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                <title>अंतर्राष्ट्रीय - Tarun Mitra</title>
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                <description>अंतर्राष्ट्रीय RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वेनेजुएला में चमत्कारी बचाव: 8 दिन तक मलबे में फंसा रहा सुरक्षा गार्ड, जिंदा निकाला गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">कराकास। वेनेजुएला में 24 जून को आए दो विनाशकारी भूकंपों के आठ दिन बाद एक ऐसा चमत्कार देखने को मिला, जिसने पूरे देश में उम्मीद की नई किरण जगा दी। बचाव दल ने 43 वर्षीय सुरक्षा गार्ड हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस को एक ढही हुई इमारत के बेसमेंट से जीवित बाहर निकाल लिया। वह पिछले आठ दिनों से मलबे के नीचे फंसे हुए थे। लगातार चले कठिन बचाव अभियान के बाद गुरुवार तड़के उन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जब हर्नान को ऑक्सीजन मास्क लगाए स्ट्रेचर पर मलबे से बाहर लाया गया, तो वहां मौजूद लोगों और विभिन्न देशों से पहुंचे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/miraculous-rescue-in-venezuela-security-guard-trapped-under-debris-for/article-150785"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/3july12345.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कराकास। वेनेजुएला में 24 जून को आए दो विनाशकारी भूकंपों के आठ दिन बाद एक ऐसा चमत्कार देखने को मिला, जिसने पूरे देश में उम्मीद की नई किरण जगा दी। बचाव दल ने 43 वर्षीय सुरक्षा गार्ड हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस को एक ढही हुई इमारत के बेसमेंट से जीवित बाहर निकाल लिया। वह पिछले आठ दिनों से मलबे के नीचे फंसे हुए थे। लगातार चले कठिन बचाव अभियान के बाद गुरुवार तड़के उन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जब हर्नान को ऑक्सीजन मास्क लगाए स्ट्रेचर पर मलबे से बाहर लाया गया, तो वहां मौजूद लोगों और विभिन्न देशों से पहुंचे राहतकर्मियों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। कई बचावकर्मी भावुक होकर एक-दूसरे के गले मिले और इस सफल अभियान को किसी चमत्कार से कम नहीं बताया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सुरक्षा केबिन बनी जीवन रक्षक</h2>
<p style="text-align:justify;">हर्नान समुद्र तटीय शहर ला गुआइरा के गैलेरियास प्लाया ग्रांडे शॉपिंग सेंटर में नाइट शिफ्ट के सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते थे। भूकंप के समय वह अपनी सुरक्षा केबिन में मौजूद थे। तेज झटकों से पूरी इमारत धराशायी हो गई, लेकिन उनकी छोटी केबिन पूरी तरह नहीं टूटी। इसी कारण वहां हवा के लिए पर्याप्त जगह बची रही और वह इतने दिनों तक जीवित रह सके।</p>
<h2 style="text-align:justify;">संकरे रास्ते से पहुंचाया गया पानी और भोजन</h2>
<p style="text-align:justify;">राहतकर्मियों ने सप्ताहांत में सबसे पहले हर्नान से संपर्क स्थापित किया। इसके बाद मलबे में बने एक बेहद संकरे रास्ते से उन्हें लगातार पानी और तरल भोजन पहुंचाया जाता रहा। मलबे के खिसकने का खतरा, लगातार बारिश और बार-बार आ रहे झटकों के बावजूद राहत दलों ने बेहद सावधानी से सुरंग बनाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।</p>
<p style="text-align:justify;">कोस्टा रिका रेड क्रॉस की बचावकर्मी मिन्यार कोलाडो ने बताया कि जब पहली बार उनकी हर्नान से बातचीत हुई तो उन्होंने कहा था कि उनकी पत्नी को यह न बताया जाए कि वह जीवित हैं, क्योंकि उन्हें डर था कि शायद वे बच नहीं पाएंगे। इसके बावजूद राहतकर्मियों ने उम्मीद नहीं छोड़ी और आखिरकार उन्हें सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पत्नी बोलीं- अंधेरे में उम्मीद की रोशनी मिली</h2>
<p style="text-align:justify;">हर्नान की पत्नी गुस्बिमार गोंजालेज ने कहा कि कई दिनों तक उन्हें लगा था कि उनके पति अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन जैसे ही यह खबर मिली कि राहतकर्मियों ने उनसे संपर्क कर लिया है, पूरे परिवार में उम्मीद लौट आई। दंपति के दो छोटे बच्चे हैं, जिनकी उम्र 8 और 10 वर्ष है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कई देशों की टीमों ने मिलकर चलाया अभियान</h2>
<p style="text-align:justify;">इस जटिल बचाव अभियान में वेनेजुएला के अलावा चिली, कोस्टा रिका, अमेरिका, पुर्तगाल, मैक्सिको और अल सल्वाडोर के विशेषज्ञ राहतकर्मियों ने हिस्सा लिया। टेलीस्कोप कैमरों और आधुनिक तकनीक की मदद से लगातार हर्नान की स्थिति पर नजर रखी गई और फिर सुरक्षित तरीके से उन्हें बाहर निकालने की रणनीति बनाई गई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भूकंप से भारी तबाही, हजारों लोग अब भी प्रभावित</h2>
<p style="text-align:justify;">हालांकि हर्नान का जीवित बच जाना राहत की खबर है, लेकिन पूरे वेनेजुएला में हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। 24 जून को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने उत्तरी वेनेजुएला में व्यापक तबाही मचाई। सबसे अधिक नुकसान ला गुआइरा क्षेत्र में हुआ, जहां हजारों इमारतें ढह गईं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 2,295 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 11 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं और हजारों परिवार राहत शिविरों या खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। मलबे से लगातार शव मिलने के कारण कई इलाकों में स्वास्थ्य संकट का खतरा भी बढ़ गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राहत कार्य को लेकर सरकार पर उठे सवाल</h2>
