शिविंदर सिंह की पत्नी से करोड़ों रुपये की ठगी की थी.

हालांकि जेल प्रशासन के लिए यह कोई नई बात नहीं है. सुकेश चंद्रशेखर का मामले सामने आने के बाद जेल अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. जेल प्रशासन का कहना है कि लॉरेंस बिश्नोई मामले में अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है. लॉरेंस पर आरोप है कि उसने जेल से मूसेवाला की हत्या की योजना बनाई थी, लेकिन बिश्नोई ने यह सब कैसे किया और जेल में इस काम में उसकी मदद किसने की, इसका कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है.

सिर्फ सुकेश चंद्रेशखर और लॉरेंस बिश्नोई ही नहीं हैं बल्कि नीरज बवाना, काला जठेरी समेत अन्य गैंगस्टर भी सालों से जेल से रैकेट चला रहे हैं. हालांकि जेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन इसका सीमित प्रभाव पड़ा है.

‘जेल में और जैमर लगाए जाएंगे’
जेल प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने उच्च सुरक्षा वाले वार्डों में और जैमर लगाए जाएंगे और सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी की जा रही है. उन्होंने कहा, “जेल विभाग जेलों के अंदर अवैध फोन के इस्तेमाल की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए हमेशा प्रयास कर रहा है. इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं. ऐसी गतिविधियों में शामिल होने के संदेह में अपराधियों पर सीसीटीवी के माध्यम से बेहतर निगरानी रखी जा रही है.”

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“अपराधियों के सेल और बैरकों की तलाशी नियमित रूप से की जाती है. समय-समय पर कैदियों के रहने की जगह भी बदली जाती है. तिहाड़ में मोबाइल कॉल ब्लॉकिंग टावर लगाए गए हैं. इसे मजबूत करने के लिए उच्च सुरक्षा वाले वार्डों में और जैमर लगाए जाएंगे.”

‘जेल अधिकारियों की अपनी कुछ सीमाएं होती हैं’
जेल के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने इन तकनीकों की सीमाओं के बारे में बताया और कहा कि, हमने जेल से किसी को भी कॉल करने से रोकने के लिए कॉल ब्लॉकिंग टावर लगाए हैं. लेकिन हर तकनीक की अपनी सीमाएं होती हैं. ऐसे स्थान हैं जहां इन टावर्स की पहुंच नहीं है और अपराधियों द्वारा इसका दुरुपयोग किया जाता है. इसके अलावा हाल ही में हमने एक डॉग स्क्वायड बनाने की योजना बनाई है, विशेष रूप से ड्रग्स की तस्करी के लिए, लेकिन काम शुरू करने में समय लगेगा.

हालांकि लॉरेंस बिश्नोई के मामले में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है कि उसके पास जेल के अंदर मोबाइल फोन या किसी अन्य सुविधा कैसे पहुंची. स्थानीय पुलिस को कुछ सबूत पेश करने दीजिये. हमारी रिपोर्ट के आधार पर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

वहीं दूसरी ओर तिहाड़ जेल के एक पूर्व डीजी का कहना है कि जेल प्रशासन कार्रवाई करता है, चूंकि अधिकारियों के सामने शातिर अपराधियों से निपटने की चुनौती होती है और उनकी अपनी कुछ सीमाएं होती हैं.

ये गैंगस्टर जेल में हत्या, जबरन वसूली आदि जैसे अपराधों के लिए बंद हैं. जेल प्रशासन को उनके कब्जे से कोई मोबाइल फोन या अनधिकृत सामान मिलने पर कोई क्या सजा दे सकता है? ज्यादा से ज्यादा उन्हें अलग किया जा सकता है और कुछ समय के लिए किसी से भी मिलने से रोका जा सकता है. जाहिर है कि जेल प्रशासन की मिलीभगत के कारण अपराधियों को सामान उपलब्ध कराया जाता है.

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“ये अपराधी मोबाइल फोन नहीं रखते हैं, लेकिन जेलों में अपने सहयोगियों को सौंप देते हैं. जब भी उन्हें बात करनी होती है, वे उनसे लेते हैं, इसका इस्तेमाल करते हैं और वापस दे देते हैं. प्रशासन मोबाइल फोन पकड़ भी लेता है तो अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत से दूसरा फोन लेने में कामयाब हो जाते हैं.