विनाशकारी धारणाओं और जातीय मतभेदों से मानव ही मानव का शत्रु बन जाता है – प्रो. डाली

दरभंगा। युद्ध और नस्लवाद मानवता के लिए घातक हैं। सदियों से पूरी दुनिया में यह समस्या व्याप्त है। नस्ल, जातीयता, वर्ग धर्म आदि की श्रेष्ठता को लेकर ही भेदपूर्ण व्यवस्था को स्थापित किया जाता है। विनाशकारी धारणाओं और जातीय मतभेदों से मानव ही मानव का शत्रु बन जाता है। अभी चल रहे यूक्रेन – रुस युद्ध का मूल कारण भी नस्लीय भेदभाव ही हैं। वस्तुतः नस्ल, जाति और धर्म को लेकर विभेदकारी मानवीय सोच ही विश्व शांति की मार्ग का अवरोध है। यह बातें लनामिविवि की प्रतिकुलपति प्रो डाली सिंहा ने कही। विश्व शांति दिवस के अवसर पर डॉ. प्रभात दास फाउण्डेशन तथा स्नातकोत्तर अंग्रेजी विभाग के द्वारा आयोजित भाषण प्रतियोगिता सह संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि विश्व शांति केवल हिंसा समाप्त होने से संभव नहीं है। यह तभी साकार हो सकता है जब ऐसे समाज का निर्माण हो जहां सभी को बराबरी का अहसास हो।
आगे बढ़ने के समान अवसर हो। तभी शांतिपूर्ण दुनिया का निर्माण हो सकता हो। भारतीय संस्कृति में इसका बीज तत्व मौजूद है और रामराज्य की अवधारणा इसी से प्रेरित है। शांति का मार्ग अपनाने से ही मानवता की रक्षा भी संभव है। पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एके बच्चन नस्लवाद की शुरुआत काले – गोरे के भेद से हुआ है। इस भेदभाव से समाज और देश दोनों ही प्रभावित होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू राय ने कहा कि आधुनिक युग में रेसिज्म का दायरा बढ़ गया है और इसके कई प्रकार है। कहीं वर्ग भेद के चलते महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है तो कही धर्म, जाति, नस्ल के नाम पर भेदभाव किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विश्व शांति दिवस हर वर्ष 21 सितंबर को पूरे विश्व में मनाया जाता है। यह दिवस राष्ट्रों और लोगों के बीच अहिंसा, शांति और युद्धविराम के आदर्शों आदि पर अमल करने के लिए करती हैं। कार्यक्रम को मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश झा, डॉ. कुलानंद यादव तथा विमलेश चौधरी ने भी संबोधित किया। इससे पूर्व एन्ड रेसिज़म बिल्ड पीस विषय पर अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, जन्तु विज्ञान और राजनीतिक शास्त्र विभागों के विद्यार्थियों ने भाषण प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। जिसमें पीजी राजनीतिक शास्त्र विभाग के छात्र नीतीश नायक ने प्रथम और अंग्रेजी विभाग के कुमार हर्ष ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वहीं तृतीय स्थान के लिए अंग्रेजी विभाग के छात्र मणि कुमार पुष्कर और रवि कुमार को संयुक्त रूप से पुरस्कृत किया गया। वहीं दीपक कुमार, गुलनाज परवीन, भारती कुमारी, मोनिका चौधरी, मनोहर मिश्रा, कामना कुमारी, केशव मिश्रा, मयंक राज, साक्षी कुमारी तथा रोशनी को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। अतिथियों का स्वागत फाउण्डेशन के मुकेश कुमार झा ने पौधे देकर किया।
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