<p style="text-align:justify;">भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य को लेकर कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की सरकार की आलोचना भी हो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय राहत दलों ने सरकारी एजेंसियों की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से काम किया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं अमेरिका ने कहा है कि राहत अभियान स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में चलाया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, बचाव और राहत कार्य में सहयोग के लिए करीब 900 अमेरिकी सैन्यकर्मी भी तैनात किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद राहत, पुनर्वास, स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली और प्रभावित लोगों को सामान्य जीवन में लौटाना अब भी वेनेजुएला के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 07:33:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shishir Patel]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप ने अपने परिवार के कारोबार का बचाव किया, कहा- बच्चों करना पड़ता है जांच का सामना</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने परिवार के कारोबार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनके राष्ट्रपति बनने से पहले से ही बच्चे व्यापार के क्षेत्र में हैं। उन्हें कड़ी जांच का सामना करना पड़ता है। ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति का पद इतना ताकतवर होता है कि उनके बच्चे जो कुछ भी करते हैं, उसे हितों का टकराव माना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति ट्रंप की यह टिप्पणी मंगलवार को जारी उनकी 2025 की वार्षिक वित्तीय प्रकटीकरण रिपोर्ट (फाइनेंशियल डिस्क्लोजर रिपोर्ट) के बाद आई है। इस रिपोर्ट से सार्वजनिक हुआ कि व्हाइट हाउस में वापसी के पहले साल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/donald-trump-defends-his-familys-business-says-children-have-to/article-150782"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/3july1234.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने परिवार के कारोबार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनके राष्ट्रपति बनने से पहले से ही बच्चे व्यापार के क्षेत्र में हैं। उन्हें कड़ी जांच का सामना करना पड़ता है। ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति का पद इतना ताकतवर होता है कि उनके बच्चे जो कुछ भी करते हैं, उसे हितों का टकराव माना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति ट्रंप की यह टिप्पणी मंगलवार को जारी उनकी 2025 की वार्षिक वित्तीय प्रकटीकरण रिपोर्ट (फाइनेंशियल डिस्क्लोजर रिपोर्ट) के बाद आई है। इस रिपोर्ट से सार्वजनिक हुआ कि व्हाइट हाउस में वापसी के पहले साल 2025 में उन्होंने अपने परिवार से जुड़े क्रिप्टोकरेंसी वेंचर से 580 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाए।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में सीएनबीसी के साथ साक्षात्कार में इस सबके अलावा अन्य मुद्दों पर पर भी बातचीत की।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा, "राष्ट्रपति की नीतियां अर्थव्यवस्था के लगभग हर हिस्से पर असर डालती हैं। बच्चों की अपनी जिंदगी है। क्रिप्टो वेंचर में कुछ भी गैरकानूनी या गलत नहीं हुआ।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने हितों के टकराव से जुड़े संघीय कानूनों का जिक्र भी किया। ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के लिए उन फैसलों से खुद को अलग करना जरूरी नहीं है जो उनके वित्तीय हितों पर असर डाल सकते हैं। ट्रंप ने इसके अलावा उच्चतम न्यायालय, अर्थव्यवस्था, बाजार, ईरान, फेडरल रिजर्व और 2026 के मध्यावधि चुनाव जैसे मुद्दों पर भी बातचीत की।</p>
<p style="text-align:justify;">उनसे उनके पसंदीदा अमेरिकी राष्ट्रपति का नाम बताने या अमेरिकी इतिहास के किसी खास दौर को अहम मानने के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा, "हमारे यहां कुछ बहुत बुरे राष्ट्रपति भी रहे हैं।" इसके बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले का जिक्र किया। इस फैसले को राष्ट्रपति पद को मजबूत करने वाला माना गया है, क्योंकि इसने कमांडर-इन-चीफ को उन स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के सदस्यों को हटाने की इजाजत दी जो एग्जीक्यूटिव ब्रांच के तहत काम करती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने कहा, " इस फैसले ने राष्ट्रपति को बहुत अधिक ताकत दी, लेकिन यह पद हमेशा से मजबूत रहा है। सिर्फ मेरे समय से ही नहीं। इसे सबसे ताकतवर ओहदा माना जाता है। दूसरे देशों के राष्ट्रपतियों के पद को उतना ताकतवर नहीं माना जाता।" उन्होंने कहा, " एक देश के तौर पर हमारी फिर से इज्जत हो रही है। शायद पहले कभी ऐसी इज्जत नहीं मिली। डेढ़ साल पहले, लोग हम पर हंसते थे।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 07:22:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shishir Patel]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हंगरी ने भगोड़े पोलिश पूर्व मंत्री की शरणार्थी मान्यता रद्द की</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">वारसॉ। पोलैंड सरकार ने गुरुवार को बताया कि हंगरी की नई सरकार ने भगोड़े पूर्व न्याय मंत्री ज्बिग्न्येव जियोब्रो, उनके पूर्व उपमंत्री मार्सिन रोमानोव्स्की और जियोब्रो की पत्नी पत्रिच्या कोतेत्स्का-जियोब्रो का शरणार्थी दर्जा रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद तीनों अब उन विशेष यात्रा दस्तावेजों का उपयोग नहीं कर सकेंगे, जिनकी मदद से वे हंगरी छोड़कर विदेश गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि हंगरी ने न केवल तीनों की शरणार्थी मान्यता समाप्त की है, बल्कि उनके यात्रा दस्तावेज भी अमान्य कर दिए हैं। उन्होंने कहा, "न्याय की प्रक्रिया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/hungary-revokes-refugee-recognition-of-fugitive-polish-former-minister/article-150778"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/3july1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वारसॉ। पोलैंड सरकार ने गुरुवार को बताया कि हंगरी की नई सरकार ने भगोड़े पूर्व न्याय मंत्री ज्बिग्न्येव जियोब्रो, उनके पूर्व उपमंत्री मार्सिन रोमानोव्स्की और जियोब्रो की पत्नी पत्रिच्या कोतेत्स्का-जियोब्रो का शरणार्थी दर्जा रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद तीनों अब उन विशेष यात्रा दस्तावेजों का उपयोग नहीं कर सकेंगे, जिनकी मदद से वे हंगरी छोड़कर विदेश गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि हंगरी ने न केवल तीनों की शरणार्थी मान्यता समाप्त की है, बल्कि उनके यात्रा दस्तावेज भी अमान्य कर दिए हैं। उन्होंने कहा, "न्याय की प्रक्रिया धीमी हो सकती है, लेकिन अंततः न्याय होता है।"</p>
