DJHçÕÁÜè ÂÚU ÂýçÌç·ý¤Øæ ÎðÌð çß·¤æâ ç˜æÂæÆUè Áæ»ÚU‡æ

गांव में रहने वालों की लाइफ स्टाइल बदल गई

बस्ती । पांच साल पहले बिजली के मामले में ग्रामीण क्षेत्र उपेक्षा के शिकार थे। मामूली गड़बड़ी होने पर कई दिनों तक बिजली के दर्शन लोगों को नहीं हो पाते थे। बिजली कब आएगी और कब चली जाएगी, इसको लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी। 18 घंटे गांवों में बिजली मिलने लगी तो सिचाई आसान हो गई साथ ही ईंधन पर होने वाला व्यय कम हो गया। बात विकास की होती है तो लोग बिजली आपूर्ति व्यवस्था की तारीफ करने लगते हैं। ग्रामीण जीवनशैली में आए बदलाव को लेकर हमारे संवाददाता गिरिजेश त्रिपाठी ने पड़ताल की। सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर जिले की सीमा से लगने वाली रुधौली विधान सभा क्षेत्र में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन आया है। एक नया सब स्टेशन बनाया गया तो दूसरे की क्षमता वृद्धि की गई। इसके अलावा एक दर्जन ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि कर लोकल फाल्ट और लो वोल्टेज जैसी समस्या से राहत भी दी गई। राजेश सिंह ने बताया कि रामनगर के असनहरा में 33/11 केवीए का निर्माण कराया गया तो लोढ़वा में 132 केवीए क्षमता वृद्धि का ट्रांसमिशन केंद्र बना। पिछले पांच साल में ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की स्थिति काफी सुधरी है।

पांच साल पहले 8 से 10 घंटे विद्युत आपूर्ति की जाती थी। बिजली के आने जाने का कोई समय नहीं था। रात में सोने के बाद बिजली आती थी व सुबह जागने के पहले ही कट जाती थी। अब गांवों में 18 घंटे बिजली मिल रही है। लोकल फाल्ट की समस्या से भी काफी हद तक निजात मिल गई है। दुखराम मौर्य,सेखुई पांच साल पहले शाम के समय दिवाली के दिन भी बिजली नहीं मिल पाती थी। घरों में लगे कूलर, फ्रिज,पंखा और इ‌र्न्वटर शो पीस बनकर रह गए थे। भरपूर बिजली मिलने लगी तो लोगों के रहन-सहन का तरीका बदल गया। अब तो घर की छतों पर डिश एंटीना और पानी की टंकियां दिखने लगी हैं। विकास त्रिपाठी,चिरैयाडांड़ पांच साल पहले बिजली की स्थिति बहुत खराब थी। संपन्न लोगों के घर जनरेटर व इन्वर्टर से रोशन हो जाते थे। गरीबों को ढिबरी व लालटेन से काम चलाना पड़ता था। अब भानपुर हो या फिर रुधौली तहसील मुख्यालय, 22 घंटे बिजली मिल रही है। देर तक बाजार में चहल-पहल रहती है। श्रीकांत कसौधन, भानपुर। विद्युत आपूर्ति में सुधार होने से आम उपभोक्ताओं के साथ ही किसानों को सस्ते दर पर सिचाई करने में सहूलियत मिली है। पहले शाम होते ही गांव अंधेरे में डूब जाते थे। वहीं अब तो गांवों की गलियां भी रोशनी से जगमग दिखने लगी हैं। लाल बहादुर मिश्र-परसोहिया। हाथ की जगह मशीन से धुलते हैं कपड़ा और मिक्सर से मसाला बिजली से आया बदलवा देखना हो तो गांवों में जाइए। भानपुर तहसील मुख्यालय से दस किमी की दूरी पर सोनहा-शिवाघाट मार्ग पर चिरैयाडांड गांव है। बिजली आपूर्ति व्यवस्था और ग्रामीण जीवनशैली जानने के लिए सोमवार की रात आठ बजे जागरण टीम पहुंची तो घरों में या तो लोग टीवी पर चुनावी खबरें देख रहे थे या फिर घर के दरवाजे पर अलाव जलाकर गपशप कर रहे थे। गांव में करीब 90 घर हैं। पांच साल पहले महज दो घरों में बिजली का कनेक्शन था। ध्रुवचंद चौधरी का कहना है कि दो साल पहले गांव का विद्युतीकरण कराया गया है। हमें याद है कई दिनों तक बिजली नहीं रहती थी। मोबाइल चार्ज कराने के लिए चौराहे पर जाना पड़ता था। इसके लिए 5 से 10 रुपये किराया देने की मजबूरी थी।

See also  डीएम ने किया मतदाता जागरूकता रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना

बेचन प्रसाद ने बताया कि 5 वर्ष पूर्व शाम को लाइट नहीं रहती थी। तब लोग जल्दी से खा पीकर सो जाते थे। मंजू देवी ने बताया कि बिजली से हम महिलाओं को काफी सहूलियत मिली है। हाथ से कपड़ा धोना और सील बट्टे पर मसाला पीसना पड़ता था। अब वाशिग मशीन से कपड़े धुलते हैं तो मिक्सर से मसाला।विवेक चन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों को पढ़ाई लिखाई करने में काफी सहूलियत मिली है। सुधा त्रिपाठी ने बताया कि अब गांवों में भी लगभग हर घर में टीवी, डिश एंटीना, कूलर व पंखे हो गए हैं। महिलाएं अपनी पसंद के कार्यक्रम देखकर अपना मनोरंजन भी कर ले रही हैं। सलोनी ने बताया कि बिजली न रहने पर सुबह स्कूल जाने के लिए तैयार होने में असुविधा होती थी। अब तो घर में ही कपड़े भी प्रेस कर लेते हैं। विनोद यादव ने बताया कि पर्याप्त बिजली रहने से खेती का काम करने में भी सुविधा हो गई है। गांव में बिजली लग जाने के बाद सिचाई हेतु कनेक्शन लिया है।