सड़क सुरक्षा का माखौल उड़ाते ‘माननीय’!

-वाहनों के पीछे वाले शीशों से झलकता है सिंबल स्टेटस

-ब्लैक फिल्म लगाना गलत, शीशे पर अलग से कुछ लिखना-चस्पा करना सही कैसे

-राजधानी की सड़कों पर फर्राटा भरते दिख जाते हैं ऐसे नेताओं के लग्जरी वाहन

लखनऊ। हमेशा से जीवन की मूल आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान रहा है…लेकिन तेजी से बदलते दौर में अब इसके साथ एक और जरूरी चीज जुड़ गई है, वो है सड़क क्योंकि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य से यह कहा भी जाता है कि सड़कों के द्वारा विकास जन-जन तक पहुंचता है। ऐसे में सड़क पर पैदल चलने या फिर वाहन निकलने के दौरान सड़क सुरक्षा से यातायात नियमों का अनुपालन भी करना जरूरी है। संभवत: इन्हीं पहलुओं के मद्देनजर देश-प्रदेश में बडे ही व्यापक रूप से सड़क सुरक्षा माह मनाया जा रहा है। कहना गलत न होगा कि इस माह को पूरे देश में एक साथ मनाने के पीछे जनता की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सरकारी खजाने से निकल रहा। यानी सड़क सुरक्षा माह की महत्ता व उपयोगिता तभी सार्थक मानी जायेगी, जब समाज का हर वर्ग व हर समुदाय इसके प्रति जागरुक हो।
बहरहाल, देखा जाये तो अधिकांश जनता-जनार्दन तो सड़क सुरक्षा के महत्ता को समझ रही है लेकिन इसी बीच जनता के बीच से ही कुछ चुने हुए, निवर्तमान या फिर पूर्व ऐसे माननीय व जनप्रतिनिधि हैं…जो सार्वजनिक रूप से सड़क सुरक्षा का माखौल उड़ाते नजर आ रहें। राजधानी लखनऊ की प्रमुख सड़कों पर ऐसे जनप्रतिनिधियों के तमाम वाहन दिख जायेंगे, जिनकी गाड़ी के पीछे वाले शीशे पर उनका पद नाम, बैनर, संगठन या फिर पार्टी का नाम चस्पा है। ऐसे ही एक फॉर्च्यूनर गाड़ी तरूणमित्र टीम के कैमरे में कैद हो गई, जब वाहन नंबर से उसका डिटेल निकाला गया तो पता चला कि यह मौजूदा किसी विधायक के नाम है। देर शाम उनके मोबाइल नंबर पर कॉल किया गया तो उनके निजी सचिव कृष्णा ने उठाया। पीएस ने बताया कि नेता जी डिप्टी सीएम के यहां हैं, समय लगेगा। फिर उन्हें जब सारा प्रकरण बताया गया तो उन्होंने कहा कि यह मामला वो विधायक जी के संज्ञान में लायेंगे। अब देखने वाली बात यह है कि उक्त जनप्रतिनिधि आगे सड़क सुरक्षा माह की प्रासंगिकता के मद्देनजर क्या कदम उठाते हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों की मानें तो वैसे तो नियम यही है कि वाहन के नंबर प्लेट पर कुछ भी अलग से नहीं लिखा होना चाहिये, या फिर किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिये…मोटर वेहिकील एक्ट के तहत यह गलत है, जबकि शीशे पर कुछ भी लिखा होने पर किसी प्रकार के दंड का उल्लेख नहीं है। हालांकि धारा 177 के तहत केवल चालान किया जा सकता है। मगर विभागीय नियम से जुडे कुछ जानकारों की मानें तो सही है कि गाड़ी के शीशे पर कुछ भी लिखना गलत नहीं है, पर शीशे पर ब्लैक फिल्म चस्पा किया जाना गलत है तो फिर एक ही शीशे के लिये दो अलग-अलग नियम क्या व्यवहारिक है। वैसे सड़क सुरक्षा के जानकारों के अनुसार वाहन के पीछे वाले शीशे की उपयोगिता सड़क पर वाहन चलाने के समय काफी हद तक काम आती है…पीछे वाले शीशे से वाहन चालक को यह अंदाजा लगाना आसान हो जाता है कि कौन सी गाड़ी ओवरटेक कर रही, वगैरह, वगैरह।
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‘नंबर प्लेट पर कुछ अलग से नहीं लिखा होना चाहिये वो गलत है। वाहन के शीशे के लिये ऐसा कुछ एमवी एक्ट में उल्लिखित नहीं है। सड़क सुरक्षा माह चल रहा है, लोगों के बीच जागरूकता बढ़ रही है फिर भी आपने जो विषय बताया है वो विचारणीय बिंदु है। ’- अशोक कटारिया, परिवहन मंत्री स्वंतत्र प्रभार उप्र