<p style="text-align:justify;">जियोब्रो और रोमानोव्स्की पर सरकारी अपराध पीड़ित सहायता कोष के धन के कथित राजनीतिक दुरुपयोग सहित सत्ता के दुरुपयोग के कई आरोप हैं। दोनों नेता इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा करते हैं कि वे राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हैं और वर्तमान प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के करीबी लोगों के खिलाफ की गई अपनी जांच के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों नेता 2023 में सत्ता से बाहर हुई लॉ एंड जस्टिस सरकार में मंत्री रहे थे। पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान की सरकार ने उन्हें हंगरी में शरण दी थी। हालांकि नई सरकार के गठन के बाद पोलैंड ने लगातार दबाव बनाकर उनकी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समाप्त करने की मांग की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 07:09:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shishir Patel]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खामेनेई के भव्य जनाजे के पीछे क्या है ईरान का महाप्लान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>तेहरान : ईरान अपने पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा है। यह ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार होगा, जो 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलेगा। इस कार्यक्रम में ईरान और इराक के पांच शहरों को कवर करते हुए छह दिवसीय भव्य शव यात्रा आयोजित की जा रही है। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल के हमले में अयातुल्ला अली खामनेई समेत 40 लोग मारे गए थे। इनमें खामेनेई की बेटी और दामाद भी शामिल थे।</p>
<p>ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से पूरी दुनिया तीसरे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/what-is-irans-grand-plan-behind-khameneis-grand-funeral/article-150769"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/lkmjnhg.jpg" alt=""></a><br /><p>तेहरान : ईरान अपने पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा है। यह ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार होगा, जो 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलेगा। इस कार्यक्रम में ईरान और इराक के पांच शहरों को कवर करते हुए छह दिवसीय भव्य शव यात्रा आयोजित की जा रही है। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल के हमले में अयातुल्ला अली खामनेई समेत 40 लोग मारे गए थे। इनमें खामेनेई की बेटी और दामाद भी शामिल थे।</p>
<p>ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से पूरी दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर पहुंच गई थी। ईरान ने अपने सभी पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। 108 दिन के बाद लड़ाई थमी। इस दौरान सैकड़ों लोग मारे गए। इनमें बड़ी संख्या ईरान के स्कूल में मारी गई बच्चियों की थी।</p>
<p>4 महीने बाद खामेनेई का अंतिम संस्कार<br />4 महीने बाद हो रहा खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 महीने तक नहीं किया गया। इसके पीछे की वजह रही युद्ध जैसी परिस्थितियां और सुरक्षा चिंताएं। उनके पार्थिव शरीर को कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखा गया था। अब, ईरान अंतिम यात्रा की एक ऐसी तैयारी कर रहा है, जो इतिहास की किताबों में दर्ज होने जा रही है। 4 जुलाई से 9 जुलाई तक पूरे 6 दिन यह अंतिम संस्कार चलेगा। इस दौरान 2 देश के 5 शहरों से उनका जनाजा निकाला जाएगा। </p>
<p>खामेनेई के अंतिम संस्कार में क्या होगा?<br />ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार कोई आम शोक सभा नहीं है। यह 6 दिनों तक चलने वाली एक भव्य और विशाल शव यात्रा है। यह सफर 4 जुलाई से शुरू हो रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह यात्रा सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। इसमें पड़ोसी देश इराक को भी शामिल किया गया है। कुल 5 शहरों से होते हुए यह जनाजा गुजरेगा, जिसमें शिया समुदाय के सबसे पवित्र स्थल और ईरान की राजधानी तेहरान शामिल हैं। इसके बाद खामनेई को 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस दौरान लाखों-करोड़ों लोगों की भीड़ जुटेगी। </p>
<p>सुरक्षा की पूरी तैयारी<br />खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए सुरक्षा ऐसी की गई है कि परिंदा भी पर न मार सके। ईरान और इराक, दोनों देशों की सरकारें इस कदर हाई अलर्ट पर हैं कि इस रूट की सुरक्षा में लाखों सैनिकों को तैनात किया गया है। 4 जुलाई से 9 जुलाई तक, जिन 5 शहरों से यह शव यात्रा गुजरेगी, उनके ऊपर की हवाई सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है। किसी भी कमर्शियल फ्लाइट को वहां से उड़ने की इजाजत नहीं होगी। ईरान ने अपने सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम्स को तेहरान और इराक की सीमाओं पर 'हाई अलर्ट' पर डाल दिया है। ईरान के फाइटर जेट्स 24 घंटे आसमान में गश्त लगा रहे हैं। यह यात्रा इराक के शहरों से भी गुजरेगी, इसलिए ईरान की 'कुद्स फोर्स' और इराक की 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस' ने मिलकर एक जॉइंट सिक्योरिटी घेरा तैयार किया है, ताकि अमेरिका या इजरायल दोबारा किसी ड्रोन हमले की हिम्मत न कर सकें।</p>
<p>ईरान में दुनिया का सबसे बड़ा डिप्लोमैटिक और मिलिट्री जमावड़ा<br />खामनेई के जनाजे में शामिल होने के लिए दुनिया भर से लोगों को आमंत्रित किया गया है। यह आयोजन सिर्फ एक देश का शोक नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा डिप्लोमैटिक और मिलिट्री जमावड़ा बनने जा रहा है। ईरान ने इस ऐतिहासिक अंतिम संस्कार के लिए दुनिया भर के दिग्गज नेताओं को न्यौता भेजा है। इसमें रूस और चीन की मौजूदगी की भी खबरें हैं। खुफिया सूत्रों की मानें तो रूस और चीन के हाई-लेवल डेलिगेशन और सुरक्षा अधिकारी इस दौरान तेहरान में मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही लेबनान से हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर्स, यमन से हूती विद्रोही, और गाजा व इराक के मिलिशिया गुटों के नेता इस जनाजे में कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। यह दुनिया को दिखाने की कोशिश है कि खामेनेई के जाने के बाद भी उनका नेटवर्क कमजोर नहीं हुआ है। साथ ही पाकिस्तान, तुर्की और कई मध्य-एशियाई देशों के राजनयिकों को भी इस 6 दिवसीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विशेष आमंत्रण भेजा गया है। </p>
<p>भव्य शव यात्रा का मकसद क्या?<br />विशेषज्ञों के अनुसार ईरान इस भव्य शव यात्रा के जरिए कई मैसेज देना चाहता है। पहला मैसेज- अमेरिका और इजरायल को यह दिखाना कि खामेनेई के जाने के बाद भी ईरान टूटा नहीं है, बल्कि एकजुट है और दूसरा मैसेज अपने समर्थकों और पूरी शिया दुनिया को एक मंच पर लाना, ताकि आने वाले समय में एक बड़े बदले की जमीन तैयार की जा सके। 4 जुलाई से 9 जुलाई के बीच होने वाला यह अंतिम संस्कार सिर्फ एक विदाई नहीं है, बल्कि मिडिल ईस्ट की पॉलिटिक्स में आने वाले एक नए तूफान का संकेत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 05:31:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-जापान साझेदारी का नया रणनीतिक युग शुरू, एआई रक्षा व ऊर्जा सहयोग पर सहमति </title>
