सावधानी न बरतने पर एमडीआर टीबी से परिवार पर भी एमडीआर का खतरा*

संत कबीर नगर,जिन क्षय रोगियों का इलाज चल रहा हो वह अपनी दवाएं रोज खाएं। बीच में दवा छोड़कर खुद तथा अपने परिवार के लोगों को संकट में न डालें। क्षय रोगी जब बीच में दवाएं छोड़ देगा तो उसका टीबी एमडीआर ( मल्‍टी ड्रग रजिस्‍टेंस )  में तब्‍दील हो जाएगा। ऐसे में उनके सम्‍पर्क में पहले उसके परिवार के लोग ही आएंगे और बिना सावधानी उनके सम्‍पर्क में आने से परिवार के लोगों के बीच क्षय रोग का जो संक्रमण होगा वह सामान्‍य नहीं बल्कि सीधे एमडीआर टीबी का होगा।

यह बातें जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ एस डी ओझा ने कहीं। उन्‍होने बताया कि वर्ष 2025 तक क्षय रोग को जड़ से समाप्‍त करने के लिए निरन्‍तर अभियान चलाया जा रहा है और क्षय रोगियों की खोज करके उन्‍हें क्षय मुक्‍त कराया जा रहा है। क्षय रोगियों को पोषण भत्‍ते के रुप में 500 रुपए प्रति माह  भी इलाज के दौरान दिए जाते हैं। टीबी के मरीजों में इलाज के दौरान गलत तरीके से  दवाओं के सेवन के कारण एमडीआर टीबी की समस्‍या सबसे ज्यादा होती है। जब मरीज टीबी का इलाज करा रहा होता है उस दौरान टीबी की दवाओं का सही तरीके से सेवन न होने या अनियमितता की वजह से एमडीआर टीबी हो जाता है।

डॉ ओझा ने बताया कि एमडीआर टीबी के मरीजों के शरीर में मौजूद ट्यूबरक्लोसिस के बैक्टीरिया दवाओं के प्रति इतने रेजिस्टेंट हो जाते हैं कि दवाओं का असर बिलकुल भी नहीं होता है। ऐसे मरीज जो एमडीआर से पीड़ित हैं, बिना सावधानी उनके संपर्क में आने से सीधे एमडीआर टीबी ही होता है।

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*जिले में हैं 128 एमडीआर मरीज*

क्षय रोग के जिला कार्यक्रम समन्‍वयक अमित आनन्‍द बताते हैं कि जिले में इस समय एमडीआर टीबी के 128 मरीजों का इलाज चल रहा है। एमडीआर टीबी के जिले में वर्ष 2020 में 139 मरीज, 2021 में 167 तथा वर्ष 2022 में अ‍भी तक 38 मरीज चिन्हित किए गए थे। इनका इलाज पहले दो साल चलता था लेकिन अब 11 महीने तक चलता है।

एमडीआर टीबी के कारण

–    टीबी के इलाज के दौरान इलाज का कोर्स पूरा न करने की वजह से।
–    गलत तरीके से टीबी की दवाओं का सेवन करने की वजह से।
–    दवाओं की क्वालिटी खराब होने पर एमडीआर टीबी का खतरा।
–    टीबी की दवाएं नियमित रूप से न लेने की वजह से।ह
–    एमडीआर टीबी के मरीजों के संपर्क में असावधानी के साथ आने की वजह से।