विचार मित्र

प्रोत्साहन जरुरी 

संपादकीय बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों का पटाक्षेप हो चुका है। भारत ने 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य के साथ कुल 61 पदक जीते हैं। यह अभी तक की सर्वश्रेष्ठ खेल-उपलब्धि है, बेशक दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में हमने 101 और 2018 के गोल्ड कोस्ट खेलों में 66 पदक जीते थे। …

Read More »

कभी ख़त्म भी होगा सत्ता पोषित ‘असीमित भ्रष्टाचार ‘?

निर्मल रानी राष्ट्रीय राजमार्ग हों या अंतरराज्यीय मार्ग अथवा शहरों,क़स्बों व गांव की सड़कें या गलियां,कहने को तो इनका निर्माण जनता की ज़रूरतों व जन सुविधाओं के मद्देनज़र किया जाता है। परन्तु समय पूर्व इनका क्षतिग्रस्त या ध्वस्त हो जाना तो कभी कभी यही एहसास दिलाता है कि इन सड़कों …

Read More »

बिखरा विपक्ष 

संपादकीय  देश के नए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की शपथ ग्रहण के पहले बिहार की राजनीति ने करवट बदली है, जहाँ नीतीश सरकार से भाजपा की विदाई हो रही है और पुनः राजग व कांग्रेस के गठजोड़ से नई सरकार के गठन की प्रबल सम्भावनाएं हैं। किन्तु इस घटनाक्रम से भी …

Read More »

व्यंग्य: राजा का नया फरमान

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ बहुत पुरानी बात है। एक राजा थे। एक दिन उन्होंने आदेश दिया कि राज्य में झंडोत्सव मनाया जाए। वैसे तो झंडा अमूल्य था। लेकिन प्रजा ने देखा कि यह तो राजभंडार में मात्र कुछ ही रुपयों में बिक रहा था। ‘तन-मन में देशभक्ति हो न हो, …

Read More »

रक्षाबंधन भाई-बहन के विशुद्ध, सात्विक, सनातन प्रेम का त्यौहार 

-डॉ उमेश प्रताप वत्स  भारत के लोग अधिकांश तनावमुक्त रहते हैं क्योंकि भारत में कोई महीना ऐसा नहीं जब कोई त्यौहार ना हो इसलिए इसे त्यौहारों का देश भी कहते हैं। हर त्यौहार में परिवार के सदस्य नये-नये वस्त्र पहनकर, घर-आंगन को सुसज्जित कर, बजट का कुछ भाग त्यौहार को …

Read More »

अमृत महोत्सव के जश्न में, कहाँ खड़े हैं आज हम?

Program

(विश्व की उदीयमान प्रबल शक्ति के बावजूद भारत अक्सर वैचारिक ऊहापोह में घिरा रहता है. यही कारण है कि देश के उज्ज्वल भविष्य और वास्तविकता में अंतर दिखाई देता है. हालांकि भारत महाशक्ति बनने की प्रक्रिया में प्रमुख बिंदुओं पर खरा उतरता है, लेकिन व्यापक अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में घरेलू मुद्दों …

Read More »

पर्सनल डाटा क़ानून 

संपादकीय दुनिया में जरुरी गतिविधियों के ऑफ़लाइन की बजाय ऑनलाइन होते चले जाने की प्रवृति ने परम्परागत तरीकों से काम की पद्धति क़ो ही बदल दिया है, इसीलिए देश में पर्सनल डाटा क़ानून की बात हो रही है। हमारे देश में भी तेजी से आर्थिक और सामाजिक विषयों का संचालन …

Read More »

मुफ्तखोरी और तुष्टीकरण जैसे मुद्दों से कतरा रहे हैं राजनैतिक दल

डा. रवीन्द्र अरजरिया ईडी की कार्यवाही के विरोध में विरोधी दलों ने मोर्चे खोलना शुरू कर दिये हैं। कांग्रेस के मुखिया गांधी परिवार से पूछतांछ होते ही पार्टी ने सडकों पर जंग छेड दी। देश-प्रदेश की राजधानी से लेकर दूर दराज के इलाकों तक में महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और भ्रष्टाचार …

Read More »

एक और युद्ध की आहट

संपादकीय  ताईवान पर कब्जे क़ो लेकर चीन जिस तरह के तेवर दिखा रहा है, आने वाले समय में दुनिया एक और युद्ध की आहट महसूस कर रहीं है। यह स्थिति तब है ज़ब विश्व के सिर पर रूस-यूक्रेन युद्ध का बोझ है और समूची दुनिया इस युद्ध के परिणाम देख …

Read More »

व्यंग्य: घास फूस और घूस

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ हाल ही में एक कार्यालय जाना हुआ। वहाँ कहने को तो अत्याधुनिक कंप्यूटर थे, लेकिन डिब्बे में बंद पड़े थे। कहा गया कि इसका अनावरण अभी नहीं हुआ है। इसीलिए पुराने कंप्यूटरों से ही काम चलाना पड़ रहा है। पुराना तो पुराना होता है। उसका …

Read More »