                                    <description><![CDATA[सेमीकंडक्टर, क्वांटम, ग्रीन एनर्जी, रक्षा और एआई में साझेदारी को नई रफ्तार मिलेगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/new-strategic-era-of-india-japan-partnership-begins-agreement-on-ai/article-150759"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/modi-(1).jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>भारत में लगेंगे 1000 बायोगैस संयंत्र, जापानी निवेश और तकनीक से गांवों को मिलेगा नया बल</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत और जापान ने गुरुवार को अपने संबंधों को नई रणनीतिक ऊंचाई देते हुए आर्थिक सुरक्षा, अत्याधुनिक तकनीक, रक्षा, ऊर्जा और निवेश के क्षेत्र में व्यापक सहयोग का रोडमैप तैयार किया। नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने ऐसे कई अहम निर्णयों पर मुहर लगाई, जिनका असर आने वाले वर्षों में दोनों देशों की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और तकनीकी क्षमता पर दिखाई देगा। सबसे बड़ा फैसला अगले दस वर्षों में 100 खरब येन के निवेश लक्ष्य, सेमीकंडक्टर और क्वांटम जैसी रणनीतिक तकनीकों में सहयोग तथा भारत में एक हजार बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की संयुक्त पहल को लेकर हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">करीब दो घंटे चली द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा के लिए संयुक्त रोडमैप को मंजूरी दी। इसके तहत सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैटेरियल और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित, मजबूत और लचीला बनाया जाएगा। दोनों नेताओं ने माना कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भरोसेमंद साझेदारियों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक के दौरान भूगर्भीय खनिजों की खोज, फार्मास्युटिकल्स एवं मेडिकल उपकरण, बैटरी निर्माण तथा बायोगैस एवं जैविक खाद संयंत्रों की स्थापना से जुड़े चार महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया और रक्षा क्षेत्र में पहली संयुक्त विकास परियोजना पर भी सहमति बनी। यह फैसला दोनों देशों के रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और जापान की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत आपसी विश्वास है। उन्होंने अगले दस वर्षों में जापान से 100 खरब येन के निवेश तथा भारत में कार्यरत जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जापान की तकनीकी क्षमता और भारत की सॉफ्टवेयर शक्ति का मेल वैश्विक एआई विकास को नई गति देगा। उन्होंने यह भी कहा कि बैटरी, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग स्वच्छ ऊर्जा भविष्य को मजबूत करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दोनों देशों ने भारत-जापान बायोगैस पहल की घोषणा की। इसके तहत भारत में एक हजार बायोगैस और जैविक खाद संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और गोवर्धन जैसी योजनाओं को नई गति मिलेगी। साथ ही तेल आपूर्ति से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ऊर्जा रेजिलिएंस पर भी सहयोग बढ़ाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस शिखर सम्मेलन का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया, जब प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची को सार्वजनिक रूप से ‘मेरी छोटी बहन’ कहकर संबोधित किया। जवाब में ताकाइची ने भी मोदी को ‘मेरे बड़े भाई’ कहते हुए दोनों देशों के रिश्तों को भाई-बहन के विश्वास और आत्मीयता का प्रतीक बताया। दोनों नेताओं ने कहा कि यह व्यक्तिगत विश्वास दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जापानी प्रधानमंत्री ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, नियम-आधारित व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और आर्थिक सुरक्षा को भविष्य की साझेदारी का आधार बताया। उन्होंने वर्ष के अंत तक अगली भारत-जापान '2+2' बैठक आयोजित करने, हिंद महासागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास बढ़ाने तथा 'मेक इन इंडिया' के तहत रक्षा उपकरणों में सहयोग मजबूत करने की घोषणा की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरे के दौरान दोनों देशों की कंपनियों के बीच लगभग 120 व्यावसायिक समझौतों की घोषणा हुई है, जिनसे अरबों डॉलर का नया निवेश भारत आएगा। शिखर सम्मेलन ने स्पष्ट संकेत दिया कि भारत और जापान अब केवल आर्थिक साझेदार नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोगी के रूप में आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 21:07:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Harshit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव पर भारत करेगा कड़ा विरोध, यूएसटीआर में रखेगा अपना पक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन/नई दिल्ली।</strong> भारत अगले सप्ताह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की सेक्शन-301 समिति के समक्ष प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ के खिलाफ मजबूत पक्ष रखेगा। भारत का कहना है कि जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े अमेरिकी निष्कर्ष पर्याप्त साक्ष्यों पर आधारित नहीं हैं और इनका कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। 8 जुलाई को होने वाली सुनवाई में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों के साथ उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी भारत का पक्ष रखेंगे। सरकार का तर्क है कि देश में जबरन श्रम रोकने के लिए संविधान, श्रम कानूनों और नियामकीय ढांचे के तहत प्रभावी व्यवस्था पहले से लागू</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/india-will-strongly-oppose-american-tariff-proposal-and-will-present/article-150715"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/ूीी.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन/नई दिल्ली।</strong> भारत अगले सप्ताह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की सेक्शन-301 समिति के समक्ष प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ के खिलाफ मजबूत पक्ष रखेगा। भारत का कहना है कि जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े अमेरिकी निष्कर्ष पर्याप्त साक्ष्यों पर आधारित नहीं हैं और इनका कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। 8 जुलाई को होने वाली सुनवाई में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों के साथ उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी भारत का पक्ष रखेंगे। सरकार का तर्क है कि देश में जबरन श्रम रोकने के लिए संविधान, श्रम कानूनों और नियामकीय ढांचे के तहत प्रभावी व्यवस्था पहले से लागू है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव अनुचित और व्यापारिक संबंधों के प्रतिकूल है।</p>
