(Coal)

घर में घुसकर बेकसूरों को भी पीटा

सीतामढ़ी।   ग्रामीणों की झड़प के बाद गांव वालों पर शामत आ गई। पुलिसिया कार्रवाई के बाद अधिकतर लोग गांव छोड़ गए हैं। जो हैं उनमें गम व गुस्से का माहौल है। दोस्तियां गांव के रहनेवाले पूर्व उप प्रमुख व मौजूदा पंचायत समिति सदस्य जयकिशोर साह ललित का कहना है कि पुलिस ने बेकसूरों के साथ भी बड़ी ज्यादती की है। कई थानों की पुलिस ने मिलकर रात में तांडव मचाया है।

लोगों को बड़ी बेरहमी से पीटा। महिलाओं व बच्चों को भी नहीं बख्शा। सबके साथ बेरहमी से पेश आई। सरकारी नौकरीपेशा लोगों को भी जबरन गांव से उठाकर ले गई। उनमें आधा दर्जन शिक्षक भी हैं। पुलिस के डर से गुमनामी की शर्त पर लोगों ने बताया कि दर्जन भर थानों की पुलिस ने देर रात गांव को घेर लिया और घरों में घुसकर बेरहमी से पिटाई करने लगी। किसी को बूट से मारा तो किसी को लाठी-डंडे व बंदूक के कुंदे से।

किसी के घर में मोटरसाइकिल क्षतिग्रस्त कर दी तो किसी का टेलीविजन फोड़ डाला, किसी की पेटी से रुपये-पैसे व गहने वगैरह निकाल लिए। कई लोग बीमार हैं और उनका इलाज चल रहा है। ललित का कहना है कि वह घटना के चश्मदीद हैं। आक्रोशित महिलाएं पुलिस के साथ कहासुनी कर रही थीं तो उनको समझाया गया। पुलिस पर रोड़ेबाजी नहीं की गई। पुलिस अपना पक्ष मजबूत करने के लिए हॉस्पिटल में भर्ती हो गई और इंज्यूरी रिपोर्ट बनवा ली। इस घटना की बाबत प्रमंडलीय आरक्षी महानिरीक्षक से बात की है। उन्हें घटना की पूरी जानकारी दी है।

See also  स्वास्थ्य कर्मी के घर की चोरी

पूर्व मुखिया प्रत्याशी आलोक पासवान को पकड़कर ले जाने से गुस्साए लोग

गांव वालों का कहना है कि पूर्व मुखिया प्रत्याशी आलोक कुमार पासवान को पुलिस गिरफ्तार करके ले जा रही थी। लोगों ने गिरफ्तारी का कारण पूछा तो पुलिसकर्मी कहने लगे वारंट है। डीएसपी से पूछने पर उन्होंने बताया कि पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं। इसी बात पर महिलाओं ने आलोक पासवान को ले जाने से पुलिस को रोक दिया। आलोक को पुलिस के चंगुल से छुड़ा लिया और बिना वारंट ले जाने के लिए गाली-गलौच करने लगीं।