वीटीआर में छोटे जीवों की तस्करी

सीतामढ़ी: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से जीव-जंतुओं की तस्करी हाल के दिनों में बढ़ी है। बीते दिनों दो पैंगोलिन के साथ पकड़े गए तीन तस्करों के बाद से वीटीआर प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं। इन तस्करों का तार नेपाल तक जुड़ा बताया जा रहा है। वीटीआर में बहुत से ऐसे जीव हैं, जिन पर तस्करों की नजर है। ऐसे जीवों की तस्करी मांस और दवाओं के लिए की जाती है। नेपाल जरिए उन्हें चीन पहुंचा दिया जाता है। तस्कर आसपास के ग्रामीणों को अच्छी कमाई का लालच देकर काम कराते हैं। बीते 10 मार्च को नर व मादा दो पैंगोलिन के साथ तीन तस्करों को पुलिस ने पकड़ा। ये सभी तस्कर जंगल से सटे वाल्मीकिनगर के रहने वाले हैं।

बाघ की हड्डी बरामद हुई थी

पूछताछ में पता चला कि 16 लाख में उनकी डील हुई थी। इसे नेपाल पहुंचाना था। इससे पहले रामनगर के दोन निवासी हरि गुरो व नरसिंसह गुरो बाघ की तस्करी में जेल जा चुके हैं। इनके खिलाफ तकरीबन सात बाघों के शिकार के सबूत मिले थे। मंगुराहा वन क्षेत्र से बीते वर्ष एक शिकारी के पास से बाघ की हड्डी बरामद हुई थी। वीटीआर प्रशासन ने आशंका जताई है कि इस इलाके में कुछ गिरोह सक्रिय हैं, जो लुप्तप्राय जीवों के शिकार में संलिप्त हैं। बहुत से जीवों का इस्तेमाल दवा बनाने में किया जाता है।

इन वन्यजीवों पर खतरा 

बाघ और पेंगोलिन के अलावा वीटीआर में कई ऐसे दुर्लभ जीव हैं, जिन पर तस्करों की नजर रहती है। इसमें क्लाउडेड लेपर्ड, चार सिंगों वाले मृग, बकरी-मृग, बर्मीज अजगर, चित्तीदार बिल्ली, होरी-बेलिड गिलहरी, यलो थ्रोटेड मार्टेन व हिमालयन सीरो आदि हैं। वल्र्ड वाइल्ड लाइफ के स्थानीय अधिकारी कमलेश मौर्य ने बताया कि बाघ के जैसे ही पेंगोलिन, होरी-बेलिड गिलहरी, कुछ कछुए और कई जीव टाइप एक श्रेणी में हैं। इनकी तस्करी पर 10 साल की सजा है। वीटीआर के निदेशक सह मुख्य वन संरक्षक नेशामणि के अनुसार तस्करों के ठिकाने पर छापेमारी चल रही है।

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