<p style="text-align:justify;">कन्फेडरेशन आॅफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) ने कहा कि भारत का श्रम कानून ढांचा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। संगठन ने संविधान के अनुच्छेद-23, बंधुआ मजदूरी उन्मूलन कानून, बाल श्रम निषेध कानून तथा नए श्रम संहिताओं का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत ने मजबूर श्रम के खिलाफ मजबूत कानूनी सुरक्षा विकसित की है।</p>
<p style="text-align:justify;">फेडरेशन आॅफ इंडियन चैंबर्स आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफआईसीसीआई) ने भी प्रस्तावित शुल्क का विरोध करते हुए कहा कि भारतीय निर्यातक पहले से ट्रेसबिलिटी, स्वतंत्र आॅडिट और जिम्मेदार सोर्सिंग जैसे सख्त अनुपालन मानकों का पालन करते हैं। अतिरिक्त टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं की लागत बढ़ेगी तथा दोनों देशों की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) और एपीईडीए भी अलग-अलग क्षेत्रों का पक्ष रखेंगे। उनका कहना है कि भारतीय ऑटो कंपोनेंट और कृषि निर्यात संगठित एवं नियमों के अनुरूप संचालित होते हैं, इसलिए इन्हें अतिरिक्त शुल्क से छूट मिलनी चाहिए। भारत का मानना है कि दंडात्मक टैरिफ लगाने के बजाय दोनों देशों को व्यापार नीति मंच के माध्यम से सहयोग और अनुपालन आधारित समाधान तलाशना चाहिए, जिससे भारत-अमेरिका की बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नुकसान न पहुंचे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राष्ट्रीय</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 19:09:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Harshit]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीसरे दिन भी गिरे कच्चे तेल के दाम, अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति से बाजार को राहत</title>
                                    <description><![CDATA[कतर में हुई अप्रत्यक्ष बातचीत के बाद तेल की कीमतों में करीब 1% की गिरावट, ओपेक+ की बैठक पर भी बाजार की नजर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/crude-oil-prices-fell-for-the-third-day-relief-to/article-150656"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-02/crude-oil.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली: </strong>अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार को लगातार तीसरे दिन कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) करीब 1.1% गिरकर 70.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (West Texas Intermediate- WTI) 1.2% टूटकर 67.74 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कतर में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अप्रत्यक्ष वार्ता में सकारात्मक प्रगति की खबर के बाद निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव बना।</p>
<p style="text-align:justify;">कतर के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से जुड़े मुद्दों पर बातचीत में सकारात्मक प्रगति हुई है। जून में हुए युद्धविराम से जुड़े समझौते के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। हालांकि, दोनों देशों के बीच स्थायी शांति को लेकर अभी कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है और वैश्विक कच्चे तेल की करीब 20 फीसदी आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्लेषकों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आपूर्ति सामान्य रहने की उम्मीद बढ़ने से बाजार में अतिरिक्त सप्लाई की आशंका मजबूत हुई है। इसके अलावा ओपेक+ (Organization of the Petroleum Exporting Countries Plus- OPEC+) की रविवार को होने वाली बैठक में अगस्त से उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने पर भी सहमति बन सकती है। यदि ऐसा होता है तो बाजार में तेल की उपलब्धता और बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, वैश्विक निवेश बैंक यूबीएस (UBS) ने भी ब्रेंट क्रूड की कीमतों के अपने अनुमान में कटौती की है। बैंक का कहना है कि अमेरिका-ईरान के बीच बने समझौते और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आवाजाही बढ़ने के कारण इस साल की दूसरी छमाही में कीमतें पहले के अनुमान से कम रह सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, बैंक ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए आने वाले समय में कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी। वहीं, कतर ने बताया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद 9 जुलाई के बाद अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का अगला दौर होने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 11:00:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Gargi Vishwakarma]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल: ईंधन कीमतों में भारी गिरावट, गैस सिलेंडर से लेकर विमान ईंधन तक हुआ सस्ता </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>काठमांडू। </strong>नेपाल ऑयल निगम ने पेट्रोलियम पदार्थों के खुदरा मूल्य में भारी कटौती की है। निगम के अनुसार नई कीमतें बुधवार देर रात १२ बजे से लागू हो गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके तहत पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर 20 रुपये, डीजल और मिट्टी तेल में 30 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। वहीं, घरेलू हवाई ईंधन में 40 रुपये और अंतरराष्ट्रीय हवाई ईंधन के लिए काठमांडू में प्रति किलोलीटर 265 अमेरिकी डॉलर की कटौती की गई है।<br /><br />इसके अलावा खाना पकाने वाली गैस भी प्रति सिलेंडर 100 रुपये सस्ती कर दी गई है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हवाई ईंधन के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/nepal-fuel-prices-fall-drastically-from-gas-cylinder-to-aircraft/article-150655"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/b5ccf3e2cc59ac95b71ef102974d3c21_53985088.