1000 रुपए लेकर आंखों की रोशनी छीनी
1000 रुपए लेकर आंखों की रोशनी छीनी

1000 रुपए लेकर आंखों की रोशनी छीनी

कानपुर: कानपुर में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाले 6 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई। यहां तक की 6 लोगों में 4 का रेटिना पूरी तरह से सड़ गया। इन सभी लोगों ने कैंप में अपनी आंखें दिखाई थी, जहां डॉक्टरों ने सभी आंखें खराब बताकर ऑपरेशन कर दिया। ये यहां पर एक दलाल के जरिए पहुंचे थे।

पुलिस जांच में पता चला कि डॉक्टर ने सीएमओ की बगैर अनुमति के कैंप लगाया था। इतना ही नहीं मरीजों से रुपए भी वसूले थे। ऑपरेशन के बाद कोई फॉलोअप भी नहीं किया। इसी का नतीजा रहा कि आंखें सही होने की जगह खराब हो गईं। बर्रा पुलिस ने डॉक्टर समेत 2 के खिलाफ FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को रोगियों की जांच GSVM मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में कराई। रोगियों की आंखें संक्रमण के कारण खराब हुई हैं। परीक्षण के बाद नेत्र रोग विभाग के डॉक्टर संक्रमण खत्म करने में जुटे गए, जिससे पुतली बाहर न निकालनी पड़ी। 4 मरीजों का कहना है कि ऑपरेशन कराने के बाद से ही आंखों में सड़न पैदा हो गई थी।

संक्रमण की वजह से उनकी कार्निया गलकर सफेद हो गई है। दो रोगियों की आंखों में कार्निया थोड़ी बची हुई है, जिससे उसमें सुधार की कोशिश की जा रही है। पांच रोगियों को हैलट में भर्ती हैं। एक रोगी क्षेत्रीय डॉक्टर से इलाज कराने की बात कहकर वापस लौट गई है। मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने बताया कि चार रोगियों की कार्निया अंदर तक सड़ गई है।

DCP साउथ प्रमोद कुमार ने बताया कि 11-W-2 बर्रा बाईपास चौराहा पर आराध्या आई हॉस्पिटल है। संचालक नीरज गुप्ता ने 2 से 6 नवंबर के बीच राजाराम कुरील, रमेश कश्यप, नन्ही उर्फ मुन्नी, सुल्ताना, शेर सिंह और रामादेवी समेत 6 मरीजों के आंख का ऑपरेशन किया था। ये सभी शिवराजपुर के सुधरदेवा गांव के रहने वाले हैं। इन सभी को उत्तरी निवासी दुर्गेश शुक्ला सरकारी कैंप का होने का झांसा देकर हॉस्पिटल में ऑपरेशन के नाम पर लाए थे।

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इतना ही नहीं ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने एक भी मरीज का फॉलोअप तक नहीं किया। ऑपरेशन के बाद किसकी आंख में क्या दिक्कत आई, क्यों ऑपरेशन के बाद परेशानी बढ़ गई। मरीज तड़पते रहे, लेकिन ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने अपना पल्ला झाड़ लिया।

शिवराजपुर सीएचसी प्रभारी डॉ. अनुज दीक्षित ने जांच शुरू की तो सभी पीड़ितों ने बातचीत में बताया कि ऑपरेशन के 6 घंटे के भीतर ही घर भेज दिया गया था। जबकि नियमत: कम से कम 12 घंटे तक मरीज को निगरानी में हॉस्पिटल में ही रखा जाता है। यही नहीं 2 नवंबर की शाम को ही पट्‌टी भी खोल दी गई।

आंखों की रोशनी गंवाने वाले बुजुर्ग राजाराम कुरील ने बताया कि आंखों से लेकर आधा सिर दर्द से फटा जा रहा है। पूरी असहनीय पीड़ा हो रही है। कोई सुनने और देखने वाला नहीं है। आंखों से दिखना भी पूरी तरह बंद हो गया है। रोशनी देने वाले डॉक्टर ने ही आंखों की रोशनी छीन ली।

आराध्या नर्सिंग होम के आई कैंप में आंख गंवाने वाले बुजुर्ग 13 दिन भटकते रहे। लेकिन डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उन्हें केवल आश्वासन देते रहे। ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर तक उन्हें टरकाते रहे।

