फर्जी वोटरों पर वार, संदिग्ध विदेशियों पर आयोग की नजर, होगी कानूनी जांच

घर-घर सत्यापन में संदिग्ध विदेशी नागरिकों की सूचना देंगे बीएलओ

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नीरज अवस्थी

  • नागरिकता पर फैसला नहीं करेंगे बीएलओ, सक्षम अधिकारी करेंगे अंतिम निर्णय
  • 16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान जारी

नई दिल्ली । मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और विश्वसनीय बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) के तीसरे चरण में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं। अब घर-घर सत्यापन के दौरान यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर संदेह पैदा होता है तो बीएलओ उसकी जानकारी संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) को देंगे। इसके बाद मामला नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा जाएगा, जहां नियमानुसार जांच होगी।

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि बीएलओ किसी व्यक्ति को विदेशी नागरिक घोषित नहीं करेंगे। उनकी भूमिका केवल तथ्यों का सत्यापन करने और संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित रहेगी। किसी भी व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम फैसला केवल अधिकृत अधिकारी ही उपलब्ध दस्तावेजों, जांच और सुनवाई के आधार पर करेंगे। एसआईआर के दौरान बीएलओ प्रत्येक मतदाता के घर पहुंचकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मतदाता संबंधित पते पर निवास कर रहा है या नहीं। 

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साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि मतदाता सूची में दर्ज विवरण सही हैं या नहीं। यदि कोई मतदाता नहीं मिलता, स्थान बदल चुका है, मृत्यु हो चुकी है या उसका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होने की आशंका है तो उसका विवरण अलग से दर्ज किया जाएगा। केवल अनुपस्थित मिलने के आधार पर किसी को विदेशी नागरिक नहीं माना जाएगा।

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निर्वाचन आयोग के नए दिशा-निर्देशों में पहली बार यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि सत्यापन के दौरान किसी व्यक्ति के विदेशी नागरिक होने का संदेह उत्पन्न होता है तो उसका मामला सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाएगा। इसके बाद संबंधित एजेंसियां स्वतंत्र जांच करेंगी और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।आयोग के इस कदम के पीछे मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की कवायद को प्रमुख वजह माना जा रहा है। आयोग का कहना है कि लोकतंत्र की निष्पक्षता तभी सुनिश्चित होगी जब मतदाता सूची में केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम शामिल हों। 

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इसी उद्देश्य से मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अपात्र प्रविष्टियों की भी पहचान की जा रही है। गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग ने इस विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण की शुरुआत 14 मई से 16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में की है। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा और उत्तराखंड शामिल हैं। वहीं, दिल्ली, चंडीगढ़ तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव केंद्रशासित प्रदेशों में भी यह अभियान चल रहा है। 

आयोग के अनुसार, इस चरण में करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं का घर-घर सत्यापन किया जा रहा है, ताकि मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन, त्रुटिरहित और विश्वसनीय बनाया जा सके। इसके लिए करीब 3.94 लाख बूथ लेवल अधिकारी तैनात किए गए हैं, जबकि राजनीतिक दलों के 3.42 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट भी प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं। आयोग का दावा है कि इस व्यापक अभियान का मकसद किसी पात्र मतदाता का नाम हटाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, सटीक और भरोसेमंद बनाना है। वहीं राजनीतिक दल इस प्रक्रिया पर अपनी-अपनी निगाह बनाए हुए हैं, क्योंकि इसका सीधा असर भविष्य के चुनावों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर पड़ सकता है।

लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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