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>काठमांडू। </strong>नेपाल ऑयल निगम ने पेट्रोलियम पदार्थों के खुदरा मूल्य में भारी कटौती की है। निगम के अनुसार नई कीमतें बुधवार देर रात १२ बजे से लागू हो गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके तहत पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर 20 रुपये, डीजल और मिट्टी तेल में 30 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। वहीं, घरेलू हवाई ईंधन में 40 रुपये और अंतरराष्ट्रीय हवाई ईंधन के लिए काठमांडू में प्रति किलोलीटर 265 अमेरिकी डॉलर की कटौती की गई है।<br /><br />इसके अलावा खाना पकाने वाली गैस भी प्रति सिलेंडर 100 रुपये सस्ती कर दी गई है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय हवाई ईंधन के लिए पोखरा और भैरहवा में बिक्री मूल्य ब्रेक-ईवन पॉइंट पर ही कायम रखा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">नई दरों के अनुसार अब उपभोक्ताओं को पेट्रोल के लिए 197 रुपये प्रति लीटर चुकाने होंगे, जबकि डीजल और मिट्टी तेल 195 रुपये प्रति लीटर मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह 14.2 किलोग्राम एलपी गैस सिलेंडर की कीमत 2060 रुपये और 7.1 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत 1030 रुपयेतय की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 10:52:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mahi Khan]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रूस के भीषण हमले से दहला यूक्रेन,  मिसाइल-ड्रोन अटैक से कई इमारतें तबाह, 2 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>कीव (यूक्रेन)। </strong>यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की की देश में रूस के बड़े हमले की चेतावनी के कुछ घंटे बाद गुरुवार तड़के राजधानी कीव और अन्य जगहों पर जोरदार धमाके हुए। इन धमाकों से पूरा देश दहल गया।</p>
<p>सरकारी अधिकारियों के अनुसार, राजधानी कीव में कई जगह आग लग गई। धमाकों की चपेट में आए दो लोगों की जान चली गई। जेलेंस्की ने एक खुफिया रिपोर्ट के आधार पर देशवासियों को चेताया था कि रूस रात को बड़े हमले की योजना बना रहा है।<br /><br />द कीव इंडिपेंडेंट, कीव पोस्ट और अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/ukraine-shocked-by-russias-fierce-attack-many-buildings-destroyed-due/article-150638"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/88d04a2d9e429ea0669d3437c582c962_1040120432.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कीव (यूक्रेन)। </strong>यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की की देश में रूस के बड़े हमले की चेतावनी के कुछ घंटे बाद गुरुवार तड़के राजधानी कीव और अन्य जगहों पर जोरदार धमाके हुए। इन धमाकों से पूरा देश दहल गया।</p>
<p>सरकारी अधिकारियों के अनुसार, राजधानी कीव में कई जगह आग लग गई। धमाकों की चपेट में आए दो लोगों की जान चली गई। जेलेंस्की ने एक खुफिया रिपोर्ट के आधार पर देशवासियों को चेताया था कि रूस रात को बड़े हमले की योजना बना रहा है।<br /><br />द कीव इंडिपेंडेंट, कीव पोस्ट और अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात ज्यादा हलचल नहीं हुई। सवेरा होने से पहले कीव में कई धमाके हुए।</p>
<p>कीव के अधिकारियों ने बताया कि रूस ने बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इससे रिहायशी इमारतों को नुकसान पहुंचा और उनमें आग लग गई। हमले में कम से कम दो व्यक्तियों की मौत हो गई।<br /><br />कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि हमलों के बाद कम से कम 11 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। क्लिट्स्को ने कहा कि बचावकर्मी नौ मंजिला इमारत के मलबे वाली जगह पर पहुंचे और अंदर फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि एम्बुलेंस सब स्टेशन पर हमले में मेडिकल कर्मचारी घायल हुए हैं।<br /><br />कीव शहर के सैन्य प्रशासन प्रमुख तैमूर तकाचेंको के अनुसार, इस हमले में दो लोग मारे गए और कम से कम 16 अन्य घायल हो गए। इस हमले में आवासीय इमारतें भी नष्ट हो गईं।</p>
<p>मध्य कीव में एक होटल क्षतिग्रस्त हो गया और बहुमंजिला इमारतें आग की लपटों में घिर गईं। स्थानीय समयानुसार सुबह 5 बजे तक अधिकारियों ने कम से कम 28 स्थानों पर नुकसान दर्ज किया ।<br /><br />यूक्रेन के कई क्षेत्रों में हवाई अलर्ट जारी किया गया। दक्षिणी शहर जापोरिजिया और निप्रोपेत्रोव्स्क ओब्लास्ट के पावलोहराड में विस्फोट होने की सूचना है। पूर्वोत्तर यूक्रेन के सूमी और खार्किव में भी धमाके हुए हैं।</p>
<p>तकाचेंको ने कहा, "आने वाले दिनों में और हमले होने की भी संभावना है।" विस्फोट शुरू होने से कुछ ही समय पहले यूक्रेन की वायुसेना ने चेतावनी दी कि रूसी ड्रोन के समूह कीव और मायकोलाइव, कोनोटॉप और खेरसोन सहित अन्य शहरों की ओर बढ़ रहे हैं।<br /><br />तकाचेंको ने रात 12:45 बजे कीव पर बैलिस्टिक मिसाइल के खतरे की चेतावनी दी। वायुसेना ने भी लगभग आधे घंटे बाद ऐसी ही चेतावनी जारी की। ओपन-सोर्स मॉनिटरिंग चैनलों ने बताया कि रूस ने 10 बॉम्बर विमान तैनात किए।</p>
<p>रात करीब दो बजे जोरदार धमाकों से कीव और अन्य शहर दहल गए। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि राजधानी पर हुए हमले में शहर भर की रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया गया और आम नागरिक व बचावकर्मी घायल हुए।<br /><br />कीव के व्यस्त केंद्रीय इलाके पर भारी नुकसान हुआ है। यहां रिहायशी इलाकों के साथ-साथ संग्रहालय और विश्वविद्यालय भी हैं। तकाचेंको ने बताया कि शेवचेंकिव्स्की जिले में एक अपार्टमेंट बिल्डिंग तबाह हो गई।</p>
<p>पेचेर्स्की जिले में हमलों के कारण रिहायशी इमारतों के पास दो जगहों पर आग लगने की भी सूचना मिली है। सोलोमियांस्की जिले में एक प्रशासनिक इमारत के पास आग लग गई। होलोसीव्स्की जिले में एक और बहुमंजिला इमारत क्षतिग्रस्त हो गई।<br /><br />जेलेंस्की ने बुधवार दिन में लोगों से सावधान रहने और हवाई हमले के सायरन पर ध्यान देने की अपील की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के खिलाफ बड़े हमले की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p>जेलेंस्की ने एक्स पर कहा, "आज रात हमें ठीक इसी खतरे का सामना करना पड़ रहा है।" अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय समय के अनुसार रात 8 बजे से सायरन बजने शुरू हो गए। सायरन सुनकर लोग मेट्रो स्टेशन पहुंच गए।<br /><br />यूक्रेन ने पिछले महीने रूस के खिलाफ अभूतपूर्व ड्रोन अभियान शुरू किया है। इसमें लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के जरिए ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है।जेलेंस्की ने इसे मॉस्को को युद्ध खत्म करने के लिए मजबूर करने की एक अहम रणनीति बताया है।</p>