पीड़ितों ने कहा कि बीती 2 नवंबर को वीरामऊ में नेत्र रोगों की जांच का कैंप लगा था। यहां उत्तरी के रहने वाले दुर्गेश शुक्ल रिक्शे से सुघरदेवा गांव के बुजुर्ग राजाराम कुरील (70) , रमेश कश्यप (63), नन्हीं देवी (63), सुल्ताना देवी (75), रमादेवी (67), शेर सिंह (72) को कैंप में ले गए। यहां पर चेकअप कर बताया गया कि उनकी एक आंख का मोतियाबिंद पक गया है और सभी लोग 1000 रुपए जमा कर कानपुर चलने के लिए तैयार हो जाएं।

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दुर्गेश सभी को 2 नवम्बर की दोपहर एम्बुलेंस से कानपुर के आराध्या आई हॉस्पिटल ले आए। यहां दो घंटे इंतजार के बाद डॉ. नीरज गुप्ता और डॉ. अंशुल पांडेय ने सभी का आपरेशन कर शाम को गांव भेज दिया। भेजने से पहले एक हफ्ते के बाद चेक अप के लिए आने को कहा।

8 नवंबर से सभी 6 बुजुर्गों की आंखों में खुजली और दर्द होने लगा। 9 को बढ़ा तो परिजनों ने दुर्गेश से सम्पर्क किया। उसने 200-200 रुपए लेकर आराध्या हॉस्पिटल में 13 नवम्बर को डॉ. गुप्ता से चेकअप कराया और दवा देकर फिर गांव रवाना कर दिया।

आंख गंवाने वाले बुजुर्ग 17 नवंबर को प्रधानपति हरपाल सिंह चंदेल से मिले। मामला गंभीर देख प्रधान पति पीड़ित बुजुर्गों को लेकर अगले दिन शंकरा नेत्र चिकित्सालय चौबेपुर लाए। चेक अप के बाद डॉक्टरों ने बताया कि मोतियाबिंद वाली आंखों में संक्रमण फैल गया है और ऑपरेशन फेल हो गया। सभी की आंख की रोशनी चली गई है। इसके बाद सभी मिश्रिख सांसद अशोक रावत से मिले। सांसद से सीएमओ से शिकायत की तो पूरा मामला खुला।

मामला सामने आने के बाद सीएमओ ने कमेटी बनाकर जांच का आदेश दिया था। जांच कमेटी की रिपोर्ट में अराध्या हॉस्पिटल की अस्पताल की घोर लापरवाही सामने आई। जांच में ये बात सामने आई है कि गांवों में कैंप लगाकर आराध्या आई हॉस्पिटल तक मरीज लाए जाते थे। फ्री कैंप में हल्की जांचें कर मरीजों को बीमारी के बारे में बताया जाता था और फ्री इलाज के नाम पर 15-15 सौ रुपए वसूले जाते थे। यही नहीं सरकारी योजनाओं से भी हॉस्पिटल पैसे वसूलता था।

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जांच कमेटी में शामिल डॉ. एसके सिंह की तहरीर पर बर्रा पुलिस ने अराध्या हॉस्पिटल के संचालक और मरीज लाने वाले दलाल दुर्गेश के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग की डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि 2 बुजुर्गों की आंखों की रोशनी वापस आ सकती है। राजाराम और शेर सिंह की आंखों में कुछ रोशनी बची है। अभी पूरा फोकस इन्फेक्शन को कंट्रोल करने पर है। इन्फेक्शन कंट्रोल में आने के बाद ही अगले प्रोसिजर किए जाएंगे। इन्फेक्शन किस वजह से फैला है, इसके लिए कल्चर जांच कराई गई है। 48 से 72 घंटे में रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

आराध्या आई हॉस्पिटल का मामला सामने आने के बाद 2 और मरीज सामने आए हैं, जिन्होंने इसी आई हॉस्पिटल से ऑपरेशन कराया था। एलआईजी बर्रा में रहने वाले बुजुर्ग राम आसरे शुक्ल 2 साल बाद सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि डॉ. नीरज गुप्ता से ही 13 मार्च 2020 को सबलबाई का ऑपरेशन कराया था। ऑपरेशन के लिए डॉक्टर ने 60 हजार रुपए लिए थे। तब से दोनों आंखें खराब हैं। चेन्नई तक डॉक्टर को दिखाया लेकिन नीरज गुप्ता ने आंखों को खराब कर दिया, अभी तक आराम नहीं है।

इसके अलावा कल्यानीपुरवा के रहने वाले ड्राइवर अवधेश ने बताया कि साढे़ 4 साल की बेटी की आंख भी डॉक्टर नीरज गुप्ता के गलत ऑपरेशन की वजह से खराब हो गईं थीं। दोनों को नेत्र विभाग में भर्ती कर लिया गया है।