<p>पिछले हफ्ते एक ही रात में रूस ने 12 क्षेत्रों में 660 ड्रोन को रोकने की सूचना दी। इससे पहले जून में कीव के बीचों-बीच हुए रूसी हमले में यूक्रेन के एक प्रमुख मठ परिसर यूनेस्को की सूची में शामिल 'कीव पेचेर्स्क लावरा' में आग लग गई थी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 08:37:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Mahi Khan]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वेनेजुएला में भूकंप का कहर, मृतकों की संख्या 2,295 पहुंची; UN ने जताई 10 हजार तक मौतों की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>काराकास (वेनेजुएला)। वेनेजुएला में दिन गुजरने के साथ-साथ भूकंप त्रासदी में हताहतों की बढ़ती संख्या डरावनी होती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने तो यह आंकड़ा 10,000 तक पहुंचने की आशंका जताई है। नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज के अनुसार, वेनेजुएला में आए दोहरे भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,295 हो गई है। रोड्रिगेज ने सरकारी टेलीविजन पर कहा कि हजारों अन्य लोग घायल भी हुए हैं।</p>
<p>स्काई न्यूज की रिपोर्ट में जॉर्ज रोड्रिगेज और संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय समन्वयक जियानलुका रैम्पोला डेल टिंडारो के हवाले से यह जानकारी दी गई। वेनेजुएला में 24 जून को आए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/earthquake-wreaks-havoc-in-venezuela-death-toll-reaches-2295-un/article-150636"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/2july21.jpg" alt=""></a><br /><p>काराकास (वेनेजुएला)। वेनेजुएला में दिन गुजरने के साथ-साथ भूकंप त्रासदी में हताहतों की बढ़ती संख्या डरावनी होती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने तो यह आंकड़ा 10,000 तक पहुंचने की आशंका जताई है। नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज के अनुसार, वेनेजुएला में आए दोहरे भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,295 हो गई है। रोड्रिगेज ने सरकारी टेलीविजन पर कहा कि हजारों अन्य लोग घायल भी हुए हैं।</p>
<p>स्काई न्यूज की रिपोर्ट में जॉर्ज रोड्रिगेज और संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय समन्वयक जियानलुका रैम्पोला डेल टिंडारो के हवाले से यह जानकारी दी गई। वेनेजुएला में 24 जून को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दोहरे भूकंप के बाद भारत समेत दुनिया भर के प्रमुख देशों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। टिंडारों ने माना कि संयुक्त राष्ट्र ने 10,000 बॉडी बैग मंगवाए हैं। एक न्यूज वेबसाइट के अनुसार, 43,000 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। रोड्रिगेज के अनुसार, 15,866 लोग बेघर हो गए हैं।</p>
<p>नासा के अनुमान के अनुसार, 59,000 इमारतें नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इस समय बचावकर्मी मलबे में जीवित बचे लोगों और अन्य पीड़ितों की तलाश कर रहे हैं। एक अमेरिकी जनरल ने बताया कि राहत कार्यों में मदद के लिए वेनेजुएला, प्यूर्टो रिको और कुराकाओ में 1,700 अमेरिकी कर्मियों को तैनात किया गया है। सहायता समूहों ने चेतावनी दी है कि पहले से ही कमजोर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर भारी दबाव है। वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम ने 500,000 लोगों को आपातकालीन खाद्य सहायता प्रदान करने के लिए 5 करोड़ डॉलर मदद की अपील की है।</p>
<p>सरकारी अधिकारियों के अनुसार 24 जून के दोहरे भूकंप के बाद वेनेजुएला में करीब 782 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए। अभी भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में मलबे को पूरी तरह से हटाया नहीं जा सका है। त्रासदी यह भी है कि वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में से एक है। लेकिन देश में आए दोहरे भूकंप की वजह से ईंधन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके कारण राहत और बचाव अभियान भी धीमी रफ्तार से चल रहे हैं। भारी मशीनरी चलाने के लिए पेट्रोल नहीं मिल रहा। जनता को अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को ढूंढने के लिए अपने हाथों से मलबा हटाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

                <link>https://www.tarunmitra.in/international/earthquake-wreaks-havoc-in-venezuela-death-toll-reaches-2295-un/article-150636</link>
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 07:57:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shishir Patel]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> अपने तेल अवीव के बिगड़े जानवर को काबू में रखो, नहीं तो होगा अंजाम बुरा:ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>तेहरान : ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सर्वोच्च नेता पर इजरायल की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की और अमेरिका को धमकी दी है कि अपने तेल अवीव वाले पालतू जानवर को काबू में रखें, नहीं तो इसका अंजाम बुरा होगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को "मौत के लिए निशाना बनाया गया है।"</p>
<p><br />अराघची ने अमेरिका को दी कड़ी हिदायत</p>
<p>अराघची ने कहा, "इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन की शर्तें बिल्कुल स्पष्ट</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/%C2%A0%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%97%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A5%8B--%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%88%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8/article-150606"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/iran.jpg" alt=""></a><br /><p>तेहरान : ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सर्वोच्च नेता पर इजरायल की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की और अमेरिका को धमकी दी है कि अपने तेल अवीव वाले पालतू जानवर को काबू में रखें, नहीं तो इसका अंजाम बुरा होगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को "मौत के लिए निशाना बनाया गया है।"</p>
<p><br />अराघची ने अमेरिका को दी कड़ी हिदायत</p>
<p>अराघची ने कहा, "इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन की शर्तें बिल्कुल स्पष्ट और सबके लिए सार्वजनिक हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने तेल अवीव में अपने चहेतों को चुप कराने का वादा किया है। अगर वे अपने आका की अवहेलना करते हैं, तो ईरान उन्हें सबक सिखाएगा।"</p>
<p>सोमवार को इजरायली मीडिया द्वारा साझा किए गए बयानों में, काट्ज़ ने ईरानियों को "अच्छा व्यापारी" बताया जो बातचीत में रियायतें हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, और कहा कि इजरायल ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगा। जवाब में, अराघची ने कहा कि "हमारे लोगों और नेतृत्व के खिलाफ किसी भी खतरे का तत्काल और जोरदार जवाब दिया जाएगा।"</p>
<p>इज़राइल के पूर्व सेना प्रमुख ने क्या कहा?<br />इज़राइल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़ेनकोट ने बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाया है कि उन्होंने जनता को डराने के लिए ऐसे दावे किए कि ईरान के पास परमाणु हथियार हैं। इज़राइली अख़बार 'येदियोथ अहरोनोथ' के अनुसार, आइज़ेनकोट ने मध्य इज़राइल में एक कॉन्फ्रेंस में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि ईरान की परमाणु क्षमताओं के बारे में प्रधानमंत्री के बयान झूठे थे। विपक्षी पार्टी 'यशार' के प्रमुख आइज़ेनकोट ने कहा, "नेतन्याहू ने बहुत गलत बातें कहीं। ईरान के पास कोई परमाणु बम नहीं था। वह इज़राइली जनता को डराने के लिए हकीकत को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं।"</p>
<p>नेतन्याहू ने क्या कहा था?<br />नेतन्याहू की उन टिप्पणियों का ज़िक्र कर रहे थे जो उन्होंने  एक इंटरव्यू में की थीं। उस इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा था: "मैं दो बार ईरान गया ताकि हमें उन परमाणु बमों से बचाया जा सके जो पहले से ही उनके पास थे और जिनसे हमारा विनाश हो सकता था।" बता दें कि ईरान लंबे समय से परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिशों से इनकार करता रहा है और उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण है।</p>
<p>क्या हुआ शांति वार्ता का?<br />अमेरिकी बातचीत करने वाले स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की कतर के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात के एक दिन बाद, ईरानी अधिकारी कतरी मध्यस्थों के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत के लिए दोहा में हैं। अमेरिका का कहना है कि तेहरान के साथ तकनीकी बातचीत जारी है। ईरान ने अमेरिका के साथ आमने-सामने की बातचीत से इनकार किया है और कहा है कि बातचीत अंतरिम समझौते को लागू करने पर केंद्रित है, जिसमें रोके गए फंड को जारी करना भी शामिल है।</p>
<p>मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के एलेक्स वटांका ने अल जज़ीरा को बताया कि ईरान के भीतर इस बात को लेकर विरोध बढ़ रहा है कि क्या समझौता लागू किया जाएगा। "यह MoU कागज़ पर तो प्रभावशाली लगता है, लेकिन असल में क्या हो रहा है?"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 05:07:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Subhash Pandey]]></dc:creator>
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                <title>सिंधु जल संधि पर भारत पाकिस्तान विवाद में अब चीन भी कूदा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बीजिंग: सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान में जारी विवाद में अब चीन भी कूद पड़ा है। एक चीनी विशेषज्ञ और कम्युनिस्ट पार्टी के करीबी विक्टर गाओ ने भारत पर पानी को कथित तौर पर हथियार बनाने के पाकिस्तान के आरोपों का समर्थन किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर भारत सिंधु नदी प्रणाली के अंतर्गत पाकिस्तान को दिए जाने वाले पानी का रुख मोड़ता है, तो चीन भी ऐसा कर सकता है। हालांकि, उनका यह दावा निजी है और चीन की सरकार की ओर से अभी तक ऐसी कोई चेतावनी नहीं दी गई है।</p>
<p><strong>चीनी विशेषज्ञ ने</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.tarunmitra.in/international/now-china-also-jumps-into-india-pakistan-dispute-over-indus-water/article-150604"><img src="https://www.tarunmitra.in/media/400/2026-07/china.jpg" alt=""></a><br /><p>बीजिंग: सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान में जारी विवाद में अब चीन भी कूद पड़ा है। एक चीनी विशेषज्ञ और कम्युनिस्ट पार्टी के करीबी विक्टर गाओ ने भारत पर पानी को कथित तौर पर हथियार बनाने के पाकिस्तान के आरोपों का समर्थन किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर भारत सिंधु नदी प्रणाली के अंतर्गत पाकिस्तान को दिए जाने वाले पानी का रुख मोड़ता है, तो चीन भी ऐसा कर सकता है। हालांकि, उनका यह दावा निजी है और चीन की सरकार की ओर से अभी तक ऐसी कोई चेतावनी नहीं दी गई है।</p>
<p><strong>चीनी विशेषज्ञ ने भारत को चेतावनी दी</strong><br />विक्टर गाओ ने कहा कि सिंधु नदी प्रणाली के कुछ हिस्सों में भारत के बजाय चीन 'अपस्ट्रीम' देश है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत, पाकिस्तान का पानी रोकता है, तो चीन भी भारत में आने वाले पानी को प्रभावित करने वाले ऐसे ही कदम उठा सकता है। उन्होंने कहा कि इन नदियों का जन्म चीन से होता है। ऐसे में चीन के पास वह लीवरेज है कि वह नदियों में बहने वाले पानी के साथ छेड़छाड़ कर सकता है।</p>
<p><strong>सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का किया समर्थन</strong><br />गाओ ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत पर निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान की पानी की सप्लाई रोकना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कदमों के गंभीर मानवीय नतीजे हो सकते हैं। पाकिस्तान के भी कई विशेषज्ञों ने चीन से अनुरोध किया है कि अगर भारत उनका पानी रोकता है तो वो भी भारत आने वाली नदियों के पानी को रोक दे।</p>
<p><strong>सिंधु जल संधि पर विवाद क्यों?</strong><br />भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत ने कहा था कि पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते हैं।<br />इसके बाद से पाकिस्तान का आरोप है कि भारत उसे सिंधु जल संधि के तहत नदियों में पानी के बहाव से जुड़ा डेटा नहीं दे रहा है।<br />पाकिस्तान का यह भी आरोप है कि भारत सिंधु जल संधि के अंतर्गत उसे मिलने वाली नदियों के पानी का रुख मोड़ रहा है।<br />उसने भारत पर सिंधु जल संधि की नदियों पर बड़े बांध बनाने, सिल्ट निकालने का भी आरोप लगाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 04:29:40 +0530</pubDate>
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